शिक्षकों के लिए स्वतंत्रता दिवस भाषण | Independence Day Speech For Teachers

Independence Day Speech For Teachers:जैसा कि हम सभी जानते हैं, 15 अगस्त भारत का स्वतंत्रता दिवस हैं, इसी दिन हमे अंग्रेजो से आजादी प्राप्त हुई थी. इस ऐतिहासिक दिन को यादगार बनाने के लिए प्रतिवर्ष 15 अगस्त को देशभर में राजकीय अवकाश के साथ आजादी दिवस जश्न बड़े-उल्लास के साथ मनाया जाता हैं. देशभर के सभी कार्यालयों और सरकारी एवं निजी शिक्षण संस्थाओ, विद्यालयों में परेड और व्यायाम के साथ ही 15 अगस्त के सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन होता हैं, मुख्य अतिथि, प्रधानाध्यापक, व विशिष्ट अध्यापकों के अतिरिक्त मेधावी विद्यार्थी इस अवसर पर भाषण, कविता, गीत और अपनी प्रस्तुती देते हैं. यहाँ आपकों शिक्षकों के लिए स्वतंत्रता दिवस भाषण उपलब्ध करवाया जा रहा हैं. यदि आप शिक्षक हैं तो इस भाषण को अपनी आवाज दे सकते हैं.

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(शिक्षकों के लिए स्वतंत्रता दिवस भाषण)

मुख्य अतिथि महोदय, प्रधानाध्यापक/ संस्था प्रधान, मंच पर विराजमान सभी अतिथि गणों, साथीगण और प्यारे विद्यार्थियों, आज हम सब अपना 72 वाँ स्वतंत्रता दिवस मनाने के उपलक्ष्य में यहाँ एकत्रित हुए हैं. मै अपने भाषण की शुरुआत से पूर्व आपकों सभी को 15 अगस्त की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ.

15 अगस्त 1947 का दिन हमारे इतिहास का सबसे महत्वपूर्ण दिवस है. इसी दिन लाखों देशप्रेमियो के एक शताब्दी तक लम्बे संघर्ष के बाद भारत को आजादी प्राप्त हुई थी. इसीलिए हम हर साल 15 अगस्त को मानते आ रहे हैं. सिर्फ 15 अगस्त की तैयारी करना, ध्वजारोहण, कार्यक्रमों का आयोजन भर इस दिन का उद्देश्य नही हैं. आज हम स्वतंत्र हैं इसकी वजह हमारे असंख्य शहीदों का बलिदान, और उनकी देशभक्ति और भारत के भविष्य के सपने को साकार करना.

आज हम आज़ाद हैं, यह: आजादी कभि छिनने ना देगे
इस तिरगे की शान: को हम कभी झुकने ना देगे
जो कोई आख उठाएगा जो मेरे हिन्दुस्थान की तरफ
उन आँखों को हम फिर इस दूनिया देखने नहीं देगे

जब भी अंग्रेजी हुकूमत का नाम जेहन में आता हैं, तो कई नाम हमारे पटल पर यकायक ही आ जाते हैं, भारत के पहले स्वतंत्रता संग्राम 1857 के हीरों और भारत में आजादी की अलख जगाने वाले मंगल पांडे जिनमे से एक थे. जिन्हें बिर्तानी हुकूमत ने 8 अप्रैल सन 1857 को फांसी दे दी थी.

हालाँकि उन्हें हुई सजा के मुताबिक फांसी की सजा 18 अप्रैल को दी जानी थी. चर्बी युक्त कारतूसो के उपयोग के कारण इन्होने इसका विरोध किया और सैन्य विद्रोह के साथ ही भारत की आजादी का संग्राम शुरू किया था. जो 14 अगस्त की अर्धरात्रि को भारत-पाक विभाजन के साथ ही भारत को स्वतंत्रता प्राप्त हुई और अंग्रेज भारत छोड़कर चले गये. इन 90 वर्षो की अवधि में अंग्रेजो ने हमारे पूर्वजो असहनीय अत्याचार किये.

दूसरी तरफ हजारो-लाखों की संख्या में नवयुवको ने अपना घर-परिवार त्यागकर भारत की आजादी की खातिर अंग्रेजी शासन के विरुद्ध विरोध का झंडा खड़ा किया और साहस और जज्बे के साथ लोहा लेते हुए अपनी जान तक दे दी. भारत के स्वतन्त्रता सेनानियों में झाँसी की रानी लक्ष्मी बाई, तात्या टोपे, भगत सिंह, महात्मा गाँधी, सुभाषचन्द्र बोस, चन्द्रशेखर आजाद, महात्मा गाँधी ऐसे असंख्य देशभक्त थे जिन्होंने भारत के भविष्य के लिए हंसते हंसते अपनी जान वतन पर कुर्बान कर दी थी.

इस सम्बन्ध में राष्ट्रकवि दिनकर की ये पक्तियाँ उपयुक्त हैं.

अँधा चकाचोध का मारा:
क्या जाने ईतिहास बेसहारा
जो चढ गये पुष्प बेदी पर
लिए बिना गरदन का मोळ:
कलम आज उनकी जय :बोल।”

आज का दिन सभी भारतीयों के लिए गर्व का दिन हैं हमारे पूर्वजो की अथक मेहनत और अंग्रेजी शासन के क्रूर अत्याचार को सहने के बावजूद हमे स्वतंत्रता उपहार स्वरूप भेट की. आज हम सभी स्वतंत्र भारत के नागरिकों का कर्तव्य हैं, अपने पूर्वजो के सपने का भारत का सपना सच कर दिखाए, हमारे देश को विकास के पथ पर तेजी से आगे ले जाए. हमे अपने गणतन्त्र को और अधिक मजबूत बनाने के साथ ही साथ राष्ट्र के सामने उपस्थित विकट समस्याओं का मिलकर सामना करने का सकल्प ले. एक भारतीय नागरिक होने के नाते हमारा यह फर्ज बनता हैं,

कि जाति धर्म क्षेत्र से ऊपर उठकर उन समस्याओं का मजबूती से सामना करते हुए देश को आगे तक ले जाए. एक नागरिक होने के तौर पर हम अपने राष्ट्र की प्रगति और अखंडता में बड़ा योगदान दे सकते हैं. दुश्मन मुल्क के वे लोग या जो पक्षधर हैं, इसी देश का अनाज खाते हैं, यही की हवा में सांस् लेते हैं, जबकि दुश्मन मुल्क के लिए काम करते हैं, ऐसे गद्दारों की पहचान कर उन्हें सबक सिखाने के अतिरिक्त आज के समय में चाइनीज सामान से भारतीय बाजार अटा पड़ा हैं, एक सच्चे भारतीय होने के नाते हमे इन उत्पादों का बहिष्कार करते हुए. स्वदेशी वस्तुओ को अपनाने का सकल्प लेना चाहिए.

गुज रहा हर देश में भारत का नगाड़ा
चमक रहा आसमान में हमारा सितारा
आज के दिन आओ मिलकर करें दुआ
बुलदी पर लहराता रहे तिरंगा अपना 

आज गाँधी और बुद्ध की शिक्षाओं पर चलते हुए शांतिपूर्ण तरीके से देश के विकास के साथ साथ विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधि, खेल, अन्तरिक्ष और विज्ञान के क्षेत्र में तकनिकी के क्षेत्र में सक्रिय रूप से अपना योगदान देकर देश की उन्नति और विकास में महत्वपूर्ण योगदान कर सकते हैं.

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