आंतरिक सुरक्षा की चुनौतियां पर निबंध | Internal Security Challenges

Indian Internal Security Challenges Essay – जब किसी देश के नागरिकों में असुरक्षा का भाव हो तथा आंतरिक समस्याओं में उलझा राष्ट्र कभी भी प्रगति की राह पर आगे नही बढ़ सकता. विकास और नागरिकों के उन्नत जीवन जैसे विषयों पर ध्यान देने की बजाय प्रशासन आंतरिक चुनौतियों में उलझ कर रह जाता हैं. जिसका राष्ट्र के विकास और गौरव पर प्रतिकूल असर पड़ता हैं. आज भले ही हम कुछ क्षेत्रों में अग्रणी हो गये हो लेकिन बार-बार हमारी आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठते आए हैं. कभी साम्प्रदायिकता, क्षेत्रवाद, नक्सलवाद, अलगाववाद और जम्मू कश्मीर में आंतरिक आतंकवाद आज बड़े Internal Security Issue बन चुके हैं.

Internal Security Challenges | आंतरिक सुरक्षा की चुनौतियां पर निबंध

हमारी आंतरिक व्यवस्था और शांति पर सवाल उठाने वाली कुछ खतरनाक समस्याओं के बारे में इस निबंध में विस्तार पूर्वक जानेगे.

जम्मू कश्मीर और अन्य राज्यों में आतंकवाद की समस्या (Terrorism problem in Jammu and Kashmir and other states)-

सरल शब्दों में कहा जाए तो पिछले कुछ वर्षो से जम्मू कश्मीर राज्य में गृह युद्ध चल रहा है. एक तरफ भारतीय सेना, सुरक्षा बल और जम्मू कश्मीर पुलिस हैं तो दूसरी तरफ जिहादी विचारधारा को मानने वाले लोगों के गुट है. सेना और इन आतंकवादियों के बिच आए दिन घटनाएं पढने को मिलती हैं. जिहादी विचारधारा और पाकिस्तान का समर्थन करने वाले ये लोग सीमा पार से आने वाले आतंकियों को प्रश्रय देकर किसी बड़ी घटना को अंजाम देने में मदद करते हैं. सालों से चली आ रही इस आंतरिक सुरक्षा समस्या से निपटने के लिए केंद्र और राज्य सरकार को कुटनीतिक और सैनिक दोनों स्तर की बड़ी कार्यवाही करने की आवश्यकता हैं.

जम्मू कश्मीर राज्य की जनता को भी चाहिए कि आंतरिक शांति और सुव्यवस्था के लिए सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों का समर्थन कर सक्रिय सहयोग दे. समय रहते यदि इस समस्या पर लगाम नही लगाई गई तो न केवल कश्मीर की वादिया यू ही खून से लथपत होती रहेगी, बल्कि इसका बुरा असर देश के अन्य हिस्सों में भी देखने को मिल सकता हैं.

नक्सलवाद की समस्या और समाधान (Naxalism Problems and Solutions)

यदि आतंकवाद के बाद भारत की आंतरिक सुरक्षा की चुनौती पर नजर डाले तो नक्सलवाद का ही नाम आता हैं. भारत में नक्सलवाद की शुरुआत आजादी के साथ ही मानी जाती हैं. पश्चिम बंगाल के नक्सलबाड़ी गाँव से शुरू हुआ एक सशस्त्र विद्रोह आज आँध्र प्रदेश, छत्तीसगढ, उड़ीसा, झारखंड और बिहार सहित दर्जन राज्यों तक फ़ैल चूका हैं. चीन के कम्यूनिस्ट नेता माओत्से तुंग की विचारधारा से प्रभावित होकर किसानों तथा मजदूरों की मांगो की पूर्ति के लिए 1967 में चारू मजूमदार और कानू सान्याल द्वारा शुरू की गई यह क्रांति आज जनसंहार का माध्यम बन चुकी हैं. साम्यवादी विचारधारा के समर्थन से भू स्वामियों के खिलाफ की गई कार्यवाही नक्सलवाद के रूप में इसकी शुरुआत हुई थी.

अशिक्षित और आदिवासी नवयुवकों को बहला फुसला कर अपने अधिकारों के नाम पर इस सिस्टम का विरोधी बना दिया जाता हैं. मन में कुंठा और विद्रोह का भाव लिए राह से भटके नवयुवक हिंसक घटनाओं को अंजाम देते है, बड़े स्तर पर इस तरह की कार्यवाही आज भारत की बड़ी आंतरिक सुरक्षा की समस्या बन चुकी हैं. सरकार और इन समुदाय के लोगों द्वारा बातचीत या उनकी मांगो को स्वीकार कर नक्सलवाद की समस्या को समाप्त किया जा सकता हैं.

