साक्षात्कार क्या है अर्थ प्रकार इतिहास तैयारी – Interview In Hindi Meaning Questions Tips Preparation Skills

Interview In Hindi Meaning, Questions, Tips, Preparation Skills yourself, my self, for freshers, upsc, interview hindi, teacher, techniques: हेलो दोस्तों आज का हमारा यह लेख में हम में हम साक्षात्कार के बारे में हिंदी में विस्तार से यहाँ जानेगे. साक्षात्कार हमारे जीवन हमारा अभिन्न अंग हैं नौकरी पेशे व किसी व्यक्ति से अनौपचारिक चर्चा  भी करनी पड़ती हैं. यह भी एक साक्षात्कार का अन्य रूप हैं. साक्षात्कार क्या है अर्थ प्रकार इतिहास तैयारी के सम्बन्ध में हम पूरी जानकारी आपके साथ साझा कर रहे हैं.

साक्षात्कार क्या है अर्थ प्रकार इतिहास तैयारी- Interview In Hindi

Interview In Hindi Meaning Questions Tips Preparation Skills

साक्षात्कार के उद्देश्य ( Objectives Of Interview In Hindi)

अंग्रेजी शब्द इंटरव्यू के शब्दार्थ के रूप में साक्षात्कार शब्द का प्रयोग किया जाता हैं. इसका सीधा आशय साक्षात् कराना तथा साक्षात करना होता हैं. इस तरह यह स्पष्ट है कि साक्षात्कार वह प्रक्रिया हैं जो व्यक्ति विशेष का साक्षात् करा दे.

किसी भी क्षेत्र में चर्चित या विशिष्ट उपलब्धि प्राप्त करने वाले व्यक्ति के सम्पूर्ण व्यक्ति एवं कृतित्व की जानकारी जिस विधि द्वारा प्राप्त की जाती है उसे साक्षात्कार कहते हैं.

साक्षात्कार व्यक्ति अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम हैं. यह विधा भेंटवार्ता, इंटरव्यू, बातचीत, भेंट के रूप में खासी लोकप्रिय है. जहाँ साहित्य के क्षेत्र में एक रचनाकार के जीवन, रचनाकर्म, विचारों, को समझने का सबसे प्रामाणिक माध्यम साक्षात्कार हैं तो प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मिडिया की विश्वसनीयता का आधार साक्षात्कार हैं.

साक्षात्कार क्या है अर्थ (What Is Interview Meaning In Hindi )

साक्षात्कार को जानने समझने के लिए हमें दूसरों के विषय में सब कुछ जानने की मानवीय जिज्ञासा की प्रवृति को समझना होगा. इंसान दूसरों के बारे में विशेषकर चर्चित, प्रसिद्ध, अप्रसिद्ध लोगों के बारे में बहुत कुछ जानना चाहता है. वह अपने विषय में या अपने विचार दूसरों को बताने का इच्छुक भी रहता हैं.

वह अपने अनुभवों का लाभ दूसरों तक तथा दूसरों के तजुर्बों का फायदा स्वयं प्राप्त करना चाहता हैं. शायद इसी आवश्यकता ने साक्षात्कार विधा को जन्म दिया. साक्षात्कार मानव प्रवृति की इन आवश्यकताओं की पूर्ति करता हैं.

पत्रकारिता के सन्दर्भ में रैडमा हाउस शब्दकोश में साक्षात्कार को इस प्रकार परिभाषित किया है. साक्षात्कार उस वार्ता अथवा भेंट को कहा गया है जिसमें संवाददाता (पत्रकार) या लेखक किसी व्यक्ति या किन्ही व्यक्तियों के सवाल जवाब के आधार पर किसी समाचार पत्र में प्रकाशन के लिए अथवा टेलिविज़न पर प्रसारण हेतु सामग्री एकत्र करता हैं.

