हिंदी प्रार्थना गीत स्कूल के बच्चों के लिए | Hindi Prayer Songs For Students

Hindi Prayer Songs For Students प्यारे विद्यार्थियों आज के इस लेख में आपके लिए हिंदी प्रार्थना गीत लेकर आए हैं. छोटी कक्षाओं के वे बालक-बालिका जो अपने विद्यालय के प्रार्थना कार्यक्रम में prayer in hindi की खोज कर रहे हैं. उन्के लिए ईश् वंदना के कई नवींन गीत यहाँ दिए जा रहे हैं. जिन्हें आप याद करके प्रार्थना कार्यक्रम के दौरान काम में ले सकते हैं. यदि आपके पास भी hindi devotional songs से सम्बन्धित कोई लेख हो तो हमे कमेंट कर जरुर बताए. ताकि आपके गीत को भी इस लेख में सम्मलित किया जा सके.

हिंदी प्रार्थना गीत स्कूल के बच्चों Hindi Prayer Songs For Students 

Hindi Prayer Songs For Students

Morning Prayer For School Assembly In Hindi प्रार्थना क्या होता है? Prayers meaning in Hindi

ईश्वर को स्मरण करने का सबसे सरल एवं सर्वमान्य साधन प्रार्थना को माना जाता हैं. अपने परम पिता परमेश्वर का स्मरण या उनसे निवेदन करने के लिए कुछ साधारण नियमों के साथ भाव युक्त किया गया निवेदन प्रार्थना कहा जाता हैं. लगभग सभी धर्मों में ईश्वर को पाने, उन्हें याद करने अथवा उन तक अपना निवेदन पहुचाने का एक माध्यम माना गया है वो है प्रेम पूर्वक प्रार्थना.

प्रार्थना कैसे करें? How to do prayer in Hindi?

इबादत प्रार्थना या प्रेयर अरदास में कुछ नियम भी माने गये है जिनका विशेष ध्यान रखा जाता हैं. प्रार्थना की पहली शर्त यह मानी जाती है कि आप जिस प्रार्थना स्थल को चुने वह खुली जगह में हो तथा भीड़भाड़ से दूरी पर स्थित हो. आपकी प्रार्थना किसी अन्य के कार्य में बाधा या भावनाओं को ठेस पहुचाने वाली नहीं हो. आमतौर पर धार्मिक स्थलों पर ही प्रार्थना कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं.

बेस्ट हिन्दी प्रार्थना फोटो Best Prayers for God in Hindi with Images

हे ईश्

हे ईश् प्रभु परमेश्वर हम सब तुझको शीश नवाते हैं.
आदि अंत हैं तुझमे प्रभुवर! तेरे ही गुण गाते हैं.
जड़ चेतन में तू ही तू हैं,
तू ही दिक् और काल बना.
आत्म रूप बन प्राणी मात्र में,
जीवन , जीवन पाल बना.
तू ही तू बस ओर हैं, मै की भेट चढाते हैं.
अहंभाव को तज सब में हम तेरे दर्शन पाते हैं.
विविध नाम और रूप वेश में,
एक तुम्ही तो हो आधार.
निराकार तुम अवतारों में
बने तुम्ही तो हो साकार.
रचना, पालक, सहारक के रूप विविध बन जाते हैं.
इसी लिए तो विविध रूप में तेरे गुण सब गाते हैं
मात-पिता और बन्धु मित्र तुम,
गुरु तुम्ही हो, तुम्हे प्रणाम
बसों हमारे मन मन्दिर में
बनकर ॐ, राम और श्याम.
सब की सेवा, तेरी सेवा, गीत यही बस गाते हैं
सब में तेरे दर्शन पाकर तुझको शीष नवाते हैं.

devotional songs hindi (मातृभक्ति का आवहान)

