पुरुषार्थ का महत्व | importance of purusharthas in hindi

पुरुषार्थ का महत्व importance of purusharthas in hindi: नमस्कार दोस्तों आपका हार्दिक स्वागत हैं आज हम पुरुषार्थ के जीवन में महत्व को जानेगे. चार प्रकार के पुरुषार्थ धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष का क्या महत्व हैं. इसकी विवेचना इस लेख में प्रस्तुत कर रहे हैं.

पुरुषार्थ का महत्व | importance of purusharthas in hindi

पुरुषार्थ का महत्व importance of purusharthas in hindi

हिन्दू दर्शन के चार पुरुषार्थ धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष आदर्श जीवन स्थिति के प्रतीक हैं. जीवन की इस व्यवस्था के अंतर्गत मानव जीवन के अधिकारों और उत्तरदायित्वों का महत्वपूर्ण समन्वय किया गया हैं. इस समन्वय द्वारा ही जीवन की श्रेष्ठ आदर्श स्थिति को प्राप्त किया जा सकता हैं.

मनुष्य के व्यक्तित्व का उत्कर्ष पुरुषार्थ से ही सम्भव रहा हैं. उसके जीवन के विभिन्न भागों में पुरुषार्थ का ही योगदान रहा तथा उसके संयोग से व्यक्ति आदर्श बनता रहा. मनुष्य अपने कर्मों और कर्तव्यों का सम्पादन पुरुषार्थ के संयोग से करता है तथा इसी के माध्यम से अपने विविध उत्तरदायित्वों को निष्ठापूर्वक कर सकने में समर्थ होता हैं.

मनुष्य का सामाजिक, धार्मिक, आध्यात्मिक, आर्थिक पुरुषार्थ से ही होता हैं. इसके अंतर्गत व्यक्ति का सर्वांगीण विकास होता हैं. भारतीय विचारकों का यह जीवन दर्शन विश्व का अकेला और अनुपम जीवन दर्शन है जिसमें जीवन के प्रति मोह है तो योग भी हैं बंधन है मुक्ति भी, कामना है साधना भी है, आसक्ति है तो त्याग भी है.

निश्चय ही पुरुषार्थ ही योजना व्यक्ति के जीवन को व्यवस्थित और संतुलित आधार पर विकसित करने के लिए की गई थी. पुरुषार्थ अपनी संतुलित व्यवस्था में आदर्श व्यक्तित्व का जीवन का प्रतीक है. पुरुषार्थ से मानव जीवन का संतुलित तथा सर्वांगीण विकास होता है. आश्रमों की कल्पना भी पुरुषार्थ के सिद्धांत पर आधारित हैं.

संक्षेप में पुरुषार्थ के महत्व को निम्न बिन्दुओं के अंतर्गत स्पष्ट किया जा सकता हैं.

  • आदर्श व्यक्तित्व या जीवन के प्रतीक– धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष पुरुषार्थ आदर्श व्यक्तित्व या जीवन का प्रतीक हैं.
  • मानव जीवन के संतुलित या सर्वांगीण विकास में सहायक– मानव जीवन के संतुलित तथा सर्वांगीण विकास में पुरुषार्थ सहायक हैं.
  • धार्मिक और सामाजिक कर्तव्यों के लिए प्रेरित करना– पुरुषार्थ इस बात के लिए बाध्य करते हैं कि मनुष्य को धार्मिक और सामाजिक कर्तव्यों को अर्थ और काम के साथ पूरा करना चाहिए.
  • पुरुषार्थों पर ही आश्रमों की कल्पना का आधारित होना– आश्रमों की कल्पना भी इसी सिद्धांत पर आधारित हैं.
  • अर्थ और काम का डटकर मुकाबला करने की प्रेरणा देना– पुरुषार्थ व्यक्ति को अर्थ और काम का डटकर मुकाबला करने, कर्तव्यों का पालन करने तथा जीवन के उच्चतम आदर्शों को प्राप्त करने के लिए संदेश देते हैं.
  • विभिन्न कर्मों और कर्तव्यों का सम्पादन करने में सक्षम बनाना– मनुष्य अपने विभिन्न कर्मों और कर्तव्यों का सम्पादन पुरुषार्थ के ही संयोग से करता है तथा इसी के माध्यम से अपने विविध उत्तरदायित्वों को निष्ठापूर्वक कर सकने में समर्थ होता हैं.
  • मानसिक संतोषकारी- डॉ प्रभु के अनुसार पुरुषार्थ मानसिक संतोष प्रदान करता हैं. व्यक्ति धर्म, अर्थ काम की पूर्ति के द्वारा मानसिक संतुष्टि प्राप्त कर मोक्ष प्राप्ति की ओर बढ़ता रहता हैं.

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आशा करता हूँ दोस्तों importance of purusharthas in hindi का यह लेख आपकों पसंद आया होगा. यदि पुरुषार्थ के क्या प्रकार है इस पर दी गई जानकारी पसंद आई हो तो अपने दोस्तों के साथ जरुर शेयर करे.

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