Hindi Poems For Class 1 | पहली कक्षा के लिए हिंदी कविता

Hindi Poems For Class 1 मित्रों एक बार फिर हाजिर हैं आपके साथ इस बार आपके लिए जो हिंदी कविता संग्रह लेकर आए हैं इनमे आप पहली कक्षा के लिए हिंदी कविता पढेगे. इस क्लास के विद्यार्थियों के मानसिक स्तर के अनुरूप बेहद सरल और सीधी भाषा में रचित ये कविताएँ पढ़िए और आनन्द उठाइये.

Hindi Poems For Class 1 Kids

छोटे से बड़े हिंदी कविता

एक दिन बोली मुझसे डे नानी,
मै कहती तुम सुनों कहानी |
एक खेत बिनु जुता पड़ा था,
उबड़ खाबड़ बहुत बड़ा था ||

कोई चिड़िया बिज उठाकर,
उड़ती उड़ती गई डालकर |
हवा डराती, धुप जलाती,
मिटटी उसको खूब दबाती ||

मिटटी की गोदी में रहकर,
सूरज की किरणों में जलकर |
कहा बीज ने हाय अकेला,
पर न डरूंगा भले अकेला ||

कुछ दिन बीते, अंकुर फूटे,
कोमल-कोमल पत्ते फूटे,
बीज बन गया पौधा प्यारा,
हरा-भरा लहराता, प्यारा ||

पौधे से बढ़, पेड़ कहाया,
दूर-दूर तक फैली छाया |
बस, जितने भी बने बड़े हैं,
छोटे से बढ़, बड़े बने हैं ||

Hindi Poems For Class 1  वर्षा कविता

काले मेघा पानी दे
पानी दे गुड़धानी दे |
बरसो खूब झमा-झम-झम
नाचे मोर छमा-छम-छम ||
खेतो से खलिहानों तक
पर्वत से मैदानों तक |
धरती को रंग धानी दे
काले मेघा पानी दे ||
भर से सारे ताल-तलैया
नाचे ! सब मिल छम्मक-छैया |
हमको नई कहानी दे
सबको दाना-पानी दे |
पानी दे जिंदगानी दे |
काले मेघा पानी दे ||

Hindi Poems For Class 1 अबलक घोड़ी

अबलक घोड़ी लाल लगाम |
तीन लाख हैं इसके दाम ||
आभूषण भी कई कमाल |
छमछम नाचे सरपट चाल ||
जैसे हुआ ठंड का अंत |
आया झटपट यहाँ बंसत ||
उसके ऊपर एक सवार |
बैठे हर क्षण एनक धार ||
और फटाफट चढ़ा किशोर |
साथ घुमने चारों ओर ||
त्रषभ श्रवण हैं, ज्ञानी मित्र |
यहाँ-वहा के लेते चित्र ||

Hindi Poems For Class 1 साफ़ हाथ में हैं दम

सबसे पहले होता हैं हाथ गीला,
फिर हाथ पे नाचे साबुन रंगीला |

हाथ से होता हैं फिर हाथ का साथ
फिर घूम के आगे पीछे साबुन से खेले हाथ |

खेलों अब उंगलियों में घुसकर,
फिर चलाओ हथेलियों पर नाख़ून का चक्कर |

हाथ करे फिर पानी में छम-छम,
क्युकि, साफ़ हाथ में ही हैं दम |
खाने से पहले और शौच के बाद,
हम सब धोए साबुन से हाथ |

