ईमानदारी सर्वश्रेष्ठ नीति है महत्व पर निबंध | Honesty Is The Best Policy Essay In Hindi

Honesty Is The Best Policy Essay In Hindi: क्या आप मानते है कि ईमानदारी सर्वश्रेष्ठ नीति है? हमारे जीवन में ईमानदारी का महत्व क्या है आनेस्टी पर निबंध कहानी जाने. a short story on honesty speech on honesty में हम जानेगे कि आखिर ईमानदारी का क्या महत्व हैं, बच्चों के लिए यहाँ छोटा बड़ा निबंध Honesty Essay दिया जा रहा है.

ईमानदारी सर्वश्रेष्ठ नीति है महत्व पर निबंध Honesty Is The Best Policy Essay In Hindi

ईमानदारी सर्वश्रेष्ठ नीति है निबंध Honesty Is The Best Policy Essay In Hindi

जहाँ देखों वहां आज बेईमानी की दुकाने धडल्ले से चल रही है बेईमानी के इस साम्राज्य में हर व्यक्ति से अपेक्षा करना कि वह ईमानदारी से काम करेगा, सच्चाई से परे लगता हैं. भारत जैसे देश में मूल्यों तथा आदर्शों को अहम स्थान दिया जाता हैं. हमारे देश के लोगो में ईमानदारी एवं सत्य के भाव दिखना परिहार्य  हैं.  जीवन में तरक्की की बुनियाद यदि  ईमान पर  टिकी  हो  तो निश्चय ही वह ईमारत न सिर्फ मजबूत भी होगी, बल्कि दूर से भी दिखेगी.

ईमानदारी हर व्यक्ति के जीवन होनी चाहिए, बेईमानी करना आसान है इसके तत्कालिक फायदे तो सुखद होते है मगर भविष्य अंधकारमय होता हैं क्योंकि हमारे यहाँ एक कहावत है पाप का धन पाप में ही जाता हैं. एक ईमानदार व्यक्ति अन्य लोगों की तरह धन भी कमाता और इज्जत भी. समाज में उसके प्रति सम्मान का भाव होता हैं.

जबकि मतलबी और बेईमान इंसान को वे ही पूछेगे जिनसे उसका हित सधता हैं. बेईमानी की राह पर चलकर बहुत कुछ कमा लिया जाता हैं. मगर जीवन की सबसे बड़ी पूंजी यानी विश्वास कभी अर्जित नहीं किया जा सकता हैं. जीवन का कोई भी क्षेत्र ही ईमानदार इंसान का डंका हर जगह बजता हैं. व्यापार जैसे क्षेत्र में विश्वास के आधार पर ही समझौते होते हैं. हर व्यक्ति चाहता है कि उसका पार्टनर ईमानदार हो, इसके लिए चाहिए कि हम स्वयं इमानदार बने तथा एक नयें वातावरण को बनाए. जिसमें सच्चाई की ऊर्जा हो तथा विश्वास की बुनियाद हो.

आपसी रिश्तों में भी ईमानदारी की बहुत आवश्यकता होती हैं. कई बार रिश्तों में दरार की वजह विश्वास की कमी या बेईमानी के कारण होते हैं. इसलिए प्रत्येक रिश्ते चाहे वह पति पत्नी का हो या दोस्ती का हो वह ईमानदारी के साथ निभाने का प्रयत्न करना चाहिए. जो व्यक्ति अपने कर्मों में ईमानदारी को महत्व देता हैं वह निश्चय ही बहुत आगे तक जाता हैं.

ईमानदारी सर्वश्रेष्ठ नीति है कहानी (honesty is the best policy story)

नीलू को काम से निकाल दिया गया, वह नयें रोजगार की तलाश में इधर उधर घूम रहा था. तभी राह चलते उसे एक आवाज सुनाई दी, ओ भाई साहब, कोई है जो मेरा काम करेगा मैं उसे मजदूरी भी दूंगा. जब नीलू ने पलटकर देखा तो एक अधेड़ वृद्ध खड़ा दिखाई दिया उसके पास तीन बड़ी गठरी थी.

नीलू तो काम की तलाश में ही था उसने फटाक से हामी भर दी.  उस  वृद्ध  ने कहा  बेटा ये तीसरी गठरी थोड़ी भारी है  इसे  मेरी मंजिल तक पहुंचा दो मैं आपकों ५ रूपयें मजदूरी के दूंगा.  नीलू ने कहा ठीक है  कोई नहीं मैं  आपकी मदद ही कर देता  हूँ.  यह कहते हुए वह तीसरी गठरी को अपने सिर पर रखकर चलने लगा. कुछ ही दूर गये तो उससे रहा नहीं गया और पूछा बाबा इसमें क्या है बहुत भारी हैं.

