भारत और मध्यपूर्व सम्बन्ध पर निबंध | India And Middle East Relations In Hindi

भारत और मध्यपूर्व सम्बन्ध पर निबंध | India And Middle East Relations In Hindi: आज हम वर्तमान में भारत और मध्यपूर्व देशों के सम्बन्ध पर निबंध आपके साथ साझा कर रहे हैं. मुख्य रूप से middle east countries की कुल संख्या 18 है भारत के मध्यपूर्व के कुछ देशों जैसे सऊदी अरब, ईरान, इजरायल के साथ मधुर रिश्ते हैं. India Israel Bilateral Relations India and Iran India–Saudi Arabia relations के बारे में आज हम Middle East In Hindi में जानेगे.

भारत और मध्यपूर्व सम्बन्ध पर निबंधभारत और मध्यपूर्व सम्बन्ध पर निबंध | India And Middle East Relations In Hindi

India And Middle East Relations In Hindi

भारत और मध्यपूर्व के आपसी सम्बन्ध: भारत का पश्चिमी एशिया के देशों के साथ ऐतिहासिक जुड़ाव रहा है. भारत में आतंकवाद प्रभाव वही से आया था. आज भारत सर्वाधिक मुस्लिम आबादी वाला देश हैं. धर्मान्धता व कट्टरवाद भी मध्यपूर्व के देशों से अफगानिस्तान व पाकिस्तान के माध्यम से भारत में प्रसारित हुआ हैं. वैश्वीकरण के प्रोद्योगिकी प्रधान युग में मध्यपूर्व में अभी भी मध्यकालीन अवधारणा का बोलबाला हैं.

जो वहां के निवासियों को मध्यकालीन मॉडल पर चलने के लिए प्रेरित करती हैं. मध्यपूर्व के देशों में एक ओर सउदी अरब और ईराक आदि देशों में सुन्नी विचारधारा का वर्चस्व हैं. वहीँ ईरान में शिया विचारधारा का वर्चस्व हैं. खाड़ी के लगभग सभी देश तेल का उत्पादन करते हैं और इसी कारण उनकी अर्थव्यवस्था तेल के कारण सुद्रढ़ हैं. परन्तु भारत की ऊर्जा आवश्यकता की पूर्ति भी मध्यपूर्व के देशों पर निर्भर हैं.

जिनमें ईरान सबसे महत्वपूर्ण हैं. ईरान और भारत के आपसी सम्बन्ध भी सौहार्दपूर्ण हैं किन्तु अमेरिका व ईरान के आपसी सम्बन्धों में कड़वाहट से भारत के सम्बन्ध भी प्रभावित हुए हैं. भारत ने ईरान के चाबाहार बन्दरगाह पर भारी निवेश किया हैं.

एक अन्य महत्वपूर्ण पश्चिमी एशियाई देश सऊदी अरब पाकिस्तान द्वारा भारत के विरुद्ध फैलाए जा रहे इस्लामिक आतंकवाद में इसका प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष साझेदार हैं. भारत दुनियां का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है और वह तेल की आवश्यकता की पूर्ति के लिए खाड़ी देशो पर आश्रित हैं. यह उसकी कुटनीतिक व्यवस्था हैं. एक ओर भारत के लगभग ७० लाख कामगार खाड़ी के देशों में रोजगार प्राप्त कर रहे हैं, जिसका सकारात्मक पक्ष यह है कि वे लगभग 35 अरब डॉलर का वित्तीय प्रपेष्ण भारत में करते हैं.

नकारात्मक पक्ष यह है कि वे धन के साथ वहाबी विचारधारा को भी भारत में निर्यात कर रहे हैं जिससे भारत की एकता और अखंडता को खतरा उत्पन्न हो गया हैं. ईराक और सीरिया में आई एस आई एस के बढ़ते हुए प्रभाव से अन्य देशों की भांति भारत भी चिंतित हैं. पिछले दो वर्षों में भारत में इस्लामी राज्य की विचारधारा से प्रभावित होकर कई युवक इस संगठन के प्रति आकर्षित हुए हैं.

जो भारत के हितों के प्रतिकूल हैं. मध्यपूर्व के गैर मुस्लिम देश इजरायल के साथ भारत के अच्छे सम्बन्ध हैं. भारत व इजराइल में आबादी के अनुसार कोई साम्य नहीं हैं. जहाँ भारत में 1.03 अरब जनसंख्या वाला विशाल देश हैं वहीं इजराइल की कुल आबादी 80 लाख ही हैं. इस असमानता के बावजूद दोनों देश कई महत्वपूर्ण गुण समान रखते हैं. दोनों देशों में प्राचीन धर्मों का प्रधान रूप से अस्तित्व हैं. जो धर्म परिवर्तन करने में विश्वास नहीं रखते.

दोनों लोकतंत्र व धर्म निरपेक्षता में विश्वास रखते हैं. व आतंकवाद से उत्पीड़ित हैं. दोनों ही देशों की अमेरिका से निकटता हैं. दोनों ही देशों में बहुतायत मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदाय निवास करता हैं. दोनों ही देशों के लिए आतंकवाद उनके अस्तित्व को गम्भीर चुनौती प्रदान करने वाला हैं. दोनों ही देशों के अपने अपने हित हैं जो पारस्परिक निर्भरता पर बल देते हैं.

विशेष तौर पर वे आपस में ख़ुफ़िया सूचनाएं आदान प्रदान कर सकते हैं. जल प्रोद्योगिकी, चिकित्सा, सुरक्षा और उच्च तकनीकी नवाचार व कृषि में इजराइल भारत की मदद कर सकता हैं. वहीँ भारत इजराइल के उत्पादों को बेचने के लिए एक बड़ा बाजार प्रदान कर सकता हैं.

हाल ही में भारत ने इजरायल से लगभग 3 अरब अमेरिकी डॉलर की कीमत का सैन्य हार्डवेयर खरीदा हैं. दोनों ही देशों की सेनाओं में प्रशिक्षण व अन्य क्षेत्रों में निरंतर सहयोग बन रहा हैं. भारत के लिए मध्यपूर्व की विदेश नीति सबसे बड़ी चुनौती पूर्ण हैं. क्योंकि हम एक तरफ मध्यपूर्व के देशों के साथ अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए अच्छे सम्बन्ध बनाए रखना जरुरी हैं साथ ही देशों की राजनीतिक अस्थिरता व वहां की कट्टरवादी विचारधारा के भारत पर पड़ने वाले प्रभावों से सावधान रहने की आवश्यकता हैं.

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