भारत का संविधान एक परिचय | Bhartiya Samvidhan, Indian Constitution in Hindi

Bhartiya Samvidhan, Indian Constitution in Hindi: संविधान किसी देश के आधारभूत कानूनों का संग्रह होता है, इसके द्वारा न केवल सरकार का गठन होता है अपितु सरकार और नागरिकों के आपसी सम्बन्धों का निर्धारण भी होता है. संविधान देश की सरकार के विभिन्न अंगो अर्थात व्यवस्थापिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका का स्वरूप तय करता है, उनकी शक्तियों व सीमाओं का फैसला करता है. एक नजर भारत का संविधान एक परिचय पर

भारत का संविधान एक परिचय | Bhartiya Samvidhan, Indian Constitution in Hindi

संविधान के कार्य एवं शक्तियां (Acts and Powers of the Indian Constitution)

नागरिकों के क्या अधिकार होंगे, उनके क्या कर्तव्य होंगे, किसको कितना कर देना है, पुलिस कैसी होगी, न्यायालय कैसे होंगे, आदि इन सभी बातों का निर्धारित देश के संविधान द्वारा होता है. इस प्रकार संविधान किसी राष्ट्र का जीवंत प्रतिरूप होता है. लोकतंत्र में शक्ति जनता में निहित होती है. अपने आदर्श रूप में तो इस शक्ति का प्रयोग स्वयं जनता को करना चाहिए, जैसा कि प्राचीन भारत में सभा एवं समिति के द्वारा किया जाता था.

लेकिन वर्तमान में राष्ट्रों के आकार बड़े है, जहाँ प्रत्यक्ष लोकतंत्र का होना संभव नही है. आजकल प्रतिनिधीयात्मक लोकतंत्र का युग है, जहाँ जनता वयस्क मताधिकार के द्वारा अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करती हो, और वे प्रतिनिधि शासन का कार्य करते है. जनता अपनी इस शक्ति का सबसे पहला प्रयोग तब करती है जब अपने लिए एक संविधान का निर्माण करती है.

संविधान की आवश्यकता एवं निर्माण प्रक्रिया (Indian Constitution requirement and construction process)

संविधान लिखित व निर्मित हो सकता है, अलिखित भी हो सकता है और विकसित भी. जैसे संयुक्त राज्य अमेरिका आदि का संविधान निर्मित और लिखित है, जबकि इंग्लैंड का संविधान अलिखित व विकसित माना जाता है.

भारत अपने प्राचीन गौरवपूर्ण एवं प्रेरक अतीत के बाद मध्यकाल से ही विदेशी आक्रमणों का शिकार रहा है. इन विदेशी आक्रान्ताओं ने अपने क्रूरतम तरीकों से भारतीयों पर शासन किया. उनके प्रयास जनता को संतुष्ट करने की बजाय अपने धर्म का विस्तार करना और सम्पति को एकत्रित करना ही था. फिर भारत ब्रिटिश उपनिवेशवाद का शिकार बना. ईस्ट इण्डिया कंपनी, जो कि 1600 ईस्वी में व्यापार के लिए निर्मित हुई थी.

धीरे धीरे वह राजनितिक मामलों में हस्तक्षेप करने लगी. 1757 ई. में प्लासी के युद्ध और 1764 के बक्सर युद्ध के पश्चात भारत का बड़ा भाग इस कम्पनी के अधीन हो गया. अब कम्पनी के सामने यह प्रश्न था कि भारत पर शासन किन कानूनों के माध्यम से करे. अतः उसने ब्रिटिश सरकार से भारतीय प्रशासन के लिए कानून बनाने का आग्रह किया.

संविधान निर्माण की मांग (Demand for Indian Constitution creation)

तब लम्बे समय के लिए ब्रिटिश पार्लियामेंट कानून बनाती थी. जैसे रेग्युलेटिंग एक्ट, पिट्स इंडिया एक्ट, 1813 ईस्वी का एक्ट, 1909 का भारत शासन अधिनियम, 1918 का भारत शासन अधिनियम और 1935 का अधिनियम आदि. इधर भारत में धीरे धीरे राजनीतिक जागरण होने लगा जिसकी प्रेरणा स्वामी दयानन्द सरस्वती, महर्षि अरविंद, स्वामी विवेकानंद, वीर सांवरकर, बाल गंगाधर तिलक इत्यादि मनीषियों के चिन्तन से मिली.

इस प्रकार 20 वीं सदी के प्रारम्भ तक संविधान निर्माण की मांग स्वतंत्रता की मांग के साथ अभिन्न रूप से जुड़ चुकी थी. 1922 ईस्वी में महात्मा गांधी ने संविधान निर्माण की मांग प्रस्तुत की. 1925 में एक सर्वदलीय सम्मेलन हुआ, जिसमे संविधान निर्माण से संबंधित प्रस्ताव पारित हुआ.

