Independence Day Speech For Students In Hindi – विद्यार्थियों के लिए स्वतंत्रता दिवस भाषण

विद्यार्थियों के लिए स्वतंत्रता दिवस भाषण Independence Day Speech For Students In Hindi Language 2019 On 15 August Students Kids Children Of Primary And Upper Primary School. Class 1,2,3,4,5,6, 7,8,9,10 के बच्चों के लिए हम स्वतंत्रता दिवस भाषण 2019 यहाँ बता रहे हैं. 73 वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर हम भारत वासीयों को हार्दिक शुभकामनाएं देते हैं. इस दिन स्कूल कॉलेज में आयोजित इंडिपेंडेंस डे शोर्ट लॉन्ग स्पीच बोलने के  लिए कहा जाता हैं ऐसे में आप इस लेख की मदद से अच्छा भाषण तैयार कर सकते हैं.

Independence Day Speech For Students In Hindi – विद्यार्थियों के लिए स्वतंत्रता दिवस भाषण

Independence Day Speech For Students In Hindi - विद्यार्थियों के लिए स्वतंत्रता दिवस भाषण

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Independence Day Speech For Students In Hindi स्वतंत्रता दिवस Par Bhashan

सुप्रभातम्, आप सभी को मेरा नमस्ते. मंच पर विराजमान मुख्य अतिथि महोदय प्रधानाचार्य महोदय समस्त विद्वान् गुरुजनों एव मेरे साथ पढ़ने वाले भाइयों और बहिनों. आज पन्द्रह अगस्त है, भारत को इस दिन आजादी प्राप्त हुई थी.  इस कारण  हम इस दिन को स्वतंत्रता दिवस के रूप में हर साल मनाते हैं. 15 अगस्त के दिन देशभर में राजकीय अवकाश होता हैं तथा समस्त जगहों पर तिरंगा फहराकर देशभक्ति के कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता हैं.

हमारे विद्यालय की भांति ही देश के सभी सरकारी एवं निजी विद्यालयों महाविद्यालयों में स्वतंत्रता दिवस के दिन शान से तिरंगा फहराते हैं और शहीदों को याद किया जाता हैं. इस अवसर पर स्कूल के नन्हें मुन्हे बच्चे व्यायाम परेड, निबंध, भाषण देशभक्ति कविताएँ शायरी आदि प्रस्तुत किये जाते हैं. मैं कक्षा 8 का विद्यार्थी स्वतंत्रता दिवस भाषण के माध्यम से अपने विचार प्रकट करने जा रहा हूँ.

विद्यार्थियों के लिए स्वतंत्रता दिवस भाषण

Short Independence Day Speech in Hindi For School Students

हम हर साल 15 अगस्त के दिन को स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाते आ रहे हैं, क्या कभी हमनें पीछे झांककर यह जानने का प्रयास किया, कि इसे हम क्यों मनाते हैं. इस दिन ऐसा क्या खास हुआ था जिस साल दर साल याद किया जाता हैं. भारत की उत्सव परम्परा के नयें विषय के रूप में 15 अगस्त को भी सम्मिलित कर लिया गया.

भारत में ग्यारहवीं सदी तक देशी राजाओं का शासन था, हमने इतिहास में जाना हैं कि पृथ्वीराज चौहान दिल्ली के अंतिम हिन्दू सम्राट थे. तराइन के दूसरे युद्ध में चौहान की हार और गौरी की जीत से भारत में विदेश शासन की शुरुआत हो गई थी. आप सोच रहे होंगे, इन प्रसंगों का हमारे स्वतंत्रता दिवस से क्या वास्ता.

मैं आपका ध्यान उन तथ्यों की तरफ ले जाना चाहता हूँ जो हमें साल दर साल गलत बताएं जाते रहे हैं. कि भारत को 200 वर्षों की गुलामी के बाद 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता मिली थी. यह सरासर झूठी एवं बेबुनियाद बात हैं. भारत की गुलामी का दौर तो 1192 से ही आरंभ हो गया था.