Hindi Poems For Class 1 रेल का खेल

आओ आओ खेले खेल|
छू छूककर बन जाएं रेल ||

तू तो इंजन बन जा कालू |
गार्ड बनेगा लल्ला बालू ||

चाहे जीतनी भी हो दुरी |
टिकट खरीदो बहुत जरुरी ||

वरना टी -टी देगा ठेल |
छुक -छुक कर बन जाए रेल ||

पीछे डिब्बे आगे इंजन |
जिनमे है, महमूद, निरंजन ||

जोर्ज,पदमजी,कीटटी ,लीला |
रेखा, सिमरनकौर, जमीला ||

भीड़ भड़क्का धक्कमपेल |
छुक-छुक कर बन जाए रेल ||

कार मोटरे पीछे छोड़े |
पकड़ न पाए हाथी घोड़े ||

पटरी-पटरी दौड़ी आती |
रोज मुसाफिर भरकर लाती ||

अपनों से करवाती मेल |
आओ-आओ खेले खेल ||

पटरी पर तेजी से दौड़े |
बड़े-बड़े नगरो को जोड़े ||

और ऊंट के पड़ी नकेल |
छुक छुक कर बन जाए रेल ||

सिग्नल का यह आदर पाती |
टिकट जहा का हो, पहुचाती ||

छुक-छुक्कर बन जाए रेल |
आओ आओ खेले खेल ||

Hindi Poems For Class 1 चिडकली

फुर्र फुर्र करती एक चिडकली
म्हारी चाल मांय आई
घपो जतन सु चुच मायने
दाब तिनकला लाई
ओलातर सी रख्या तिनकला
आलो एक बण्यो
घने छाव सु
घास-पूस सू
आले ने सजायो
बनियों आलो छिड़ी बनी माँ
अंडा लाई तीन
कई दिन सैया अंडा ने
आँख न लीनी नीद
फूट्या अंडा बचिया
निकलया
जद चिड़ि हरकाई
चि चि करता बछिया ने
ल्या ल्या चुण चुगाई
निकली पाख्या बचिया रे
तद उड्नो चिड़ि सिखाई
साल सु बारे री दुनिया री
उंच नीच समझाई
कर हुसियार उड़ाया बा नै
ऊँचा आभा माई
फुदक फुदककर फुर्र फुर्र करता
रुंखा माथै जीवण गीत सुनाई ||

Hindi Poems For Class 1 चार चने

पैसे पास होते तो चार चने लाते
चार में से एक चना तोते को खिलाते
तोते को खिलाते तो टाय टाय गाता
टाय टाय गाता तो बड़ा मजा आता

पैसे पास होते तो चार चने लाते
चार में से एक चना घोड़े को खिलाते
घोड़े को खिलाते तो पीठ पर बिठाता
पीठ पर बिठाता तो बड़ा मजा आता

पैसा पास होता तो चार चने लाते
चार में से एक चना चूहे को खिलाते
चूहे को खिलाते तो दांत टूट जाता
दांत टूट जाता तो बड़ा मजा आता

Hindi Poems For Class 1 चाँद का कुरता

हठ कर बैठा चाँद एक दिन, माता से यह बोला, |
सिलवा दो माँ मुझे ऊन का, मोटा एक झिंगोला ||
सन सन करती हवा रात भर, जाड़े में मरता हु |
ठिठुर-ठिठुरकर किसी तरह, यात्रा पूरी करता हु ||
आसमान का सफर और यह मौसम हैं जाड़े का |
अगर तो ला दो कुरता ही, कोई भाड़े का ||
बच्चे की सुन बात कहा माँ अरे सलोने |
कुशल करे भगवान्, लगे न तुझको जादू टोने ||
जाड़े की बात यह तो ठीक हैं पर मै तो डरती हु |

एक नाप में कभी नही, तुमको देखा करती हु ||
कभी एक अगुलभर चौड़ा, कभी एक फुट मोटा |
बड़ा किसी दिन हो जाता हैं और किसी दिन छोटा ||
घटता बढ़ता रोज , किसी दिन ऐसा भी करता |
नही किसी की आखो को तू दिखलाई पड़ता हैं ||
अब तू ही यह बता नाप, तेरा किस रोज लिवाए |
सी दे एक झगोला जो, हर रोज बदन में आए ||

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