आज देश को देश-भक्ति का जन-जन में आधार चाहिए|
जिए देश हित, मरे देश हित जन-मन में संस्कार चाहिए ||
हम भूले हैं गत वैभव को,
जगत गुरु थी भारत माता |
ज्ञान भूमि थी ध्यान भूमि थी,
स्वर्ण भूमि थी जग की त्राता ||
आज उन्ही वीरों की भू को गान्डीय टंकार चाहिए |
जिये देश हित, मरे देश हित, जन-जन को संस्कार चाहिए ||
जाति, प्रान्त, भाषा भेदों के-
भेद बेध रहे हैं हम को |
मातृभूमि के पुत्र एक हम-
भूले खेद नही हैं हमको ||
शबरी, केवट, राम सरीखा आज हमे वह प्यार चाहिए |
जिये देश हित, मरे देश हित जन-जन संस्कार चाहिए ||
‘स्व’ विस्मृत कर जूठन की-
भाषा-भूषा को अपनाया |
भाव, विचार उत्पाद विदेशी-
बे शर्मी से गले लगाया ||
पूर्ण स्वदेशी भाव जगाकर, स्वाभिमान हुंकार चाहिए |
जिये देश हित, मरे देश हित जन-जन में संस्कार चाहिए ||

सफलता का रहस्य (bhakti hindi song )

आओ कथा सुने देवों की, असुरों के अज्ञान की |
त्याग, धैर्य, सहयोग, चतुरता, साम्यक बुद्धि ज्ञान की ||
देव-असूर दोनों भाई थे किन्तु लड़ा करते थे अज्ञानी |
बुद्धिमान देवों से सर्वदा असूर हारते थे अभिमानी ||

जनकराज ने एक बार था दोनों को ही साथ बुलाया |
दोनों भोजन करे साथ में, और परीक्षा हो कहलाया ||
जो हारेगा छोटा होगा, जीतेगा सो बड़ा बनेगा |
समाधान होगा इस विधि से, आपस का यह युद्ध थमेगा ||
देव और राक्षस दोनों ने, आमन्त्रण स्वीकार किया |
पहुच जनकपुर ” कैसे जीते” इस पर गुप्त विचार किया ||
अगले ही दिन भोजन पर प्रतिस्पर्धा की घड़ी आ गईं |
सुस्वादु भोजन तो था पर एक समस्या कड़ी आ गईं ||

देव असूर दोनों का दल जब भोजन करने को आया |
जनकराज ने सादर उनकों आसन पर था बिठलाया ||
राजा बोले, भोजन पाए, शर्त किन्तु यह ध्यान रहे |
उसी शर्त के साथ परीक्षा जुड़ी हुई यह ज्ञान रहे ||
दोनों ने स्वीकार किया और बात जनक की थी मानी |
सोचा यही की हम जीतेंगे, हम ग्यानी वो अज्ञानी ||
और जनक के कहने पर फिर सबने अपने हाथ बंधाये |
इस प्रकार की कोहनी से वे हाथ मोड़ ना पावे ||

फिर थाली में सबके सम्मुख ढेर लड्दुओ का आया |
जिन्हें देखकर मुख में पानी भरा कि मन था भरमाया ||
देव मौन और शांत बैठकर लगने सोचने को गंभीर |
किन्तु असूर भूखे व्याकुल थे, खाने को हो गये अधीर ||
कर कर लम्बे हाथ राक्षस लगे लड्डू उठाने थे |
और उन्हें वे ऊपर उछाल कर लड्डू लगे थे वे खाने थे ||
लेकिन गिर ऊपर से लड्डू ऊपर से मुख में ना आ पाते थे |
कोई कोई मुख पर पड़ता बिखर शेष वे जाते थे ||
गिर कर लड्डू मुख पर उनको सबको लगे हसाने थे |
छत की ओर खुले मुख उनको सबको लगे हंसाने थे ||
आखिर थके राक्षस सारे, भूखे रहे बिचारे वे |
किया प्रयत्न अकेलों ने था, इसलिए थे वे हारे ||

उधर देवताओं ने आपस में, आसन बदल लिए थे ||
दो-दो जोड़ो में बैठ, सम्मुख मुख किये थे ||
दो-दो मिलकर एक थाल में लड्डू लगे थे वे खाने थे |
एक दुसरे के मुख पे देकर, भोजन लगे वो पाने थे ||
कुछ ही देर में सबने मिलकर छक कर लड्डू खाए थे |
सहयोग से पेट भरा और विजयी होकर आए थे ||
सुनि कहानी तुमने बोलो, क्या बात समझ में आई |
कहो कौन से गुण के कारण देवों ने जय पाई ||

