भारतीय रुपया का इतिहास | history of rupees in hindi

भारतीय रुपया का इतिहास | history of rupees in Hindi

भारत के इतिहास के अनुसार पहली बार भारत में रूपयें/रुपया शब्द का प्रयोग अफगान आक्रान्ता शेरशाह सूरी ने सोहलवी सदी में किया था| भारत में सबसे पहला वाटर मार्क वाला नोट 1850 के बाद छपा था| भारत में नोट छपाई और प्रबंध भारतीय रिजर्व बैंक आरबीआई करती हैं भारत के अतिरिक्त 8 एशियाई देशों में रुपया ही उनकीं मुद्रा हैं| रुपया मुद्रा वाले देश ये हैं, भारत,सेसेल्स,पाकिस्तान, नेपाल, श्रीलंका, मारीशस, मालद्वीप और इंडोनेशिया|rupee history

history of rupees in hindi

भारत में नोट कहाँ छपते है इसकी जानकारी आपकों यहाँ बताते हैं| भारत में चार टकसाल और एक पेपर कारखाना हैं, जहां कागज के नोट छपते हैं और सिक्कों को ढाला जाता हैं देवास, मैसूर, सालबोनी और नासिक में नोट छापने के प्रेस हैं|
भारत में सबसे अधिक नोट देवास (मध्य प्रदेश) के मुद्राखाने में छपते हैं| यहाँ 10 रूपयें के नोट से लेकर 2000 के नए नोट तक छापें जातें हैं| नोट छापने के लिए स्याही और पेपर दूसरें देशो से आयात की जाती हैं, जबकि देवास पेपर कारखाने में स्याही का उत्पादन भी किया जाता हैं|

नोट नष्ट कैसे किए जाते हैं – आपकों यह जानकार ताज्जुब होगा, हर वर्ष भारत में 6 मिलियन पुरानें नोट नष्ट कियें जातें हैं कभी कभार अधिक मात्रा में नोट बाजार में उपलब्ध हो जाने के कारण भी ऐसा निर्णय लेना पड़ता हैं| नोट नष्ट करने से सरकार को बड़ा सरकारी खजाना लुटाना पड़ता हैं, क्युकि नोट बनाने के लिए स्याही और कागज बाहर से मगवाने पड़ते हैं |

history of rupees से जुड़े अन्य लेख

Leave a Reply