हिंदी दिवस पर स्पीच – Hindi Diwas Speech In Hindi 2018

फ्रेड्स 14 सितम्बर को हिंदी दिवस आ रहा हैं. जरुर आप Hindi Diwas Speech 2018 की तैयारी में लग गयें होंगे. यह हमारी जुबान हिंदी के सम्मान का दिन है, हम में से हर कोई को हिंदी दिवस पर स्पीच, भाषण, कविता, शायरी, निबंध आदि इस अवसर पर अवश्य ही बोलने चाहिए. अपनी मातृभाषा को भारत की राष्ट्रभाषा के रूप में देखना हर हिन्दीभाषी का सपना हैं. ठीक ऐसा ही एक ड्रीम 14 अगस्त 1949 को पूरा हुआ था, जब इतिहास में पहली बार हिंदी को औपचारिक तौर पर भारत की राजभाषा बना दिया गया.हिंदी दिवस पर स्पीच - Hindi Diwas Speech In Hindi 2018

स्वतंत्र भारत में हिंदी दिवस मनाने का इतिहास 14 सितम्बर 1953 से शुरू हुआ, जब पहली भारतीय गणतंत्र सरकार ने इसे हर वर्ष मनाने का निर्णय लिया था. देश की आजादी से पूर्व ही हर स्वतंत्रता सेनानी की यह तमन्ना थी, कि एक दिन ऐसा आए जब देश के हर कोने में हिंदी बोली जाए.

आजादी के बाद जिस तरह स्वतंत्रता का महत्व कम होता जा रहा है, उसी तरह हिंदी भाषा भी अपना महत्व खोती नजर आ रही हैं. कहने को भले ही हम हर साल 14 सितम्बर को राष्ट्रीय हिंदी दिवस मना लेते है, मगर यह एक औपचारिकता की तरह हो गया हैं, अगले दिन लोग फिर हिंदी को भूलने लगते हैं.

आज के इस लेख में आपके साथ हिंदी दिवस पर स्पीच साझा कर रहा हूँ, आप इन हिंदी भाषा के भाषण को अपने स्कूल के कार्यक्रम में बोल सकते हैं. अप्रत्यक्ष रूप से आपका यह स्पीच हिंदी के लिए संघर्षरत लोगों में आपकी गिनती जरुर कराएगा.

हिंदी दिवस का स्पीच – Speech On Hindi Diwas In Hindi 2018

हिंदी दिवस स्पीच 2018, हिंदी दिवस पर स्पीच, हिंदी दिवस के लिए स्पीच, हिंदी भाषा पर स्पीच हिंदी में, हिंदी दिवस 2018 का स्पीच, हिंदी दिवस स्पीच इन हिंदी फॉर स्टूडेंट्स.

Hindi Diwas Speech 2018, Speech On Hindi Diwas 2018, Hindi Diwas Ka Speech, Hindi Diwas Par Hindi Me Speech, Hindi Diwas Par Speech In Hindi.

Best Hindi Diwas Speech In Hindi For Students

आप सभी को सुप्रभात, नमस्कार. जैसा की हम सभी जानते है आज का दिन हमारी मातृभाषा हिंदी को समर्पित है. इसे हिंदी दिवस कहा जाता हैं. मुझे गर्व है अपने हिंदी भाषी होने पर मैं उस भाषा को समझता हूँ जिसमें मेरे देश की सभ्यता एवं संस्कृति की झलक दिखती हैं.

हिंदी दिवस पर स्पीच के लिए मुझे आमंत्रित करने के लिए आप बहुत बहुत धन्यवाद्. हमारे साहित्य के पुरोधा भारतेंदु हरिश्चन्द्र जी ने कहा था ”निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल बिनु निज भाषा ज्ञान के मिटत न हिये का सूल.