मातृ-स्वरूप-वन्दन (prayer song in hindi )

हे मातृ भू, जय मातृ भू तेरी सदा ही विजय जय,
नगराज मस्तक मुकुट हिम मंडित शिखर कैलास है |
गंधार, तिब्बत स्कन्ध, सुरभित मलय शीतल स्वास है
इंद्रप्रस्थ हैं ह्रदय औ, कश्मीर कुमकुम भाल हैं |
हिन्दूकुश से श्रग्पुर तक केश-राशि-जाल हैं |
बाल रवि बन उदय-केतु गगत में उड़ता अभय ||

विन्ध्य गिरी करधनी, पुरी और द्वारिका भुजदंड हैं |
सहाद्री और महेंद्र पद, रामेश दीप अखंड हैं |
अनवरत बहता स्तनों से, ब्रहा-सिन्धु दुग्ध जल |
जगत्रियनता ने चढाया चरण में लंका कमल |
योगी शिला पर हिन्दू सागर चरण धोकर करता विनय ||

नासिका ज्वालामुखी से निकलती प्रवास हैं |
चित्राल गिलगित नयन-द्वये में प्रीति की चिर प्यास हैं |
मुख द्वार तक्षशिला से मुखरित साम वैदिक गान हैं |
कर्ण बद्री-हिंगुला, मेवाड़ नाभि-निशान हैं |
श्याम बिंदु कपोल पर, केदार नव्तारुन्यय ||

केश राशि जाल में उलझा हुआ नेपाल हैं |
कामाख्य मणि हैं त्रिपुर में त्रिपुरेश-डमरू-ताल हैं |
ग़ल-हार-यमुना-गंग कर में सोमनाथ त्रिशूल है |
सब तीर्थ द्वीप समूह देवों ने फुल हैं |
कच्छ सिन्धु-गंग सागर वसन के है छोर त्रय ||

कोटि पंचाशत सुमन उतारे तेरी आरती |
ओ देश आर्याव्रत! हिन्दुस्थान ! माता भारती!
जले जीवन दीप्त-दीपक-तेज-पुंज प्रकाशरत |
बढ़ चले, बढ़ते रहे, ले विजय-रथ तेरी शपथ |
जो मिला तुझसे सभी हो अंत में मुझसे विलय ||

समरसता की गंगा (स्कूल प्रार्थना गीत )

आओ हम सब समरसता के मिल के द्वीप जलाए
भेद विभेदों के कांटो में हम एक्य-पुष्प खिलाएं

हम हैं उस संस्क्रति के वाहक जिसमे है समता का ज्ञान
जड़ चेतन सब ब्रह्मा अंश हैं, प्राणिमात्र हैं एक समान
भारत माता के पुत्र सभी हम एक सभी का हैं परिवार
भाई-भाई आपस में हम, ऐसा ही हो हम में प्यार
बैठे आज भूल तक हम सब जाति,प्रान्त, भाषा के भेद
ऊँच नीच और छुआछुत के हैं समाज के छेद अनेक
त्याग भेद और फुट छोड़ हम गीत प्रेम के गाए
एक देश के वासी हम सब एक, यही दोहराए

केवट को हैं हम भूल गये व भूले शबरी के बेर
राम ने तिनको गले लगाने में की नही जरा भी देर
त्याग राज-भोज श्याम ने विदुर के केले खाए
हरिश्चन्द्र तो डोम बने पर हिन् नही कहलाए
मीरा ने रविदास मोची को गुरु बनाया |
यही हमारी परम्परा थी, हमने इसे भुलाया ||
लहरे हैं हम भिन्न-भिन्न पर एक प्रवाह बहाए
गंगा की हम धाराए हैं कल-कल बहते जाए ||

अंतिम बात (prarthana school Students Prayer Songs In Hindi)

बाते बहुत पढ़ी हैं हमने, बात आखिरी कर ले |
पढ़ी हुई बातों की मन में एक मूर्ति जड़ ले ||

