संत चोखामेला का इतिहास | History & Biography Of Sant Chokhamela In Hindi

संत चोखामेला का इतिहास | History & Biography Of Sant Chokhamela In Hindi

Sant Chokhamela In Hindi: महाराष्ट्र में जिन संतों ने जाति पाति का भेदभाव मिटाकर भगवान की भक्ति की, उनमें संत चोखामेला का नाम बड़े आदर से लिया जाता हैं. उन्हें विठ्ठल कृपा प्राप्त थी. संत ज्ञानेश्वर की संत मंडली में चोखामेला का बड़ा आदर था. वे महार जाति के थे. जो उस समय अस्पर्श मानी जाती थी.संत चोखामेला का इतिहास | History & Biography Of Sant Chokhamela In Hindi

चोखामेला के मन में बचपन से ही ईश्वर भक्ति और संतों जैसा जीवन जीने की इच्छा थी. विट्ठल दर्शनों के लिए वे प्रायः पंढरपुर जाते रहते थे. उन दिनों पंढरपुर में संत नामदेव जी का बड़ा प्रभाव था. वे विट्ठल मंदिर में भजन गाया करते थे. नामदेव के अभंग (भजन) सुनकर चोखामेला इतने प्रभावित हुए कि उन्हें अपना गुरु मानने लगे.

उनकें पूरे परिवार ने संत नामदेव जी से दीक्षा ली थी. उनकें अभंगों की संख्या 300 बताई जाती हैं. उनकी पत्नी सोयराबाई भी भक्त थी. सोयराबाई के एक अभंग का अर्थ हैं – हे प्रभु !तेरे दर्शन करने से मेरे ह्रदय की सब वासनाएं नष्ट हो गई हैं.

सामाजिक परिवर्तन के आंदोलन में चोखामेला पहले संत थे. जिन्होंने भक्ति काव्य के दौर में सामाजिक गैर बराबरी को समाज के सामने रखा. अपनी रचनाओं में वे वंचित समाज के लिए खासे चिंतित दिखाई पड़ते हैं. इन्हें भारत के वंचित वर्ग का पहला कवि कहा कहा जाता हैं. उनके उपदेशों को सभी लोग बड़े प्रेम से सुनते थे.

चोखामेला जी के समय उनके दादाओं को उच्च हिन्दू वर्ग के लोगों के मरे हुए जानवरों को बिना मजदूरी के ढोना पड़ता था. इन्हें रहने के लिए गाँव के बाहर ही घर बनाना पड़ता था, तथा उस गाँव के निवासियों के जूठन के सहारे ही अपना पेट पालना पड़ता था.

प्राचीन हिन्दू वर्ण प्रणाली में चार वर्ग थे. क्षत्रिय, वैश्य, क्षुद्र तथा ब्राह्मण. मगर म्हार जाति के लोगों को इनमें से किसी वर्ग में न रखकर वर्ण व्यवस्था से बाहर रखा गया था. इन्हें शिक्षा का कोई अधिकार नही था. यहाँ तक कि गाँव के सार्वजनिक कुँए पर इन्हें पानी भरने की इजाजत भी नही थी.

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