इनके कहने का अर्थ था कि अपनी मातृभाषा की उन्नति से ही सबकी उन्नति यानी विकास संभव हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि निज भाषा के विकास के साथ समग्र विकास जुड़ा हैं. अपनी माँ की भाषा को समझे बिना ह्रदय की पीड़ा, दुःख, समस्या, कठिनाई का हल नही किया जा सकता हैं.

अतः हमें केवल और केवल अपनी मातृभाषा हिंदी को ही अपनाना चाहियें, देश के शिक्षा संस्थान, व्यापार, न्याय व्यवस्था, कला की भाषा के रूप में हमें अंग्रेजी को हटाकर हिंदी को लाना होगा. इस विदेशी भाषा ने केवल हमारा शोषण किया है, बल्कि हमारे जन जन की भावनाओं को आहत किया हैं. हमारे शहीदों के सपनों को धूमिल किया हैं, हमारे बच्चों के भविष्य को अंधकार में धकेला हैं.

चलिए मेरे हिंदी दिवस पर स्पीच की एक बात पर ताली जरुर बजाइयेगा, बड़े यत्न से यह तथ्य खोज निकाला हैं. हम जिस अंग्रेजी के गौरवगान में पगला रहे हैं. वो शुरू होती है ए यानी एप्पल एक फल से और समाप्त होती है z यानी जेब्रा से. अच्छे खासे इंसान को पहाड़ी गधा बनाने वाली भाषा की तुलना मेरी निज हिंदी भाषा से करनी भी नही चाहिए. मगर हवा कुछ कम्पेयर करने की ही चल रही हैं.

आपकों हिंदी और अंग्रेजी में दूसरा फर्क बतलाता हूँ, मेरी मातृभाषा, मेरी राजभाषा, मेरी राष्ट्रभाषा, मेरी हिंदी शुरू होती है अ यानि अनपढ़ से और समाप्त होती हैं…….. बताइए भाई कख ग तो सभी को आते है. ज्ञ ज्ञानी से. यानी एक अनपढ़ को ग्यानी बना देती हैं.

भलें ही आप इसे संयोग माने मगर सच्चाई तो इसमें भी हैं. हिंदी भाषा देश को एक कर सकती हैं. बहुत से लोग यह सोचते होंगे देश तो पहले से ही एक है फिर कौनसे एक करने की बात कर रहा हैं. मित्रों मेरे कहने का मतलब है यह भावनात्मक रूप से एक करती हैं. आज आप पश्चिम बंगाल या चैन्नई चले जाइए.

वों इस देश के शहर है, मगर आपकों ऐसा लगेगा नही, क्योंकि जो भाषा वे लोग बोलते है आप समझोगे नही, जो आप बोलेगे वो कतई समझने वाले नही हैं. यदि यही पर आप बिहार या उत्तरप्रदेश के किसी भाग में घुमने जाओगे तो आपकों अलग ही नजारा देखने को मिलेगा. आप चाय मांगोगे तो चाय ही मिलेगी, कोई लाठी नही.

यह फर्क केवल हिंदी ही मिटा सकती हैं. जरुर इस दिशा में सरकारी एवं गैर सरकारी स्तर पर बड़े कार्य व निर्णय लेने की आवश्यकता तो पड़ेगी. मगर 3-4 सालों में भारत का स्वरूप बदला बदला सा लगेगा. हमारी विविधता तो हर क्षेत्र में हैं मगर एकता के क्षेत्र बेहद कम हैं, जिसे हिंदी भाषा पूरा कर सकती हैं.

जय हिंदी जय हिंदी !! इसी के साथ मैं अपना हिंदी दिवस पर स्पीच समाप्त करता हूँ. आशा करता हूँ मेरा यह शानदार भाषण आपके भी सोई सपने को जगाने में सफल हुआ होगा.

यदि आपकों हिंदी दिवस का स्पीच – Hindi Diwas Speech In Hindi पसंद आया हो तो इस अवसर पर हर भारतीय के फोन तक यह भाषण पहुचे, इसलिए सोशल मिडिया पर जरुर शेयर करे.

Leave a Reply