Herbert Theory In Hindi हरबर्ट की पंचपदी विधि

Herbert Theory In Hindi हरबर्ट की पंचपदी विधि: आधुनिक शिक्षा प्रणाली में ब्रिटिश दार्शनिक हरबर्ट स्पेंसर  पंचपदीय five steps थ्योरी अधिक मनोवैज्ञानिक एवं उपयोगी हैं. 27 अप्रैल 1820 को डर्बी, इंग्लैंड में जन्मे हरबर्ट को उनके शिष्यों ने अरस्तु के समकक्ष दर्जे का दार्शनिक माना हैं. सिविल इंजीनियर से शिक्षा दार्शनिक बनने का सफर बेहद प्रेरणादायक रहा. आज हम हरबर्ट स्पेंसर के पंचपदीय पाठ योजना विधि को विस्तार से जानेगे Herbert Theory in hindi

Herbert Theory In Hindi हरबर्ट की पंचपदी विधि

शिक्षण के कार्य को योजनाबद्ध रूप से प्रस्तुत करने के लिए टीचिंग मैथड यानी शिक्षण विधियों का सहारा लिया जाता हैं. इसका एक अन्य फायदा यह भी है कि इससे शिक्षण प्रक्रिया सुरुचिपूर्ण व प्राप्य मान अधिक रहता हैं. हरबर्ट महोदय द्वारा प्रस्तुत पाठ योजना को शिक्षण इतिहास की प्राचीनतम विधियों में से एक माना जाता है. इस विधि के जनक शिक्षाशास्त्री हरबर्ट थे. अधिगम अर्थात लर्निंग के सम्बन्ध में हरबर्ट महाशय का मानना था कि बच्चें शिक्षक द्वारा दी गई सूचनाओं को निरंतर ग्रहण करता रहता है. यदि उसे नवीन ज्ञान छोटे छोटे टुकड़ों में दिया जाए तथा नवीन ज्ञान को पूर्व ज्ञान से सम्बन्धित कर प्रस्तुत किया जाए तो यह अधिगम में सुगमता और शीघ ग्रहणता को जन्म देता हैं. मनोविज्ञान में अधिगम को शिक्षण के प्रतिमान को तीन स्तरों में विभाजित किया जाता हैं. स्मृति स्तर, बोध स्तर तथा चिन्तन स्तर. इन्होने सीखने के स्मृति स्तर को सर्वाधिक महत्वपूर्ण माना हैं. यह विधि पूर्णतया विषय वस्तु केन्द्रित होती है जिसमें छात्र की आवश्यकता रूचि मूल्य आदि का कोई स्थान नहीं है. हरबर्ट के स्मृति स्तर के प्रतिमान को इस सारणी के जरिये हम समझने का प्रयास करेगे.

हरबर्ट का स्मृति स्तर का शिक्षण प्रतिमान Herbert‘s Model Of Memory Level Teaching In Hindi

प्रतिमान स्मृति स्तर शिक्षण
1. उद्देश्य (Focus) छात्रों में निम्नांकित क्षमताएं विकसित करना. 1. मानसिक पक्षों का प्रशिक्षण 2. तथ्यों का ज्ञान प्रदान करना 3. सीखे हुए तथ्यों को याद करना 4. सीखे हुए तथ्यों का प्रत्यास्मरण तथा उन्हें पुनः प्रस्तुत करना
2. सरंचना (Syntax) स्मृति स्तर के शिक्षण की व्यवस्था को निम्नांकित ५ सौपनों में बांटा गया है जिसे हरबर्ट की पंचपदीय प्रणाली भी कहा जाता है. 1. प्रस्तावना व तैयारी तथा उद्देश्य कथन 2. प्रस्तुतीकरण 3. तुलना व सम्बन्ध 4. निष्कर्ष व सामान्यीकरण 5. प्रयोग व अभ्यास
3 सामाजिक प्रणाली 1. कक्षा में शिक्षक अधिक सक्रिय तथा डोमिनेटिंग होता है. 2. वह छात्रों के सामने पाठ्यवस्तु प्रस्तुत करता है, उनकी क्रियाओं को नियंत्रित करता है और प्रेरणा प्रदान करता है. 3. छात्रों का स्थान गौण रहता है. 4. छात्र चुपचाप शिक्षक को आदर्श मानते हुए उनका अनुसरण करते है.
4. मूल्यांकन प्रणाली 1. मूल्यांकन लिखित व अलिखित दोनों प्रकार का होता है. 2. परीक्षा में रटने की क्षमता पर जोर दिया जाता है. 3. वस्तुनिष्ट परीक्षा में प्रत्यास्मरण तथा अभिज्ञान के पद पर महत्वपूर्ण होते है.

