Indian Economy In Hindi Pdf | भारत की अर्थव्यवस्था का अविकसित स्वरूप

Indian Economy In Hindi Pdf | भारत की अर्थव्यवस्था का अविकसित स्वरूप : भारत की अर्थव्यवस्था के अविकसित स्वरूप को दर्शाने वाले घटकों में निम्न प्रति व्यक्ति आय, कृषि पर अत्यधिक निर्भरता, उत्पादन की पुरानी तकनीक, छिपी हुई तथा सरंचनात्मक बेरोजगारी की अधिकता, उच्च जनसंख्या वृद्धि दर, जीवन की निम्न गुणवत्ता, गरीबी की समस्या, बेरोजगारी की समस्या आदि शामिल हैं. ये भारत की अर्थव्यवस्था में प्रगति के बाधक कारण रहे हैं. जिन्हें हम यहाँ विस्तार से जानेगे.Indian Economy In Hindi Pdf | भारत की अर्थव्यवस्था का अविकसित स्वरूप

Indian Economy In Hindi Pdf

प्रति व्यक्ति आय- 

भारत में प्रति व्यक्ति आय का स्तर बहुत नीचे हैं. जो इसके अविकसित अर्थव्यवस्था होने का प्रतीक हैं. विश्व बैंक के अनुसार 2015 में भारत की प्रति व्यक्ति सकल घरेलू आय 1590 अमेरिकी डॉलर थी. प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय में भारत का स्थान विश्व में 170 वां रहा हैं.

भारत की प्रति व्यक्ति सकल आय न केवल संयुक्त राज्य अमेरिका, इंग्लैंड, फ़्रांस, जर्मनी जैसे विकसित देशों से कम है, बल्कि चीन तथा श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों की तुलना में भी कम हैं. प्रति व्यक्ति आय के निम्न स्तर के फलस्वरूप लोगों का जीवन स्तर भी निम्न बना रहता हैं.

 जीवन की निम्न गुणवत्ता-

Indian Economy In Hindi Pdfशिक्षा और स्वास्थ्य जीवन की गुणवत्ता के दो प्रभावी निर्धारक और संकेतक हैं. ये मानव कल्याण के अभिन्न अंग हैं. इनके अभाव में आय अर्थहीन हो जाती है जब लोगों में ज्ञान प्राप्ति की इच्छा तथा स्वस्थ जीवन जीने की क्षमता होती है तभी वह आय का उपयोग करने में सक्षम हो पाते हैं.

भारत में शिक्षा का स्तर बहुत कमजोर हैं. जो निम्न साक्षरता दर से प्रतिबिम्बित होता हैं. वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार भारत में साक्षरता दर 74.04 प्रतिशत थी. जनसंख्या का लगभग एक चौथाई भाग आज भी निरक्षर हैं.

गरीबी की समस्या- 

सभी अविकसित राष्ट्रों की तरह भारत भी गरीबी की समस्या का सामना कर रहा हैं. सुरेश तेंदुलकर नामक अर्थशास्त्री के अनुमानों के अनुसार वर्ष 2011-12 में भारत में 21.92 प्रतिशत लोग गरीब थे. गरीबी वह स्थिति हैं जिसमें व्यक्ति अपनी बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा करने में भी असफल रहता है. स्वतंत्रता के पश्चात अभी तक गरीबी का निवारण नही हो पाया हैं.

कृषि पर अत्यधिक निर्भरता

जैसे जैसे अर्थव्यवस्था का विकास होता है, कृषि क्षेत्र पर इसकी निर्भरता में कमी आती हैं. तथा उद्योग एवं सेवा क्षेत्र पर निर्भरता में वृद्धि होती हैं. यदपि भारत में भी कृषि क्षेत्र पर निर्भरता में कमी आई है, लेकिन यह कमी धीमी रही हैं. स्वतंत्रता के समय लगभग 72 प्रतिशत जनसंख्या कृषि पर आश्रित थी.

आज भी कुल रोजगार का लगभग 49 प्रतिशत एवं सहायक क्षेत्रों में कार्यरत हैं. कृषि क्षेत्र गैर कृषि क्षेत्र की ओर श्रम का पलायन तो हुआ लेकिन यह बहुत धीमा रहा हैं. कृषि पर अत्यधिक निर्भरता भारतीय अर्थव्यवस्था के अविकसित स्वरूप का प्रतीक हैं.

जनसांख्यिकी कारक

अनेक जनांकिकीय कारक भारतीय अर्थव्यवस्था के पिछड़ेपन को व्यक्त करते हैं. भारत में जन्मदर बहुत ऊँची हैं. मातृ मृत्यु दर, बाल मृत्युदर, शिशु मृत्यु दर का स्तर भी ऊँचा बना हुआ हैं. भारतीय जनसंख्या की वृद्धि दर बहुत अधिक हैं. 2001 से 2011 के दशक में भारत की जनसंख्या की वृद्धि दर 17.64 प्रतिशत रही है. भारतीय जनसंख्या का आकार बहुत बड़ा है तथा यह निरंतर तेजी से बढ़ता जा रहा हैं.

बेरोजगारी की समस्या

भारतीय अर्थव्यवस्था की कृषि पर अत्यधिक निर्भरता तथा उद्योगों एवं सेवा क्षेत्र के मंद विकास के कारण देश को छिपी हुई बेरोजगारी का सामना करना पड़ता हैं. यदपि भारत में बेरोजगारी के सभी प्रकार पाए जाते हैं लेकिन यहाँ संरचनात्मक तथा छिपी हुई बेरोजगारी की समस्या सर्वाधिक गम्भीर हैं.

उत्पादन की तकनीक का पिछड़ा होना

अर्थव्यवस्था के पिछड़ेपन का एक बड़ा कारण उत्पादन की तकनीक का पिछड़ा होना हैं. आधुनिक तकनीक के अभाव में उत्पादकता का स्तर निम्न बना रहता हैं. लम्बे समय तक यह माना जाता रहा है कि प्राकृतिक संसाधनों की उपलब्धता ही विकास का प्रभावशाली कारक हैं लेकिन जापान के तीव्र विकास ने तकनीकी के योगदान को सिद्ध कर दिया हैं. भारत में धीमे आर्थिक विकास का एक कारण नवीन तकनीक का अभाव हैं.

आशा करता हूँ दोस्तों आपकों Indian Economy In Hindi Pdf का यह लेख अच्छा लगा होगा. भारत की अर्थव्यवस्था के बारे में आपके क्या विचार हैं. हमें कमेंट कर जरुर बताए.

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