हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा है एस्से इन हिंदी विकिपीडिया | Hindi Hamari Rashtrabhasha Hai Essay In Hindi Wikipedia

राष्ट्रभाषा के बिना राष्ट्र गूंगा माना जाता हैं, हम सभी सौभाग्यशाली हैं कि हिंदी को हमारे देश में राष्ट्रभाषा होने का सम्मान प्राप्त हैं.

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  • शीर्षक : हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा है एस्से
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भाषा को व्यक्ति द्वारा अपने विचारों एवं भावों को व्यक्त करने का मुख्य माध्यम माना जाता हैं. प्रत्येक जीव जन्तु जाति की अपनी भाषा होती हैं. उसी तरह प्रत्येक व्यक्ति की अपनी एक भाषा हैं.

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hindi is our national language essay in hindi:- व्यक्ति भाषा के द्वारा ही अन्य व्यक्तियों से सम्पर्क स्थापित कर सकता हैं. व्यक्ति से समाज बनता है तथा समाज से राष्ट्र का निर्माण होता हैं. हर एक राष्ट्र अथवा देश में भिन्न भिन्न भाषाएँ होती है, परन्तु हर देश की अपनी एक राष्ट्रभाषा होती है, जिसेसे उस देश की पहचान होती है, साथ ही राष्ट्र भाषा ही अमुक देश की भाषा, संस्कृति, विचारों एवं परम्पराओं की पहचान को बनाती हैं. इस तरह हिंदी भारत की राष्ट्र भाषा हैं.

वर्ष 1947 में भारत को आजादी मिलने के बाद ही भारत की राष्ट्र भाषा हिंदी को घोषित कर दिया गया. हमारे भारत देश में संविधान में हिंदी को राष्ट्रभाषा का दर्जा दिया गया हैं. उस वक्त विद्वानों व बुद्धिजीवियों द्वारा दिया गया यह सम्मान विवाद का विषय न होकर इस देश के संविधान की विरासत ही हैं.

हमारे देश के विशेयज्ञों द्वारा गहन सोच विचार के बाद ही हिंदी को राष्ट्र भाषा का यह दर्जा दिया गया था.

उस समय के अधिकतर विद्वानों की यही राय थी, कि चूंकि भारत के अधिकतर क्षेत्र एवं बहुत बड़ी आबादी द्वारा बोली जाने वाली भाषा होने के कारण राष्ट्रभाषा का सम्मान प्राप्त करने की हकदार हिन्दी ही हो सकती हैं. आज के परिद्रश्य में भी हिंदी भारत के जन जन की भाषा हैं.

दूसरी तरफ आज के समय में हमारी मातृभाषा हिंदी को पग पग पर अपमानित होना पड़ रहा हैं. उसे अभी तक वों सम्मान नही मिल पाया हैं, जिसकी वों हकदार हैं तथा उसे मिलना चाहिए. यह कटु सत्य है कि भारत को सैकड़ों वर्षों तक अंग्रेजों की गुलामी करनी पड़ी थी तथा इस दास्ता से निकलने के लिए एक लम्बी लड़ाई भी लडनी पड़ी थी. उस काल में प्रशासन की भाषा होने का दर्जा अंग्रेजी को प्राप्त था.

भले ही आज हम अंग्रेजों से आजाद हो गये है लेकिन बड़े दुःख के साथ कहना पड़ता है आज भी हम अंग्रेजी के गुलाम हैं. हमारे सिस्टम की भाषा अंग्रेजी ही हैं, आप भारत के किसी न्यायलय में जाकर इसका प्रमाण देख सकते हैं. वहां सम्पूर्ण वार्तालाप अंग्रेजी में ही होते हैं. देश का दुर्भाग्य हैं कि न केवल हमारे राजनेता भी अंग्रेजी को वरीयता देते हैं बल्कि इस देश के पढ़े लिखे युवक व नौजवान भी अंग्रेजी बोलने पर स्वयं को गौरवान्वित महसूस करते हैं.

इस बात में कोई दोराय नही हैं, कि आधुनिक विश्व की सभी भाषाएँ अपने आप में समर्द्ध एवं वैज्ञानिक हैं, व्यक्ति को अधिक से अधिक भाषाओं का ज्ञान होना चाहिए, मगर किसी विदेशी भाषा का टुटा फुटा ज्ञान होने पर अपनी ही राष्ट्रभाषा हिंदी को अपमानित करना या उसका तिरस्कार करना सही नही हैं.

आज के समय में अंग्रेजी पढ़े लिखे लोगों को विद्वान समझा जाता हैं. मानते है कि जिसे अंग्रेजी आती है वो अच्छी नौकरी प्राप्त कर सकता हैं. इसी विचारधारा को पालने वाले लोग हिंदी बोलने वाले को हिन तथा पिछड़ा हुआ मानते हैं. उन्हें इस बात का इल्म नही हैं कि हिंदी भाषा विश्व की सबसे समर्द्ध भाषा हैं, जितना बड़ा अंग्रेजी का शब्दकोश हैं उससे कही गुना बड़ी हिंदी शब्दावली हैं. अंग्रेजी भाषा आप बेहद अल्प अवधि में सीखकर पारंगत हो सकते है मगर हिंदी को सीखते कई साल लग सकते हैं.

हमने अपने इतिहास में कई बार विदेशी नेताओं को अपनी ही राष्ट्रभाषा में बोलते हुए सुना होगा. क्या हमें कभी ताज्जुब हुआ, क्या हमने कभी सोचा ये अपने मातृभाषा से प्रेम करते है फिर हम क्यों एक विदेशी भाषा के तोते बने हुए हैं. जब नरेंद्र मोदी ने कई बड़े देशों में लाखों की भीड़ को हिंदी में संबोधित किया था, तो यह हिंदी भाषा के इतिहास का अब तक सबसे स्वर्णिम पल था. मोदी सरकार के नेताओं ने न सिर्फ संयुक्त राष्ट्र संघ में बल्कि अन्य देशों में भी हिंदी भाषा में अपनी बात कहकर हिंदी भाषियों का दिल जीता हैं.

अटल बिहारी वाजपेयी जी भारत के पहले प्रधानमंत्री थे, जो हिंदी प्रेमी थे. सच्चे मायनों में वे स्वदेशी प्रधानमंत्री थे. आज की भारतीय सरकार विश्व में हिंदी का प्रसार प्रचार कर रही हैं यह हमारी मातृभाषा के सम्मान का विषय हैं, हम समस्त हिंदी प्रेमी राजनेताओं का तहे दिल से धन्यवाद करते हैं. आज की आवश्यकता है हम जन जन में हिंदी के प्रति प्रेम जगाए, माँ (मातृभाषा) के प्रति प्यार तो सभी को होता हैं मगर उसे बस जगाने की आवश्यकता हैं.

वो आप और हम सभी मिलकर कर सकते हैं. हमारी राष्ट्रभाषा हिंदी हमारे देश की संस्कृति की जड़ हैं. आज हमारी संस्कृति को बचाने के लिए राष्ट्रभाषा हिंदी को जीवित रखना अत्यंत आवश्यक हैं. इसके लिए सरकारी एवं गैर सरकारी दोनों स्तरों पर हिंदी भाषा का उपयोग किया जाना चाहिए. आज हमें फिर से अपनी माँ हिंदी को माँ कहने में शर्म महसूस नही होनी चाहिए.

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