हरबर्ट पंचपदी विधि इन हिंदी Herbert Theory In Hindi

प्रसिद्ध शिक्षाशास्त्री एवं मनोवैज्ञानिक हरबर्ट के सिद्धांतों के आधार पर उसके शिष्यों ने इस पद्धति को विकसित किया. अन्य विषयों की भांति संस्कृत शिक्षण करते समय भी इसका उपयोग किया जाने लगा. इसमें पांच पदों द्वारा पाठ के शिक्षण का विधान किया गया हैं. जो ये हैं.

प्रस्तावना

यह छात्रों के पूर्व ज्ञान से सम्बन्धित होती है इसमें पढाए जाने वाले पाठ को सम्बद्ध करने के लिए कुछ सरल प्रश्न पूछे जाते हैं. जो परस्पर सम्बन्धित होते हैं. यदि प्रस्तावना सफल रहती हैं तब पाठ की सफलता के अवसर भी बढ़ जाते हैं.

विषयोंस्थापन्न

इस सोपान में उद्देश्य कथन के साथ विषय का प्रस्तुतिकरण किया जाता हैं. प्रत्येक विधा को पढाते समय विषयोस्थापन अलग अलग ढंग से किया जाना चाहिए.

तुलना

जिन जिन स्थलों पर कठिनाई होती है उन शब्दों एवं भावों को स्पष्ट करने के लिए दृश्य श्रव्य सामग्री का प्रयोग किया जाता हैं तथा तुलना करवाते हुए विषय स्पष्ट किया जाता हैं.

सामान्यीकरण

इस सोपान में पढ़े हुए पाठ के निष्कर्ष पर छात्र पहुचने का प्रयास करते हैं जैसे व्याकरण शिक्षण में विभिन्न उदाहरनो का अध्ययन करने के बाद ततसम्बन्धी नियम बताना. गद्य तथा पद्य शिक्षण में पाठ का सार शिक्षक द्वारा बताना तथा छात्रों से प्रश्नों द्वारा मुख्य भाव ज्ञात करना. समान भाव की कविता के आधार पर प्रश्न पूछना आदि.

प्रयोग

पाठ को पढ़ने तुलनात्मक अध्ययन करने के बाद नवार्जित ज्ञान को व्यवहार में लाने की योग्यता छात्रों में उत्पन्न करना आवश्यक हैं. इस सोपान में संस्कृत भाषा के पाठों में छात्रों से अभ्यास कार्य करवाया जाता हैं. यह अभ्यास कार्य कक्षा कार्य तथा गृहकार्य के माध्यम से सम्पन्न होता हैं. इसका मुख्य उद्धेश्य छात्रों के प्राप्त ज्ञान को परिपुष्ट करना हैं.

हरबर्ट पंचपदी विधि के गुण

  1. यह विधि मनोवैज्ञानिक सिद्धांतों पर आधारित हैं.
  2. इस विधि द्वारा शिक्षण क्रमबद्ध होता हैं.
  3. इसमें शिक्षण की बोधगम्यता पर बल दिया जाता हैं.
  4. इससे प्राप्त ज्ञान चिरस्थायी होता हैं.

हरबर्ट पंचपदी पाठ योजना के दोष

  1. सभी विषयों के शिक्षण में उपयोगी नही है जैसे विज्ञान विषय
  2. संस्कृत शिक्षण में भी सभी विधाओं के लिए प्रभावशाली नहीं हैं.
उम्मीद करता हूँ दोस्तों Herbert Theory In Hindi हरबर्ट की पंचपदी विधि का यह आर्टिकल आपकों पसंद आया होगा. शिक्षण विधियों के तहत इस लेख में हरबर्ट विधि की दी गई जानकारी पसंद आई हो तो इसे अपने दोस्तों के साथ भी शेयर करें.

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