7 नवम्बर 1966 को गांधी ने क्यों मरवा दिया 3000 हिंदू संतों व गौरक्षकों को आज तक नहीं जानता देश

7 नवम्बर 1966 तारीख का वो दिन जो इतिहास के पन्नों से गायब हैं. हाँ इतना तो आपने भी पढ़ा और सुना होगा कि करपात्री महाराज के नेतृत्व में भारत में गोवंध निषेध कानून बनाने के लिए भारतीय संसद के बाहर धरना दिया गया था. आपने यह भी पढ़ा होगा कि इंदिरा गांधी जो उस समय की प्रधानमंत्री थी उनके आदेश पर पुलिस ने गोलीबारी की ओर 11 साधुओं को मार दिया गया था. मगर यह सच नहीं है यह वही बाते है जो सरकार ने प्रचारित करवाई जिसे देश दुनियां ने सुना, असल में जो हुआ वो देश का अब तक का सबसे बड़ा नरसंहार था.

7 नवम्बर 1966 को गांधी ने क्यों मरवा दिया 3000 हिंदू संतों व गौरक्षकों को आज तक नहीं जानता देश

भारत में धार्मिक दंगे एक आम चलन हुआ करता था. जिनमें से कुछ बड़े दंगे हमें याद ही रहते हैं पंजाब में सिक्खों का नरसंहार 40 हजार सिख बेकसूरों की ओपरेशन ब्लू स्टार में हत्या (खालिस्तानी समर्थकों को छोड़कर बड़े पैमाने पर आम लोगों को मारा गया था)

इंदिरा गांधी की मृत्यु के बाद दिल्ली में 3 हजार सिक्खों को चुन चुन कर दिल्ली की सडकों पर मारा गया था. 2002 में गुजरात में हुआ हिन्दू मुस्लिम दंगा 3-4 हजार लोग मारे गये. कश्मीरी पंडितों की हत्या व उन्हें निकाला जाना ये आजाद भारत की घटनाएं आपकों इन्टनेट अथवा समाचार पत्रों में पढ़ने को मिल ही जाएगी.

1966 का वो दौर जब देश के एक महान प्रधानमंत्री की हत्या हो चुकी थी, इंदिरा गांधी नई नई ही प्रधानमंत्री बनी थी. अखबार और मिडिया के नाम पर कुछ अंग्रेजी और सरकारी समाचार दफ्तर ही थे, प्राइवेट मिडिया का चलन न के बराबर था. जनता तक वही खबरे पहुचती थी जिसकी अनुमति सरकार से मिलती थी.

ताजा ताजा हुए चुनावों में जीत के लिए इंदिरा गांधी ने देश के मान्य संत करपात्री महाराज और विनोबा भावे से सहायता मांगी तो उन्होंने इस शर्त पर उनका समर्थन किया कि वे जीतने के बाद देशभर में गोहत्या पर कानून बनाकर इसे बंद कराएगी. हुआ वैसा ही श्रीमती गांधी प्रधानमंत्री तो बनी मगर अपना किया वायदा टालती रही.

आखिर स्वामी करपात्री महाराज ने विनोबा भावे का आशीर्वाद लेकर संसद भवन के बाहर शांतिपूर्ण धरना देने का निश्चय किया. वे विभिन्न मठो तथा मन्दिरों से होते हुए संसद भवन पहुचे. बताया जाता है कि उनके साथ 50 हजार लोग थे जिनमें 15-20 हजार महिलाएं भारत में गोहत्या कानून के लिए इस आंदोलन में शामिल हुई थी.

1 बजे सभी लोग संसद भवन के बाहर पहुचे तथा 3 बजे करपात्री जी का भाषण हुआ, कहते है उन्होंने कहा सरकार अपने वायदे के भूल चुकी हैं उन्हें फिर से याद दिलाने के लिए हम यहाँ आए हैं. यह बात गांधी के मुखबिरों से उन तक पहुची. उस समय संसद की कार्यवाही चल रही थी.