अगस्त प्रस्ताव एवं कैबिनेट मिशन का भारत आना (August Proposal and Cabinet Mission to come to India)

जब सन 1939 में द्वितीय विश्व युद्ध प्रारम्भ हुआ, तब ब्रिटिश सरकार को युद्ध में भारतीय सहायता की आवश्यकता थी. इसलिए 1940 ई को अगस्त प्रस्ताव के द्वारा अंग्रेजो ने भारतीयों की संविधान निर्माण की मांग को स्वीकार कर लिया गया. जुलाई, 1945 में इंग्लैंड में लेबर पार्टी की नयी सरकार सता में आई, जिसने जल्द ही भारत को स्वतंत्र करने एवं संविधान निर्माण के संकेत दे दिए.

मार्च 1946 में ब्रिटिश सरकार ने तीन सदस्यीय आयोग भारत भेजा, जिसे केबिनेट मिशन कहते है. केबिनेट मिशन की योजना से भारतीय संविधान सभा का गठन हुआ, जिसने भारतीय संविधान का निर्माण किया. मिशन का यह मानना था कि संविधान सभा के गठन की सबसे सन्तोषजनक स्थति यह होती है कि उसका गठन व्यस्क मताधिकार से चुनाव के माध्यम से किया जाए.

मुस्लिम लीग और भारतीय संविधान का निर्माण (Muslim League and the Indian Constitution)

भारतीय संविधान के निर्माण के समय ही मुस्लिम लीग ने पाकिस्तान निर्माण की मांग को लेकर हिंसक कार्यवाही प्रारम्भ कर दी. जिसके कारण कानून व्यवस्था की स्थति खराब हो गई. सनः 1935 में भारत शासन अधिनियम से भारतीय प्रान्तों में विधान सभाओं का गठन किया गया था. इन विधान सभा के सदस्यों का निर्वाचन हुआ था.

केबिनेट मिशन ने विधान सभा के इन निर्वाचित विधायकों को यह अधिकार दिया कि वे अपने अपने प्रान्त के संविधान सभा के सदस्यों का निर्वाचन करे. मौटे तौर पर दस लाख लोगों पर एक संविधान सभा के सदस्य का होना निर्धारित किया गया.

संविधान सभा का गठन एवं उनके सदस्य (Indian Constitution Assembly members and their members)

जैसे किसी प्रान्त की जनसंख्या एक करोड़ थी, तब उस प्रान्त के दस सदस्य होंगे, जिनका चुनाव प्रांतीय विधानसभा के सदस्य करेगे. उस समय भारत दो भागों में बटा हुआ था- ब्रिटिश प्रान्त एवं देशी रियासते. देशी रियासतों के लिए भी संविधान सभा की सदस्यता हेतु जनसंख्या का मापदंड वही रखा गया था. लेकिन चूँकि देशी रियासतों में विधान सभाएं नही थी, इसलिए वहां से संविधान सभा के सदस्यों का मनोनयन होना तय था. इस तरह भारतीय संविधान सभा में निर्वाचित और मनोनीत दोनों तरह के सदस्य थे.

संविधान सभा के कुल सदस्य संख्या 389 निर्धारित की गई, जिनमें से 296 ब्रिटिश भारत से व 93 सदस्य देशी रियासतों के लिए जाने थे. जुलाई 1946 को संविधान सभा के 296 स्थानों के लिए चुनाव हुए, जिनमे कांग्रेस को 208 स्थान प्राप्त हुए, जबकि मुस्लिम लीग को केवल 73 स्थान हासिल हुए. अन्य स्थान छोटे दलों में विभक्त हो गये. उधर 3 जून 1947 की माउंटबेटन योजना से देश का साम्प्रदायिक आधार पर विभाजन तय हो गया.

मुस्लिम लीग की इस मांग को मान लिया कि मुसलमानों के लिए एक अलग देश पाकिस्तान की स्थापना की जाए. इसलिए संविधान सभा का पुनर्गठन हुआ और उनकी संख्या 324 निर्धारित हुई. अंतिम रूप से 284 सदस्यों ने संविधान पर हस्ताक्षर किए. देशी रियासतों के सदस्य अलग अलग समय में संविधान सभा में शामिल हुए . राजस्थान की विभिन्न रियासतों से 13 सदस्य संविधान सभा में शामिल हुए. हैदराबाद एकमात्र ऐसी रियासत थी, जिनका कोई प्रतिनिधि संविधान सभा में शामिल नही हुआ था.

भारत के संविधान का निर्माण (Construction of the Constitution of India)

संविधान सभा का 9 दिसम्बर 1946 प्रातः 11 बजे संसद के केन्द्रीय हॉल में विधिवत उद्घाटन हुआ. पहली बैठक में 211 सदस्यों ने भाग लिया. सच्चीदानंद सिन्हा को संविधान सभा का अस्थायी अध्यक्ष चुना गया. 11 दिसम्बर 1946 को डॉक्टर राजेन्द्र प्रसाद को संविधान सभा का स्थायी अध्यक्ष चुना गया. बी एन राव वैधानिक सलाहकार बनाएं गये. 13 दिसम्बर 1946 को पंडित जवाहरलाल नेहरु ने संविधान सभा में उद्देश्य प्रस्ताव रखा, जिसे 22 जनवरी 1947 को पारित किया गया.