उस वृद्ध ने धीमी आवाज में कहा- इसमें एक एक के रूपये भरे हैं. चलते चलते नीलू ने पाया कि वह वृद्ध व्यक्ति उसकों बराबर देख रहा हैं. उसके मन में ख्याल आया कि यह बुढा सोच रहा हैं कि यह कही गठरी लेकर भाग न जाए. नहीं नहीं, मैं लालची और बेईमान नहीं हूँ. चंद सिक्कों के लिए मैं ऐसा कार्य कभी नहीं कर सकता.

अभी थोड़ा और चले कि जंगल के बीच एक नदी आई, नीलू ने देखा कि वृद्ध आदमी बेहद असहाय लग रहा हैं. उससे दो गठरी उठाएं नदी पार नहीं हो पाएगी. वह बोला – बाबा आप काफी थक गये है यदि आप चाहों तो एक गठरी और मेरे सिर पर रख दो, आप आराम से चल पाओगे.

वृद्ध बोला- ठीक है बेटा, मगर यह गाठ लेकर तुम भाग न जाना इसमें सारे सिक्के चांदी के हैं. नीलू को थोडा क्रोध आया और वह नाराज होते हुए बोला- क्या मैं आपकों चोर या बेईमान लगता हूँ. पैसे के लालच में आकर मैं किसी को धोखा नहीं दे सकता. इस तरह नीलू ने लालच पर काबू पाते हुए नदी पार कर ली. आगे बढ़ने पर तेज चढ़ान वाली पहाड़ी आई.

उस वृद्ध ने कराहते हुए स्वर में कहा – बेटे गठरी बहुत भारी है और ऊपर से इस खतरनाक चढ़ाई में मैं चढ़ नहीं पा रहा हूँ. तब नीलू ने कहा- कोई बात नहीं बाबा यह गठरी भी मुझे दे दीजिए मैं आसानी से उठा सकता हूँ. तब वृद्ध बोला, बेटा इसमें सोने के सिक्के हैं यह मैं आपकों कैसे दे सकता हूँ. यदि तुम भाग गये तो मेरे पैरों में इतनी ताकत नहीं है कि मैं आपका पीछा कर सकू.

नीलू फिर से क्रोधित होकर बोला- बाबा, जैसा आप समझ रहे हैं मै वैसी किस्म का व्यक्ति नहीं हूँ. मैं अपने ईमानदारी के व्रत के कारण ही आज मजदूरी करता हूँ. वरना मैं एक सेठ के यहाँ मुनीम हुआ करता था. सेठ मुझ पर दवाब डालकर हिसाब में हेरा फेरी करने के लिए दवाब डालता था. मैंने मना किया तो मुझे नौकरी से निकाल दिया. तब वृद्ध बोला तो ठीक है यह गठरी भी आप लो और मैं पहाड़ी चढ़ने की कोशिश करता हूँ.

नीलू अब गठरी लेकर आगे आगे चल रहा था, कि उसे दिमाग में विचार आया कि यदि मैं इन तीनों गठरी को लेकर भाग निकलू तो यह वृद्द मेरा पीछा भी न कर सकेगा. मैं रातोरात अमीर बन जाउगा. मेरी पत्नी खुश हो जाएगी. बस एक बार बेईमानी के बाद कभी दुबारा नहीं करुगा. उसके इस लालच ने मन पर काबू पा लिया और वह गठरी लेकर भाग निकला.

जब नीलू घर पंहुचा तो उसने तीनों गठरी खोली तो सिर पिटता रहा गया. क्योंकि उसमे सिक्के के आकार के मिट्टी के ढेले थे. उसे समझ नहीं आ रहा था कि उस वृद्ध ने यह चाल क्यों चली? तभी उसे गठरी में एक चिट्ठी मिली. उसमें लिखा था कि यह चाल राजकीय धन की रक्षा के लिए की गई. वह वृद्ध व्यक्ति कोई और नहीं बल्कि स्वयं राजा थे. यदि तुम बेईमानी नहीं करते तो तुम्हे मंत्री पद और सब कुछ मिलता, खैर नीलू को भी ईमानदारी की कीमत समझ आ गयी.

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