गौरी, खिलजी, ऐबक, तुर्क, मुगल, पुर्तगाली अंग्रेज सैकड़ों जातियों ने भारत पर शासन किया. ये भारतीय जनता व देशी शासकों के लिए गुलामी का दौर नहीं था तो क्या था. 17 वीं शताब्दी में जहांगीर के समय अंग्रेज भारत में आए और व्यापार को माध्यम बनाकर उन्होंने भारत की सत्ता को हथिया ली.

ये घटनाएं बस नहीं हैं, ये हमारा अतीत है और हमारे स्वर्णिम भविष्य के लिए हम अपने इतिहास की भूलों व साजिशों को भली भांति जाने तभी हमारे सपनों के एक भारत का निर्माण हो सकेगा. जब अंग्रेजों ने भारत में कदम रखा तो दिल्ली की सत्ता पर मुगल थे. दक्षिण पश्चिम भारत में छोटे छोटे देशी राज्य थे.

अंग्रेजों के लिए भारतीय राजाओं से युद्ध कर सत्ता पाना असम्भव था, अतः उन्होंने फूट डालनी शुरू की तथा राजाओं को आपस में लडवाकर उन्हें कमजोर कर स्वयं सत्ता के स्वामी बन बैठे थे. मुगल और अंग्रेज दोनों विदेशी थे.  मगर दोनों  के मध्य एक मूलभूत अंतर यह था कि अंग्रेजों का उद्देश्य भारत में सत्ता स्थापित करना नहीं था. बल्कि भारत की सम्पति को लूटकर ब्रिटेन भेजना चाहते थे, जो उन्होंने अपने पहले दिन से शुरू कर दिया था.

एक सौ नब्बे वर्ष के अंग्रेजी साल ने भारत की दुर्दशा यह कर दी कि 20 वीं सदी आते आते सोने की चिड़िया कहलाने वाले भारत वर्ष के लोग अब भूख से मरने लगे. अनाज उपजाने वाले किसान कर्जदार होकर आत्महत्याएं करने को मजबूर हो गये. नौकरी के नाम पर भारतीयों के लिए कुछ नहीं था.

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मैं उन अमर शहीद क्रांतिकारियों को झुककर नमस्कार करता हूँ, जिसकी वजह से 10 हजार प्राचीन भारतदेश अपने अस्तित्व को बचा पाया. सर यदि अंग्रेज भारत में पचास साल और ठहर जाते तो इस देश का नामो निशाँ मिट जाता. वैसे भी हम अपनी संस्कृति, इतिहास, परम्पराओं एवं प्राचीन साहित्य को काफी हद तक गंवा सकते हैं.

महोदय, मैं क्षमा चाहता हूँ एक स्टूडेंट्स होने के नाते मुझे इस तरह की बात नहीं करनी चाहिए, मगर मेरे दिल में यह बात हर बार दुखती हैं. हम कहते हैं हमारा देश 15 अगस्त 1947 के दिन ब्रिटिश राज से पूर्ण रूप से स्वतंत्र हो गया था. तो आज उन अंग्रेजों की विरासत को हम क्यों सम्भाल रहे हैं.

सही मायनों में विरासत अपने पूर्वजों की देन होती हैं, इसलिए मैं उसे गुलामी का कंलक ही कहूँगा जिसे हम अपने सिर पर बोझे की तरह ढोए जा रहे हैं. भला हमारे देश का अंग्रेजी से क्या लेना देना, मैं भाषाई ज्ञान का शत्रु नहीं हूँ, हाँ यदि किसी को अधिक से अधिक भाषाओं का ज्ञान हो तो अच्छी बात हैं मगर यह बात अन्य भारतीय भाषाओं या फ्रेंस, रसियन के साथ क्यों नही.