साम्प्रदायिकता (Communalism)

इस बात की पुष्टि के लिए किसी प्रमाण की आवश्यकता नही हैं. कि अलग-अलग धर्म जाति और भाषाओं में विविधता होने के उपरांत भी हम भारतीय सदा एकता के सूत्र में बंधे रहे हैं. हमारा इतिहास इस बात का गवाह हैं, कि प्राचीन काल से आज तक हजारों जातियों और समुदायों, विचारधाराओ के लोग भारत आए और भारत की इस संस्कृति के साथ रस बस गये, इन्हे अपना लिया. इस देश का प्रत्येक नागरिक चाहे वो हिन्दू, मुस्लिम, सिख,इसाई किसी सम्रदाय से आता हो हमेशा आपस में मिल-जुलकर रहना चाहते हैं.

मगर कुछ राजनेता और कट्टरपंथी राजनितिक दल जाति और धर्म के नाम पर हमे बाटकर अपना स्वार्थ सिद्ध करने में लगे हैं. वे हर घटना कों जाति और धर्म के नजरिये से देखकर उस पर राजनीती करने का कोई अवसर नही छोड़ते हैं. ये ही चंद लोग भारत में साम्प्रदायिकता का जहर घोलकर अपना उल्लू सीधा करने लगे हैं.

अलगाववाद (Separatism)

अलगाव अपने आप में अशुभ शब्द हैं. भारत राज्यों का संघ हैं, किसी भी देश के समग्र विकास के लिए सता की धुरी का मजबूत होना जरुरी समझा जाता हैं. इसे दुर्भाग्य ही कहा जाए, हर समय भारत में एक नये राज्य की मांग होती रहती हैं. प्रशासन की सुविधा और अधिक अधिकारों के नाम पर आजादी के बाद से कई बड़े राज्यों का विघटन होकर लघु राज्यों में तब्दील हो गये हैं. एक सीमा तक यदि राज्य बहुत बड़ा हैं, जिनका प्रशासन सुचारू रूप से चलाना असम्भव हो तो जरुरी हैं उस राज्य का टुकड़ा कर पृथक राज्य बनाए जाए. मगर एक संभाग से भी कम आकार के क्षेत्र को लेकर बार-बार अलग राज्य बनाने की जिद्द और इसी जिद्द को लेकर उग्र प्रदर्शन, हड़ताले और तोड़फोड़ कहा तक उचित हैं.

भाषा के आधार पर विभाजित पहला राज्य आंध्रप्रदेश था, जो 1953 में बना था और आज 2017 आते आते भारत में कुल राज्यों की संख्या 29 हो गईं हैं. देश की आंतरिक सुरक्षा और समुचित विकास में बड़े राज्य महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. किसी भी तरह की कार्यवाही या प्रशासन व्यवस्था में ये छोटे-छोटे राज्यों की सीमाएँ राष्ट्र की एकता और अखंडता के लिए अच्छा संकेत नही हैं.

क्षेत्रवाद और भाषावाद (Regionalism and philology)

लोगों द्वारा अपने क्षेत्र स्थान को दूसरों से विशिष्ट और अच्छा मानना, अपने निवास स्थान, क्षेत्र, राज्य के प्रति निष्ठा रखना. देश के दुसरे भागों के बारे में तनिक भी न सोचकर अपने ही क्षेत्र के विकास की सकीर्ण विचारधारा को क्षेत्रवाद कहा जाता हैं.  इस तरह की विचारधारा से देश के अन्य क्षेत्र और अपना क्षेत्र टकराव की स्थति में आ जाते हैं. क्षेत्रवाद के कारण लोगों में अपने क्षेत्र विशेष के लिए अधिक आर्थिक, राजनितिक और सामजिक विकास की भावना घर कर जाती हैं. जिसके कारण असमानता का जन्म होता हैं, जो देश की एकता के लिए खतरा हैं.

भाषावाद– भारत में 22 भाषाओं को सविधान द्वारा मान्यता प्रदान की गई हैं, देश के विभिन्न कोनों में तक़रीबन 1700 बोलिया बोली जाती हैं. विविधता में एकता की पहचान लिए हमारे देश के अधिकतर भागों में हिंदी भाषा बोली व समझी जाती हैं. इस कारण इसे राजभाषा का दर्जा दिया गया हैं. कुछ दक्षिणी भारत के राज्य जिनमे मुख्य रूप से तमिलनाडू और केरल में हिंदी को राष्ट्रिय भाषा बनाने के विरोध में कई विद्रोह हुए. इस प्रकार के भाषाई टकराव देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा साबित हो सकता हैं.

Internal Security Challenges आज के लेख में हमने समसायिक भारत की आंतरिक सुरक्षा की मुख्य चुनौतियों के बारे में सक्षिप्त विवेचन किया हैं. यह हिंदी निबंध आपकों कैसा लगा कमेंट कर जरुर बताए.  Internal Security ISSUE & Challenges के इस लेख कों अपने मित्रों के साथ अवश्य शेयर करे.

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