इंदिरा एकादशी कथा महत्व और पूजा विधि | Indira Ekadashi Vrat Katha Mahatav In Hindi

इंदिरा एकादशी कथा महत्व और पूजा विधि | Indira Ekadashi Vrat Katha Mahatav In Hindi

आश्विन कृष्ण पक्ष की एकादशी इंदिरा एकादशी के नाम से जानी जाती हैं. इस दिन शालीग्राम की पूजा कर व्रत रखना चाहिए. पवित्र होकर शालिग्राम को पंचामृत से स्नान कराकर वस्त्र पहनावें और भोग लगावे तथा आरती पूजा इत्यादि करे. पंचामृत वितरित कर ब्राह्मण को भोजन व दक्षिणा देकर विदा करे. इंदिरा एकादशी के दिन शालिग्राम पर तुलसीदल अवश्य चढ़ाना चाहिए. इस तरीके से जो इंदिरा एकादशी का व्रत करता हैं वे अपने करोड़ो पितरों का उद्धार कर स्वयं स्वर्ग लोक को गमन करने का फल प्राप्त करते हैं. इस आर्टिकल में हम इंदिरा एकादशी 2018 डेट टाइम मुहूर्त पूजा विधि व्रत कथा और महत्व के बारे में बात करने जा रहे हैं.

Indira Ekadashi 2018 date Vrat Katha Mahatav In HindiIndira Ekadashi Vrat Katha Mahatav In Hindi

इंदिरा एकादशी व्रत कथा (Indira Ekadashi Vrat Katha In Hindi)

एक समय राजा इन्द्रसेन माहिष्मती नगरी में राज्य किया करते थे. उनके माता-पिता दिवंगत हो चुके थे. अकस्मात उन्हें एक स्वप्नं आया कि तुम्हारे माता-पिता यमलोक में कष्ट भोग रहे हैं. निद्राभंग होने पर वे चिंतित हुए कि किस प्रकार से पितरों को इस यातना से मुक्त किया जाए.

इस विषय पर राजा ने मंत्री से परामर्श किया मंत्री ने विद्वानों को बुलाकर पूछने की स्वीकृति दी. राजा ने ऐसा ही किया. सभी ब्राह्मणों की उपसिथ्त में स्वपन वाली बात पेश की गई. ब्राह्मणों ने कहा राजन -! यदि आप सकुटुम्ब इंदिरा एकादशी व्रत करे तो पितरों की मुक्ति हो जाए.

उस दिन आप शालिग्राम की पूजा ,तुलसी आदि चढ़ाकर २२ ब्राह्मणों को भोजन करा कर दक्षिणा दे ओर आशीर्वाद ले. इससे आपके माता पिता स्वय ही चले जायेगे. आप रात्रि को मूर्ति के पास ही शयन करना चाहिए. राजा ने ऐसा ही किया जब मंदिर में सो रहा था.

तभी भगवन के दर्शन हुए और उन्होंने कहा की -हे राजन ! तुम्हारे व्रत प्रभाव के चलते सभी तेरे सभी पितर स्वर्ग पहुच गये . इसी दिन से यह व्रत की महता बढ़ गई .और इसकी सम्पूर्ण राज्य में लहर चल पड़ी. इस तरह से इस इंदिरा एकादशी व्रत का महत्व बढ़ जाता हैं.

इंदिरा एकादशी व्रत पूजा विधि ( Indira Ekadashi Vrat Puja Vidhi in hindi)

आश्विन पक्ष की इस एकादशी का पितरों के तर्पण के लिए विशेष महत्व हैं. इस एकादशी को करने के महात्म्य के बारे में भगवान श्रीकृष्ण ने गीता उपदेश देते हुए धर्मराज युधिष्ठर को इसका फल बताया हैं. निम्नानुसार इंदिरा एकादशी का व्रत एवं पूजा किये जाने से सम्पूर्ण फल की प्राप्ति होती हैं.

  • विधि विधान के अनुसार एकादशी तिथि की शुरुआत से इसका व्रत रखा जाना चाहिए. इंदिरा एकादशी 2018 समय तिथि की जानकारी नीचे दी जा रही हैं.
  • एकादशी तिथि को कर्मकर्ता को सवेरे जल्दी उठने के पश्चात नित्यादी कर्मों से निवृत होने के बाद शुभ मुहूर्त की घड़ी में विधि के अनुसार किसी जलाशय अथवा नदी में पितरों का तर्पण करना चाहिए.
  • इस दिन श्राद्धकर्म कर्ता को निर्जला व्रत रखना चाहिए, उपवास तोड़ते समय अपने सामर्थ्यनुसार ब्राह्मणों को भोजन कराकर दान दक्षिणा देने से पितरों को तृप्ति होती हैं.
  • विद्वान पंडित के साथ ही श्राद्ध विधि की जानी चाहिए, स्वयं भोजन करने से पूर्व गाय तथा कौए को भी खिलाना चाहिए.
  • रात्रि को इंदिरा एकादशी की व्रत कथा सुने तथा शालिग्राम (शालिग्राम भगवान विष्णु का ही एक नाम हैं, जिन्हें नेपाल के कुछ इलाकों में इस नाम से जाना जाता हैं.) से प्रार्थना करे कि जिस तरह आपने राजा इंद्रसेन के पितरों का तर्पण कर उन्हें मोक्ष प्रदान किया, उसी तरह हमें भी मोक्ष देना.

इंदिरा एकादशी 2018 कब हैं डेट टाइम मुहूर्त ? (Indira Ekadashi Vrat Date 2018)

आश्विन मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी के दिन ऊपर वर्णित इस एकादशी का श्राद्ध कर व्रत किया जाता हैं. धार्मिक ग्रंथों में पितृपक्ष को पूर्वजों के तर्पण के लिए निर्धारित किये गये 16 दिन होते हैं. यमलोक में कष्ट झेल रहे पितरों को मोक्ष दिलाने का यह अच्छा अवसर माना जाता हैं.

इस साल इंदिरा एकादशी 2018 कब हैं इसकी शुरुआत, अंत का समय व कुल अवधि के बारे में सटीक जानकारी नीचे दी जा रही हैं.

द्वादशी खत्म होने का समय  14:42
एकादशी तिथि प्रारभ  3 अक्टूबर 2018 को 9:19 से
एकादशी तिथि अंत 4 अक्टूबर 2018 को 6:47 तक
परना का समय सुबह  13:23 से 15:42 (5 अक्टूबर)

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