सरकार को जब इतने बड़े जनसैलाब द्वारा आंदोलन की खबर मिली तो तुरंत प्रभाव से लोगों को हटाने के लिए पुलिस को बुलाया गया तथा भीड़ न हटने के बाद उन पर गोलिया चलानी शुरू कर दी गई.

7 नवम्बर को असल में क्या हुआ था

अब तो जो आपने जाना ये जानकारी आप किसी भी वेब पोर्टल पर पढ़ सकते हैं. यकीनन जो जनता को दिखाया गया उन्हें वही पता हैं. मगर उस दिन की सच्चाई आज तक भारत से छुपाई गई. हम आपकों इस नरसंहार की हकीकत *अनाम*  के एक विडियो पुष्पेन्द्र कुशवाहा जी को दिया था उनके आधार पर बता रहे हैं. वे पत्रकार थे तथा उस समय संसद की रिपोटिंग करते थे.

बताया जाता है कि यह आंदोलन को रोकने के लिए गांधी ने दिल्ली में आर्मी को बुलाया तथा कर्फ्यू लगा दिया गया. लोगों को चुन चुनकर गोलियों से भुना गया. इस नरसंहार में 3 हजार हिन्दू मारे गये थे. भीड़ को भगाने के लिए सेना जबरदस्ती लोगों को गाड़ियों में भरकर दूर दराज में छोड़ आने लगी. कई दिनों तक इंदिरा का यह मौत का तांडव चला.

सरकार इस नरसंहार को देश के लोगों से गुप्त रखना चाहती थी, इसलिए उन्होंने सभी समाचार कार्यालयों को एडवाइजरी जारी कर जो उसमें लिखा गया हुबहू छापने और प्रसारित करने को कहा गया, जिसमें 11 साधुओं की गोली लगने से मौत की खबर थी जो जबरदस्ती संसद भवन में घुसने की कोशिश कर रहे थे.

भले ही इस घटनाक्रम से पूरा देश अनभिज्ञ रहा मगर दिल्ली की जनता नरभक्षों को सबक सिखाने के मूड में थी. अगले ही चुनाव में गांधी दिल्ली की सातों सीट हार गई तथा जनसंघ ने यहाँ बाजी मारी थी, उस समय तक भारतीय जनता पार्टी का जन्म नहीं हुआ था. अब आपकों वो विडियो बता रहे है जिन्हें देखकर आप उस काले दिन भयावहता को जान पाएगे.

प्रियंका बताएं इंदिरा ने साधु संतो की हत्या क्यो की:मनमोहन शर्मा

उस समय गुलजारी लाल नंदा इसे जानकार बेहद षुब्ध हुए तथा इन्होने अपने पद से त्यागपत्र दे दिया था. इस घटना को और अधिक विस्तार से जानने के लिए यूट्यूब पर हमने एक और विडियो पाया जो आपके साथ साझा कर रहे हैं.

आपके साथ इस कड़वे सच को साझा करने का हमारा मकसद यह था कि आप सच्चाई से वाकिफ हो तथा देश के हर नागरिक के जेहन में कुछ सवाल जरुर आएगे.

  • सरकार ने इस घटना का सच क्यों छुपाया.
  • हिन्दूओं की पैरवी का दावा करने वाले दल बीजेपी शिवसेना के लोगों को यह नरसंहार नजर क्यों नहीं आता क्यों वो आज फिर से इस मामले की जांच कर देश के सामने नहीं रखते.
  • क्यों हिन्दू केवल वोट बैंक हैं.

यदि आप पहली बार इस घटना के बारे में जान रहे है तो प्लीज इसे अधिक से अधिक शेयर करे ताकि बेहोशी में पड़ा हिन्दू समाज 7 नवम्बर को भी जान पाए, साथ ही स्वयं को हिन्दू रक्षक कहने वाले लोगों से भी यह सवाल पूछा जाए कि भाई आपकी मजबूरी क्या है ? यह तभी हो सकता है जब आप इसे अधिक से अधिक शेयर कर देश के हर एक नागरिक तक पहुचाने में हमारी मदद करेगे.

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