भारतीय संस्कृति के मूल तत्व | Indian Culture In Hindi

Indian Culture In Hindi: हमार देश प्राचीनतम देश है और भारतीय संस्कृति भी अत्यन्त प्राचीन है|जहां प्राचीन संस्कृति होती है वहां जीवन के कुछ मानवीय मूल्य होते है,कुछ जाचें-परखे मूल्य होते है जिन्हें एकाएक बदला नहीं जा सकता| हमारा आज का समय कठिनाइयो से भरा है तथा हमारे सामने अनेक चुनौतियाँ है किन्तु इन सबके बावजूद हमारी भारतीय संस्कृति के कुछ आधारभूत तत्व ऐसे है जिनके यह देश महान परम्पराओं का देश कहलाता है| आज जब चारों तरफ हिंसा -प्रतिहिंसा तथा द्वेष का वातावरण है, ऐसे में अहिंसा भारतीय संस्कृति (bhartiya sanskriti ) को दुनिया के सामने विशिष्ट रूप में प्रस्तुत करती है|

भारतीय संस्कृति | Essay On Indian Culture In Hindi Language

Indian Culture In Hindi

महात्मा बुध्द महावीर स्वामी ,महात्मा गांधी तथा अन्य परवर्ती चिन्तको ने देश और दुनिया में अहिंसा का प्रसार किया|

यघपि संस्कृति की कोई एक परिभाषा सम्भव नहीं है क्योकि संस्कृति भी विकास के विभिन्न रूपों का समन्वयकारी द्रष्टकोंण ही है| जैसे किसी एक व्यक्ति विशेष को जानने के लिए उसके रूप, रंग, आकार, बोलचाल, विचार, खान -पान, आचरण आदि को जानना जरुरी होता है.

भारतीय संस्कृति की परिभाषा :- वैसे ही किसी जाति की, देश की संस्कृति को जानने के लिए उसके विकास की सभी दिशाओं को जानना आवश्यक है| किसी मनुष्य -समूह अथवा देश की संस्कृति को जानने के लिए उसके साहित्य, कला, दर्शन के साथ उसके प्रत्येक व्यक्ति का साधारण शिष्टिचार भी जानना आवश्यक है| हमारे देश में अतिथि देवो भव; की संस्कृति है जिसे जयशंकर प्रसाद ने लिखा है कि -अरुण यह मधुमय देश हमारा, जहां पहुच अनजान क्षितिज को मिलता एक सहारा अर्थात भारत में आने वाले हर दुसरे देश के निवासी का पूरा सम्मान किया जाता रहा है|

वसुधैव कुटुम्बकम तथा विश्व बन्धुत्व का भाव हमारी संस्कृति के मूल तत्व है|

हम घर परिवार में भी अतिथि-सत्कार को विशेष महत्व देते है|

संस्कृति का निर्माण किसी भी देश में उपलब्धि पर भी निर्भर करता है

क्योकि संस्कृति का खान -पान आचरण तथा व्यवहार से गहरा सम्बन्ध है| संस्कृति ऐसी बहती नदी के सम्मान होती है जिसमे आने वाला हर नया व्यक्ति अपने को निर्मल करता है तथा नदी स्वय भी अपने बहाव के साथ अपने में एकत्रित हुई गन्दगी रूपी कमियों को बहाकर साफ कर देती है|

भारतीय संस्कृति पर निबंध

दुनिया की बहुत सी संस्कृतियाँ इसलिए आज लुप्त हो गईं, क्युकि उनके मूल तत्वों में कुछ दोष समाएं गये. भारतीय संस्कृति के आधारभूत तत्वों में विविधता तथा विविधता में एकता सबसे महत्वपूर्ण हैं. भारतीय संस्कृति का सबसे प्राचीनतम स्वरूप आज भी विस्तृत क्षेत्र में फैला हुआ हैं. अनेक पंथो और मतों के अनुयायी होने के बावजूद भक्तिकाल में अनेक संतो और भक्तो ने अपनी भक्ति की विभिन्न धाराओ के माध्यम से राष्ट्रिय समन्वय की स्थापना की. ज्ञान और कर्म के दो विभिन्न क्षेत्र क्षेत्र भी जीवन की साधना के ही दो मार्ग लेकिन मंजिल एक दिखाई देती हैं.

भारतीय संस्कृति  की विशेषता -: अहिंसा हमारे सभी धार्मिक और वैष्णव मतों का आधार रहा है किन्तु यह अहिंसा हमारी दुर्बलता कभी नहीं रही है  करुणा भी भारतीय संस्कृति के मूल तत्वों में से एक है|हम एक -दुसरे के सुख -दुख में सहयोग और सदभाव रखते रहे है|स्त्री का सम्मान, संकट के समय साहस न खोना, उदारता तथा अनेक विचारो के आदान-प्रदान के साथ हमारी समन्वयात्मक द्रष्टि आदि ऐसे तत्व हैं. जिन्हें हम अपने दैनिक व्यवहार में अपनाते हैं.

भारतीय संस्कृति में देश की सीमाओं को केवल भूभाग नही माना बल्कि अपनी माता से भी बढ़कर माना हैं.

‘माता भूमि: पुत्रोह प्रथ्विया अर्थात भूमि माता हैं तथा मै पृथ्वी का पुत्र हु. हमारे वेद पुराण, शास्त्र, धर्मग्रन्थ भी भारतीय संस्कृति के तत्वों के पोषक और प्रसारक रहे हैं. जिनमे जीवन की चेतना के विभिन्न स्त्रोत समाहित हैं.

हमारे साहित्य में भी भारतीय जीवन दर्शन के तत्व समाहित हैं.

अत: निष्कर्ष के रूप में हम कह सकते हैं कि माता-पिता, गुरु, अतिथि आदि का सम्मान, दुखी व्यक्ति के प्रति करुना का भाव, अहिंसा,प्रकृति की रक्षा, समन्वयकारी द्रष्टि तथा विविधता में एकता आदि भारतीय संस्कृति के मूल तत्व हैं.

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