Hiroshima Day Story of Massacre And Poem In Hindi | हिरोशिमा दिवस

Hiroshima Day 2017 आज से ठीक 72 वर्ष पहले दुसरे विश्वयुद्ध के दौरान अमेरिका ने 6 अगस्त 1945 के दिन जापान के हिरोशिमा शहर पर लिटिल बॉय नामक एटमी बम से परमाणु हमला किया था. लाखों की आबादी का यह शहर कुछ ही पल बाद एक कब्रिस्तान में बदल गया. जहाँ आज भी विकृत और कैसर पीड़ित बच्चे जन्म लेते हैं. विश्व इतिहास में 6 अगस्त को काले दिवस अर्थात हिरोशिमा त्रासदी दिवस के रूप में हर वर्ष मनाया जाता हैं. अमेरिका द्वारा किये गये इस हिरोशिमा हत्याकांड में करीब डेढ़ लाख से अधिक जीवित लोग मारे गये थे. इस घटना के ठीक तीन दिन बाद अमेरिका ने दूसरा परमाणु हमला नागासाकी शहर पर 9 अगस्त 1945 को किया था, इसमे तक़रीबन एक लाख लोग मारे गये थे. इस नरसंहार के साथ दूसरा विश्व युद्ध थम गया था.

Hiroshima Day In Hindi

हिरोशिमा की कहानी & इतिहास (Hiroshima day information)

6 अगस्त 1945 की सुबह से पूर्व तक हिरोशिमा जापान का एक महत्वपूर्ण शहर था. मुख्य औद्योगिक गतिविधियों का केंद्र होने के कारण यहाँ आस-पास के शहरों के लोगों का आना जाना रहता था. दूसरी तरफ हिरोशिमा शहर जापानी आर्मी की पांचवी डिविजन का मुख्यालय भी था. हिरोशिमा के रास्ते ही सेना की रसद की आपूर्ति हुआ करती थी. सरकारी आकड़ो के अनुसार 1945 में हिरोशिमा शहर की कुल आबादी ढाई लाख और निजी संस्थाओ के आकड़ो के मुताबिक सभी निवासियों, बाहर से आने वाले मजदूरो और सैनिको को मिलाकर हिरोशिमा शहर की आबादी पौने चार लाख थी.

एक लिहाज से यह शहर जापान की आर्थिक और सैन्य राजधानी हुआ करता था. इसी वजह से अमेरिका सहित विरोधी खेमे ने हिरोशिमा को ही अपना निशाना बनाया. दुर्भाग्यवश अमेरिका ने हिरोशिमा परमाणु हमले से पूर्व तक कभी एटमी बम का उपयोग नही किया था. इस वजह से इसकी विनाशक शक्ति का उन्हें भी कोई ठीक-ठाक अंदाजा नही था, कि यह कितना विनाशकारी साबित हो सकता हैं. हालाँकि यदि जापान की सैन्य प्रणाली रडार द्वारा दिए गये संकेतो को बड़ी सावधानी से लेती तो शायद इस लिटिल बॉय के हमले से बचा जा सकता था.

हिरोशिमा हत्याकांड (hiroshima nagasaki bomb blast In Hindi)

अमेरिकी सेना के कमांडर पॉल टिबेट्स ने 6 अगस्त के दिन बी-29 के अलावा दो अन्य वायु विमानों के साथ उड़ान भरी. तीनो विमानों में उस अणु बम की शक्ति उसके प्रभाव को नापने तथा कैमरे के अतिरिक्त अमेरिकी सेना से कनेक्टिविटी के उपकरण इन तीनो विमान में रखे हुए थे. जापान के क्षेत्र में प्रवेश करते समय इन विमानो की ऊचाई 7500 फिट थी. जबकि हिरोशिमा तक आते आते ये 32 हजार फिट की ऊचाई पर उड़ने लगे थे.

लगभग जापानी समय के अनुसार सुबह 8 बजे का वक्त था. जापान के रडार ने इन विमानों की चेतावनी जारी कर दी. मगर सैन्य अधिकारियों ने इन्हे जासूसी विमान की आशंका में इसे गंभीरता से नही लिया. दूसरी तरफ मात्र तीन विमान होने के कारण अपना ईधन और उर्जा बचाने के लिए उन पर आक्रमण नही किया. किसी को यह अंदाजा नही था. कि ये तीनो विमान लिटिल बॉय एटम बम से 15 मिनट बाद हिरोशिमा को तबाह कर देगे.

हिरोशिमा पर परमाणु बम के बाद  (6 august 1945 aftermath of hiroshima)

सुबह 8 बजकर 15 पर अमेरिका द्वारा हिरोशिमा पर किये गये इस हवाई हमले में डाले गये बम का नाम लिटिल बॉय था. जो 60 किलोग्राम युरेनियम के अतिरिक्त कुल वजन 4 हजार किलोग्राम था. इसे 32 हजार फिट की ऊचाई से शहर पर गिरने में मात्र 57 सेकंड्स का वक्त लगा. इसका धमाका और इतने खतरनाक विकरण पैदा हुए कि तुरंत उसी मिनट कुल आबादी के 30 फीसदी लोगों ने उसी वक्त दम तोड़ दिया. जबकि इसके प्रभाव से कई वर्षो तक लोग लोग मरते रहे.

