Hindi Diwas 2018 Speech, Essay, Nibandh, Bhashan in Hindi

National Hindi Day, Hindi Diwas 2018 Speech, Essay, Nibandh, Bhashan in Hindi: भारत में हर साल 14 सितम्बर को हिंदी दिवस मनाया जाता हैं. हिंदी डे का बेहद ख़ास महत्व हैं.

National Hindi Day

Hindi Diwas 2018 Speech: 14 सितम्बर 1949 को हिंदी भाषा को भारत की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया था. इस कारण 14 सितम्बर के दिन ही हिंदी दिवस मनाया जाता हैं,इसकी शुरुआत 1953 से हुई.

हिंदी दिवस 2018, Hindi Diwas 2018 Speech, Essay, Nibandh, Bhashan in Hindi: हमारे देश में हर साल 14 सितम्बर को राष्ट्रीय हिंदी दिवस मनाया जाता हैं. हिंदी भाषा व हिंदी भाषियों की भावना के सम्मान के इस दिन को सेलिब्रेट करने का मुख्य उद्देश्य आम लोगों तक हिंदी के महत्व को पहुचाना तथा उन्हें अपनी मातृभाषा से जोड़ना हैं. तक़रीबन एक हजार साल पुरानी हिंदी भाषा आज दुनियां की तीसरी सबसे बड़ी एक भारत जैसे सर्वाधिक जनसंख्या वाले देश की सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा के रूप में उभर कर सामने आई हैं. हिंदी भाषा को बोलने और समझने वालों की संख्या भारत में 80 करोड़ से अधिक हैं. कई लाख लोग विदेशों में भी हिंदी को समझते हैं. विश्व के कई देशों में हिंदीभाषियों की संख्या लाखों में हैं. तथा इनके प्रशिक्षण एवं शिक्षण के लिए कई विश्वविद्यालय भी संचालित किए जा रहे हैं. साहित्य समाज का दर्पण होता है. यह कहावत हिंदी साहित्य ने चरितार्थ कर दिखाई हैं. भक्तिकालीन साहित्य के कारण हिंदी आज इतने बड़े श्रोता वर्ग की भाषा बन पाई हैं. अंग्रेजी से बड़ा जिसका शब्दकोश, त्रुटीरहित व्याकरण, विस्तृत साहित्य, बोलने एवं समझने वालों की संख्या करोड़ों में इतनी सारी विलक्षण विशेषताओं के कारण भी आज हिंदी अपने ही घर अपने ही लोगों के बिच दम घुट कर जी रही हैं.

कबीर, तुलसीदास, रहीम, सूरदास, निराला, दिनकर, भारतेंदु, प्रेमचंद जैसे विराट व्यक्तित्व के धनी लोगों ने हिंदी में अपनी रचनाओं को लिखकर इस भाषा के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया हैं. आजादी से पूर्व सम्पूर्ण भारत के क्रांतिकारियों की एक ही तमन्ना थी. कि आजाद भारत की सम्पर्क भाषा हिंदी ही बने. क्योंकि यही एक मात्र ऐसी भाषा थी जिसे उत्तर से दक्षिण तथा पूर्व से पश्चिम तक सभी क्षेत्रों के लोग जानते थे. हमारे पूर्वज जानते थे कि जिस भाषाई समस्या के कारण हमारे अपने देश के लोगों से हम अलग थलग जी रहे हैं. इसकी वजह हमारी अलग अलग भाषाएँ एवं बोलियाँ हैं अतः स्वतंत्र भारत में सर्वप्रथम हिंदी को देश की राष्ट्रभाषा घोषित कर देनी चाहिए.

जब भारत आजाद तो गया तो ये ही हिंदी का समर्थन करने वाले बुद्धिजीवी हिंदी के विरोध में आ गये तथा भारत पर राज करने वाली अंग्रेजी सत्ता की प्रतीक भाषा को समर्थन देने लगे. इन परिस्थियों में हमारे संविधान निर्माताओं ने हिंदी के साथ साथ अंग्रेजी को भी भारत की राजभाषा अगले 15 वर्षों के लिए बनाया. तथा यह भी कहा गया कि इस अवधि तक सरकार का यह दायित्व हैं कि वो सरकारी तन्त्र को पूर्ण रूप से अंग्रेजी से आजाद कर हिंदी को स्थापित करे तथा देश के जिन हिस्सों में हिंदी बोलने व समझने की अधिक परेशानी हैं. उस दिशा में कार्य कर लोगों को हिंदी में शिक्षित करे. भारत सरकार आजादी के बाद भाषा विषय को बिलकुल भूल गई. जिसका नतीजा 1965 में देखने को मिला था.

जब अंग्रेजी को हटाकर हिंदी को भारत की राष्ट्र भाषा बनाने की बात आई तो दक्षिण के कुछ तथाकथित राजनीतिज्ञ अपने स्वार्थ की रोटियां सकने के लिए आम जनता में जहर भरकर उन्हें सडक पर ले आए. नतीजा यह निकला कि तमिलनाडू में व्यापक स्तर पर हिंदी के विरोध में प्रदर्शन होने लगे. भूख हड़ताले की गई. हिंसा का माहौल देख सरकार ने अंग्रेजी की पिछली कार्य अवधि को अनिश्चित काल के लिए आगे बढ़ा दिया, जो आज भी अनवरत रूप से जारी हैं.

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Hindi Diwas Speech:- हिंदी दिवस के अवसर पर देशभर के विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में विभिन्न प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रमों एवं प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता हैं. आमजन तक हिंदी के महत्व को प्रचारित करने के लिए समाचार पत्रों एवं टेलीविजन में भी विज्ञापन दिए जाते हैं. विद्यालयों में आयोजित हिंदी दिवस कार्यक्रमों में हिंदी दिवस भाषण, हिंदी दिवस निबंध, हिंदी दिवस कविता, हिंदी दिवस पर नारे, हिंदी दिवस पर शायरी, हिंदी पर स्पीच आदि बोलने के लिए स्टूडेंट्स को कहा जाता हैं. आप मातृभाषा हिंदी पर स्पीच के लिए हमारे इस लेख की मदद ले सकते हैं.

अब वक्त आ गया हैं. मात्र हिंदी दिवस के आयोजनों एक दिन हिंदी प्रयोग करने की शपथ पर्याप्त नही हैं. राष्ट्र की एकता अखंडता एवं सम्मान के लिए हिंदी को अब भारत की राष्ट्र भाषा के रूप में स्थापित करना होगा. यह निर्णय अहिन्दी भाषियों पर थोपने का सवाल नही हैं. उन्हें यह समझना होगा कि हम जिस अंग्रेजी को अपनी राज-काज की भाषा बनाए बैठे हैं. वो 72 साल बाद भी आज भी हमारी गुलामी की प्रतीक बनी हुई हैं. हमें अपनी सोच को बदलना होगा. हमारे पास हिंदी के सिवाय को विकल्प भी नही हैं. बांगला, तमिल, तेलगू, मराठी आदि भारत की बड़ी स्थानीय भाषाएँ हैं, मगर इनकों समझने वाले एक या दो राज्यों से अधिक नही हैं. हिंदी ही एकमात्र भाषा हैं, जिन्हें देश के 15 से अधिक राज्यों में बोली और समझी जाती हैं. सरकार भी इस दिशा में प्रयास कर अहिन्दी भाषी राज्यों में हिंदी के प्रचार का प्रबंध कर इस विरोध को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं. ऐसा होने पर ही सर्वसम्मति से हिंदी भारत की राष्ट्र भाषा बनने का सपना पूरा कर सकती हैं.

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