आजादी के सात दशक बाद भी क्या मेरा देश अपनी भाषा से नहीं चल सकता, क्या हम इतनी गहरी मानसिक गुलामी में चले गये हैं कि हमारा अंग्रेजी के बिना कोई काम नहीं चलता. भारत के न्यायालय देख लो, उच्च शिक्षा का क्षेत्र देख लो,  संसद  की चर्चा देख लीजिए. कई बार ये लगता हैं कि ये लोग हमारा नहीं किसी और देश के प्रतिनिधि हैं. न्यायपालिका ऐसा लगती हैं कि वह ब्रिटेन जैसे देशों से हमारे देश को खैरात में दी गई हैं हम बस 70 सालों से उसे परम्परा के रूप में आगे बढ़ा रहे हैं.

मैं यह भी मानता हूँ कि यदि हिंदी भारत की राष्ट्रभाषा नहीं हो सकती तो यह भारत के लोगों का निर्णय ही समझूंगा. मगर कोई भी भारतीय भाषा गुजराती, पंजाबी, तमिल, तेलगू, मलयालम, मराठी, बंगाली, भोजपुरी, उड़िया हमारी 150 से अधिक भाषाओँ में क्या कोई ऐसी भाषा नहीं जो इस कलंक को मिटा सके.

मुझे यह कहने में कोई झिझक नहीं हैं कि मेरे देश में आज भी बड़ी तादाद में अंग्रेजों की औलादे हैं जिन्हें वे अपने साथ ले जाना भूल गये थे. कोई भी इसको नकार नहीं सकता, क्योंकि सर लोकसभा और राज्यसभा में आज भी अंग्रेजों की संतानों के प्रति निधित्व के लिए एंग्लो इंडियन सदस्यों का मनोनयन जारी हैं.

2019 Speech On Independence Day For Students In Hindi

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प्यारे दोस्तों आजादी के पर्व के मौके पर आज हम जश्न मना रहे हैं. इस दिन को पाने के लिए भारत ने बड़ा मूल्य चुकाया हैं, ऐसा नहीं था कि अंग्रेजों को ऐसा लगा कि हमने बहुत शासन कर लिया अब भारत को रातो रात आजादी दे दी गई.

भारत को स्वतंत्रता मिली नहीं बल्कि यह अंग्रेजों से छिनकर ली गई थी. देश के क्रांतिकारी नवयुवकों के कारनामों ने उनको यह एहसास करा दिया कि अब जान बचानी हैं तो भारत छोड़ना होगा. तब जाकर भारत 15 अगस्त के दिन स्वतंत्र हुआ था.

आज ही के दिन भारत के लोगों ने आजादी के सूरज की पहली किरणों को देखा था. पहले स्वतंत्रता पर्व पर देश के प्रथम प्रधान मंत्री जवाहरलाल नेहरु ने लाल किले की प्राचीर से तिरंगा फहराया था. इसी परम्परा के चलते 15 अगस्त के दिन भारत के माननीय प्रधानमंत्री राष्ट्रीय ध्वज को लाल किले से फहराते हैं.

आज की सच्चाई यह हैं कि हमारे लिए स्वतंत्रता या आजादी एक शब्द मात्र हैं जिसे कभी हम लिबर्टी, इंडिपेंडेंस या फ्रीडम के रूप में परिभाषित करते हैं. आज से 70 साल पहले हमारे पूर्वजों के लिए आजादी का मतलब था एक सुनहरा सपना, जिसमें वे अपने तरीके से काम कर सकेगे, जो चाहे वो कर सकेगे. अपने देश व समाज के निर्णय व विकास में उनकी भागीदारी होगी.

यह वजह थी कि स्वराज के लिए 1857 से 1947 तक 90 वर्षों की इस लड़ाई में भारत के लाखों वीर सेनानियों ने अपने जीवन को राष्ट्र के लिए अर्पित कर दिया था. आजाद, भगतसिंह, सुभाष बोस, रानी लक्ष्मी बाई जैसे शूरमाओं ने जिस भारत का सपना देखा था, क्या आज हम उनके बलिदान को सार्थक कर पाए हैं, यह हमारे लिए चिंतनीय विषय हैं.

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