हिरोशिमा के इस परमाणु हमले की त्रासदी का अनुमान इस बात से लगा सकते हैं 2 किमी की दुरी तक भूमि पूरी तरह ध्वस्त होने के साथ ही 12 किमी की दुरी तक आग फ़ैल गईं, जो जलकर पूरी तरह राख हो गया. इस हमले से हिरोशिमा की अधिकतर बिल्डिग धराशयी हो गयी.इस हमले में 20 हजार जापानी सैनिक, तक़रीबन डेढ़ लाख आम नागरिक और 20 अमेरिकी युद्ध बंदी मारे गये थे. अमेरिका के वैज्ञानिको के मुताबिक हिरोशिमा पर गिराए गये इस लिटिल बॉय का लक्ष्य आइयो ब्रिज था. मगर हवा के उलटे प्रभाव के कारण यह शीमा सर्जीकल क्लिनीक पर गिर गया. यदि यह अपने लक्ष्य पर गिरने में कामयाब होता तो इससे कही अधिक खतरनाक साबित हो सकता था.

हिरोशिमा में अमेरिका द्वारा किये गये इस परमाणु हमले में अधिकतर डोक्टर मारे गये. जिस कारण समय पर लोगों का इलाज ना होने के कारण मौत का आकड़ा निरंतर बढ़ता गया.

आज का हिरोशिमा शहर (hiroshima today)

6 और 9 अगस्त के विध्वस हत्याकांड के बाद अमेरिका जापान पर तीसरा परमाणु हमला 18 अगस्त को करने की तैयारी कर रहा हैं. सोवियत संघ भी जापान के विरुद्ध मौर्चा खोलने जा रहा था. पहले से इतनी बड़ी जन-माल की हानि को भुगत चूका जापान किसी भी हालत में एक और परमाणु हमले को सहने की स्थति में नही था. इसी को ध्यान में रखते हुए. जापानी सेना ने दुसरे विश्व युद्ध में 14 अगस्त के दिन सरेंडर कर दिया था.

जापान के हिरोशिमा शहर पर 72 वर्ष पहले हुए खतरनाक हमले का आज भी असर दिखाई देता हैं. बड़ी संख्या में यहाँ विकलांग बच्चे जन्म लेते हैं. इतने वर्षो के बाद भी उन जहरीले विकिरणों के कारण हजारो लोग कैंसर और ल्यूकेमिया जैसी बीमारियों से अपना जान गवाते हैं. इस हमले के चार साल बाद जापान की संसद ड्युमो ने 1949 में हिरोशिमा को शांति का शहर का दर्जा दिया था. नवीनतम आकड़ो के मुताबिक हिरोशिमा की कुल जनसंख्या 12 लाख हैं, जो सत्तर वर्ष पूर्व तक चार लाख थी.

विनाश के इस द्रश्य के बाद हिरोशिमा आज एक अच्छा पर्यटन स्थल हैं प्रतिवर्ष 4 लाख विदेशी आगन्तुक इस शहर को देखने आते हैं. जिनमे अधिकतर चाइनीज और ऑस्ट्रेलियन होते हैं. Utsukushima यहाँ का एक दर्शनीय टापू हैं, जिनमे कई धर्मिक स्थल हैं. हिरोशिमा शहर में ये पर्यटन स्थल हैं. हिरोशिमा शांति मेमोरियल संग्रहालय, परमाणु बम डोम, हिरोशिमा शांति मेमोरियल पार्क, मज़्दा ज़ूम-ज़ूम स्टेडियम हिरोशिमा, हिरोशिमा कैसल, Shukkei-en, मिताकी-डेरा मंदिर, हिरोशिमा गोगोकू तीर्थ,कामियाचो और हैचबोरी, सेनको जी मंदिर

हिरोशिमा कविता (Hiroshima Day poem)

सोचां थां हिरोशिमा दिवस पै
शांति के फरीश्ते आएगे
न-मालुम सरहद पर मासूम मारे जाएगे
एक ही मा के दो हिससे
फिर क्यु हिसा के क़िस्से
बेवजह दोहराये जाएगे
दर्द के बादल आएग़े
अ-शांती बरसाएगे

-रजनी विजय सिंगला

हिरोशिमा कविता (poem heroshima)

ऊस दिनं दुनीया मे मोसम आदम-खोर हुआ
जीस दिनं हिरोशिमा मे परमाणु विस्फोट हुआ:
सुरज सबसे पहले किरने जिस धरति को देता-है
बुद्ध की उस नगरीं मे भीषण नरसंहार हुआ ।।”

6 अगस्त को अमरीका अपनीं ओकात दिका बैठा.
बै-कसुरो पै हमला कर अपनीं ज़ात दीखा बैठा
.7 ग्राम यूरे-नियम काये परीणाम हुआ देखों
पल-भर मे ही लांखो लोगो का नरसहार हुआ ।।”

अमरीका ने न सोचा-समजा इस परिणाम को
अधिकारों के इस अधेपन ने मानवता को झक-झोर दिया
हिरोशिमा अनगिनत बलिदानों की धरा है
ये दुसरे विश्व युद्ध के परिणामों की अभिवयक्ति है

-ओम सिंह चारण

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