भारतीय अन्तरिक्ष अनुसन्धान संगठन- information About ISRO In Hindi

भारतीय अन्तरिक्ष अनुसन्धान संगठन- information About ISRO In Hindi

ISRO in Hindi हमारे देश के प्रसिद्ध वैज्ञानिक होमी जहाँगीर भाभा के नेतृत्व में वर्ष 1962 में परमाणु ऊर्जा विभाग ने अन्तरिक्ष अनुसन्धान के लिए भारतीय अन्तरिक्ष अनुसंधान संगठन इसरो का गठन किया. तब से लेकर आज तक भारत ने अन्तरिक्ष विज्ञान में महत्वपूर्ण प्रगति की है. इसरो के अध्यक्ष 2018 ए एस किरण कुमार है. Indian space research organization इसरो से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी व इतिहास के बारे में नीचे दिया जा रहा है.

information About ISRO In Hindi (भारतीय अन्तरिक्ष अनुसन्धान संगठन-इसरो)

information About ISRO In Hindi (भारतीय अन्तरिक्ष अनुसन्धान संगठन-इसरो)
information About ISRO

भारतीय अन्तरिक्ष कार्यक्रम को गति देने का श्रेय विक्रम साराभाई को है. विभिन्न उपयोगो के लिए भारत के वैज्ञानिकों ने कई कृत्रिम उपग्रह पृथ्वी की कक्षा में स्थापित किये है. प्रथम भारतीय कृत्रिम उपग्रह का नाम आर्यभट्ट था. जिसे अप्रैल 1975 में पूर्व सोवियत संघ के बेकानूर अन्तरिक्ष अनुसन्धान केंद्र से प्रक्षेपित किया गया था. इसके साथ ही भारत ऐसा करने वाला विश्व का छठा देश बन गया है. इसका प्रमुख कार्य पृथ्वी के वायुमंडल का अध्ययन करना था. वर्ष 1975 से अब तक भारत कई उपग्रह अन्तरिक्ष में भेज चुका है.

इनमें प्रमुख के  नाम है- भास्कर, एप्पल, इनसेट, रोहिणी, आई आर एस, एडुसेट, हिमसेट, कार्टोसेट, रोसोर्ससेट, ओशनसेट, जीसेट, चंद्रयान, मंगलयान आदि. इन उपग्रहों की सहायता से दूरसंचार प्रसारण, मौसम, जलवायु, सुदूर संवेदन, मानचित्रण, संसाधन आकलन, सूखा, बाढ़ व तूफ़ान सम्बन्धी पूर्वानुमान, रक्षा सम्बन्धी गतिविधिया और कई अन्य सार्वजनिक एवं राष्ट्रउपयोगी कार्यों का सम्पादन सुचारू रूप से संभव होने लगा है.

भारत का मंगल अभियान (mars campaign of india)

मंगल गृह के बारे में जानकारी हासिल करने के लिए भारत ने मंगलयान नामक एक अंतरिक्ष याँ नवम्बर 2013 को आंध्रप्रदेश के श्रीहरिकोटा में स्थित सतीश धवन अन्तरिक्ष केंद्र से प्रक्षेपित किया, जिसने लगभग 11 माह की यात्रा कर सितम्बर 2014 में मंगल की कक्षा में सफलतापूर्वक प्रवेश कर लिया.

पहले प्रयास में उपलब्धी हासिल करने वाला भारत विश्व का एकमात्र देश है. इसी प्रकार चन्द्रमा का अध्ययन करने के लिए अक्टूबर 2008 में चंद्रयान नामक एक अन्तरिक्ष यान को भी प्रक्षेपित किया गया है.

पहली अंतरिक्ष वेधशाला (First space observatory)

मंगलयान की सफलता के बाद भारत उन देशों की सूची में शामिल हो गया है, जिनकी अंतरिक्ष में वेधशाला है. इसरो द्वारा श्रीहरिकोटा से अक्टूबर 2015 में देश की पहली अंतरिक्ष वेधशाला एस्ट्रोसैट को प्रक्षेपित किया गया है.

इससे ब्रह्मांड का अध्ययन करने में मदद मिलेगी. भारत से पहले अमेरिका, रूस, जापान और यूरोपीय संघ ने भी अपनी वेधशालाएं स्थापित की है. इसरो की अब तक की उपलब्धियों पर गौर करे तो इसके द्वारा अब तक के 43 वर्षों के इतिहास में 34 कृत्रिम उपग्रह प्रक्षेपित कर चूका है. जिनमें से वर्ष 2016 सबसे स्वर्णिम काल था. इस साल भारत द्वारा एक साथ 20 उपग्रह सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किये गये थे.

इनमें से ख़ास बात यह है, कि 33 सेटेलाइट पूर्णत भारत में निर्मित राकेट के द्वारा छोड़े गये थे. जबकि इन 33 उपग्रहों में से 11 स्वदेशी व शेष अन्य राष्ट्रों की मदद से बनाए गये थे. जीएसएलवी मार्क 2 बनाने के बाद अब भारत को उपग्रह प्रक्षेपण के लिए किसी देश पर निर्भर रहने की आवश्यकता नही है.

इसरो की बड़ी कामयाबी एकसाथ 104 उपग्रहों का सफल प्रक्षेपण

15 फरवरी 2017 का दिन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के लिए सबसे महत्वपूर्ण दिन था. पीएसएलवी राकेट के जरिये श्रीहरिकोटा से 104 उपग्रहों का एक साथ प्रक्षेपण कर नया इतिहास रच दिया है. इससे पहले एक ही रोकेट से इतनी बड़ी मात्रा में सेटेलाईट भेजने का रिकॉर्ड सोवियत रूस के नाम था, जिसे अब भारत ने तोड़ दिया है. भेजे गये इन प्रक्षेपास्त्र में भारत के 3 तथा शेष अन्य राष्ट्रों के थे.

इसरो की इस उपलब्धी के बाद अन्तरिक्ष में रूस व अमेरिका के बाद भारत उन शक्तिशाली देशों की सूची में शामिल हो गया है. राकेट का जन्म चीन से माना जाता है. भारत एवं चीन के मध्य रेशम मार्ग से व्यापारिक सम्बन्ध थे. संभवत यह तकनीक भी इसी मार्ग से यहाँ आई. अंग्रेजों के साथ मैसूर के युद्ध में टीपू सुल्तान ने हवा में उड़ने वाले राकेट छोड़कर अंग्रेजों को अचम्भित कर दिया था.

इसरो का मुख्यालय बेगलुरु में है. भारत के वैज्ञानिकों द्वारा खगोल विज्ञान से जुड़े समस्त क्रियाकलाप यही पर सम्पन्न किये जाते है. माना जाता है, कि इसरो में 17 हजार से अधिक कर्मचारी व वैज्ञानिक कार्य करते है. इस संगठन की विधिवत स्थापना आज से 48 वर्ष पूर्व 15 अगस्त 1969 को की गई थी.

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