देश धर्म और राष्ट्र की बाते हमने जानी |
इन पर मरने मिटने वाले हुए कई बलिदानी ||

आओं हम उसी मार्ग पर अपने कदम बढ़ाएं |
जाति-पांति भेदों से ऊपर गीत एक्य के गाए ||

स्वस्थ रहे सुद्रढ बलशाली, बुद्धिमान मन निर्मळ |
इसी हेतु ही परमेश्वर की करे प्रार्थना निश्छल ||

प्रकृति माँ की पूजा कर हम धरती स्वर्ग बनाएँ |
दीन-दुखी की सेवा में हम ईश्वर दर्शन पाए |

गुण अर्जित कर, गुणशाली बन सच्चे हिन्दू बने हुम |
मातृभूमि को पुन: अखण्डित आ सिन्धु-सिन्धु करे हम ||

मन बुद्धि से संकल्पित जो भी करे प्रतिज्ञा |
प्राण जाय पर डिगे न उससे, उससे रहे मन सुविज्ञा ||

तन-मन-धन व गुण सारे ही ईश्वर को अर्पण |
जीवन में अपनाएं इनको तब ही सत्य-समपर्ण ||

इसीलिए हम सच्चे मन से पुन: बात दोहराये |
जो कुछ पढ़ा सुना, गुना वह जीवन में अपनाए ||

इस हेतु बात आखिरी हमने पुन: विचारी |
बार-बार दोहराकर हम सब बने अधिकारी ||

माटी हमारी पूजा, माटी हमारा चन्दन (प्रार्थना गीत in hindi)

माँ भारती की स्वर्णिम माटी हमें हैं चन्दन |
माटी हमारी पूजा, माटी हमारा वन्दन ||

वे धन्य हैं जो जन्मे इस पावन धरा पर
सुखदायिनी धरा पर वरदायिनी धरा पर
कभी राम इसमे खेले, कभी नंद नन्दन
-माटी हमारी पूजा

मेरी अवध की सरयू, श्रीराम को बुलाती
मथुरा में मातु यमुना, कान्हा के गीत गाती
रुद्राभिषेक करती कांशी में गंगा पावन
-माटी हमारी पूजा

संकट में भारती माँ, गौरूप धारती हैं,
गोपाल की शरण में, जाकर पूकारती हैं,
गोवंश हिट करेगा गोभक्त हर समर्पण
-माटी हमारी पूजा

माँ भारती के सुत हैं, सारे समाज बन्धु
सब वर्ग बिंदु-बिंदु, हिन्दू समाज सिन्धु
एकात्म के बल, समरस यहाँ हैं जीवन
-माटी हमारी पूजा

प्रेयर इन हिंदी फॉर स्कूल

प्रार्थना ऐसी सरल होनी चाहिए जिसका मतलब बच्चों को समझाना न पड़े। प्राथमिक विद्यालयों के बच्चों हेतु ऐसी ही मेरी स्वरचित एक प्रार्थना :
“सरल पुकार” :
ऐ मालिक हम तेरे बच्चे
रहें हमेशा दिल के सच्चे
पूरे मन से पढ़ें लिखें हम
अच्छाई के साथ रहें हम
समय करें न हम बेकार
मेहनत से हो हमको प्यार
आपस में न करें लड़ाई
औरों की भी करें भलाई
नहीं किसी को दुःख पहुंचायें
खुशियाँ ही खुशियाँ बरसायें
हर ऊँचाई को हम छू लें
लेकिन तुमको कभी न भूलें।।
(रचयिता : प्रशांत अग्रवाल, सहायक अध्यापक, प्राथमिक विद्यालय डहिया, विकास क्षेत्र फतेहगंज पश्चिमी, बरेली)

Prayer In Hindi For School Assembly प्राइमरी स्कूल के बच्चों के लिए सुबह की प्रार्थना

Morning Assembly Prayer In Hindi में हम सुबह की प्रार्थना क्लास 1,2,3,4,5,6,7,8,9,10,11,12 वी के स्टूडेंट्स के लिए सरल भाषा में प्रभु को स्मरण करने वाली कुछ प्रार्थनाओं के इमेज आपके साथ साझा कर रहे हैं. जिनकी मदद से आप इसे आसानी से याद कर सकते हैं.

Assembly Prayer

School assembly songs in Hindi

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Scout And Guide Prayer In Hindi

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