संविधान निर्माण हेतु अनेक समितियों का गठन किया गया, जिसमे सबसे महत्वपूर्ण प्रारूप समिति थी, जिसका गठन अगस्त 1947 को हुआ. सात सदस्यीय प्रारूप समिति के अध्यक्ष डॉक्टर भीमराव अम्बेडकर थे, जो प्रख्यात वकील और कानूनी मामलों के जानकार थे.

भारतीय संविधान का निर्माण के लिए गठित समितियां (Committees constituted for the constitution creation)

संविधान का प्रारूप (ड्राफ्ट) बनाने का कार्य प्रारूप समिति का ही था. इस प्रारूप को संविधान सभा वाद विवाद, बहस और मतदान के बाद पारित करती थी. इसलिए अम्बेडकर को भारतीय संविधान का जनक (Father of Indian Constitution) कहा जाता है.

विभिन्न समितियों के प्रस्तावों पर विचार करने के बाद प्रारूप समिति ने फरवरी 1948 में पहला प्रारूप प्रकाशित किया. भारत के लोगों को इस पर विचार करने और सुझाव देने के लिए आठ माह का समय दिया. उन सुझावों और संशोधनों के अनुरूप प्रारूप बनकर नवम्बर 1948 को संविधान सभा के समक्ष प्रस्तुत किया गया.

इस प्रारूप का संविधान सभा में तीन बार वाचन हुआ. 26 नवम्बर 1949 को भारत का संविधान बनकर तैयार हो गया. इसी दिन भारतीय संविधान अगिकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित हुआ. संविधान सभा की अंतिम बैठक 24 जनवरी 1950 को हुई, जिस दिन संविधान सभा के सदस्यों ने संविधान पर हस्ताक्षर किये. 26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान लागू किया गया.

भारतीय संविधान का इतिहास (history of indian constitution in hindi)

मूल संविधान में एक प्रस्तावना जिसे उद्देशिका भी कहते है, आठ अनुसूचियाँ, 22 भाग व 395 अनुच्छेद थे. वर्तमान में अनुसूचियाँ 8 से बढ़ाकर 12 कर दी गई है. प्रस्तावना को संविधान की आत्मा, सार और उनकों समझने की कुंजी कहा जाता है. संविधान सभा ने भारतीय संविधान के निर्माण के अतिरिक्त कुछ अन्य महत्वपूर्ण कार्य भी किये.

जुलाई 1947 को उसने राष्ट्रीय ध्वज को अपनाया और जनवरी 1950 में राष्ट्रीय गीत एवं राष्ट्रीय गान को स्वीकार किया तथा डॉक्टर राजेन्द्र प्रसाद को भारत का पहला राष्ट्रपति निर्वाचित किया, जिन्होंने 26 जनवरी 1950 को शपथ ली. इसके साथ ही गणतंत्र राष्ट्र राज्य के रूप में भारत का उदय हुआ.

भारतीय संविधान निर्माण में लगा समय एवं प्रसिद्ध भाषण (Indian Constitution manufacturing time and famous speech)

इस तरह संविधान सभा ने 2 वर्ष 11 माह और 18 दिन में लगभग 64 लाख रूपये खर्च कर भारतीय संविधान निर्माण का ऐतिहासिक कार्य पूरा किया गया किन्तु संविधान के पूरा होने से ही हमारी यात्रा पूरी नही हो जाती है. डॉक्टर भीमराव अम्बेडकर ने नवम्बर 1949 को संविधान सभा में कहा था “मै महसूस करता हु कि संविधान चाहे कितना भी अच्छा क्यों न हो, यदि वे लोग जिन्हें संविधान को अमल में लाने का काम सौपा जाएगा, वे खराब निकले तो निश्चित रूप से संविधान भी खराब सिद्ध होगा”.

डॉक्टर राजेन्द्र प्रसाद ने अपने समापन भाषण में कहा ” यदि लोग जो चुनकर आएगे, योग्य, चरित्रवान और ईमानदार हुए तो वे दोषपूर्ण संविधान को भी सर्वोत्तम बना देगे, यदि उनमे गुणों का अभाव हुआ तो संविधान देश की कोई मदद नही कर सकता”

प्रत्येक संविधान उसके संस्थापको एवं निर्माताओं के आदर्शों सपनों तथा मूल्यों का दर्पण होता है. संविधान निर्विध्न अपने उद्देश्यों को पूरा कर सके, इसके लिए हमे उतरदायी नागरिक, बलिदानी और राष्ट्रवादी बनना होगा.

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