आज की पत्रकारिता की दुनिया में सामने वाले से कुछ निकलवाने के लिए राजनीति, टकराहट तथा गला काट प्रतिस्पर्धा चल रही हैं जिसमें सामयिक घटनाओं के प्रति सम्बन्धित व्यक्तियों के सनसनी फैलाने वाले शब्द साक्षात्कार के माध्यम के से सामने आते हैं और वहीँ समाचारों की सुर्खियाँ बन जाते हैं.

साक्षात्कार के प्रकार (Types of interviews In Hindi)

मौलिक रूप से साक्षात्कार दो तरह के होते हैं- पहला वे जो विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं या नौकरियों के लिए होते हैं  दूसरा  वे साक्षात्कार जो रेडियो, टीवी या समाचार पत्रों के लिए रिपोर्टर या सम्पादक लोग लेते हैं. इन्हें माध्यमोपयोगी साक्षात्कार भी यह कह सकते हैं.

प्रतियोगितात्मक साक्षात्कार माध्यमोपयोगी साक्षात्कार को पूरी तरह भिन्न होता हैं. इसका आयोजन सरकारी या निजी प्रतिष्ठानों में नौकरी से पूर्व सेवायोजक द्वारा उचित अभियर्थी के चयन के लिए किया जाता हैं. माध्यमोपयोगी साक्षात्कार जनसंचार के माध्यमों के द्वारा जनसामान्य तक पहुंचाए जाते हैं.

जनमाध्यम की प्रकृति के आधार पर साक्षात्कार भी भिन्न प्रकार से आयोजित किये जाते हैं. इनके सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक पक्षों में बहुत अंतर होता हैं. जिसकी पूर्ण और स्पष्ट जानकारी का होना साक्षात्कारदाता व साक्षातकर्ता दोनों के लिए आवश्यक होता हैं.

माध्यम के अनुसार ही कर्ता और दाता अपनी तैयारी कर सकते हैं और फलस्वरूप साक्षात्कार की सफलता सुनिश्चित की जा सकती हैं. फिलहाल हम इस अध्याय में जन माध्यमों वाले साक्षात्कार की चर्चा ही करेंगे. जनमाध्यमों के आधार पर साक्षात्कार दो प्रकार हो सकता हैं- पहला प्रिंट मिडिया के लिए साक्षात्कार तथा दूसरा इलेक्ट्रानिक मिडिया के लिए साक्षात्कार.

प्रिंट मीडिया के लिए साक्षात्कार (Interview for print media In Hindi)

रेडियो और टीवी के लिए किये जाने वाले साक्षात्कार से प्रिंट माध्यम का साक्षात्कार पूरी तरह से भिन्न प्रकृति का होता हैं. यदपि इस माध्यम के साक्षात्कार में भी रिपोर्टर टेपरिकॉर्डर या कैमरे का उपयोग कर सकता है लेकिन उसे अंतिम रूप में उसे सुन कर लिखना और टाइप करना पड़ता हैं.

प्रिंट मीडिया के लिए किये जाने वाले साक्षात्कार में दाता और कर्ता के हाव भाव शारीरिक गतियों और वेशभूषा का कोई महत्व नहीं होता हैं. इस माध्यम के साक्षात्कार में सुधार करने की भी पूरी सम्भावनाएं होती हैं, क्योंकि यह साक्षात्कार दर्शकों, श्रोताओं की तरह तुरंत उसी रूप में पाठकों को प्रस्तुत नहीं किया जाता हैं.

साक्षात्कार आयोजन के बाद सम्पादक अपनी कुशलता से साक्षात्कार की प्रभावपूर्ण प्रस्तुति प्रदान कर देता है. प्रिंट मीडिया के साक्षात्कार में भाषा सरल या विषयानुसार क्लिष्ट भी हो सकती हैं, क्योंकि इसे पढ़ने वाला व्यक्ति साक्षर तो अवश्य ही होगा, साथ ही साथ किसी शब्द, वाक्य या विषय को समझने के लिए पाठक के पास एक से अधिक बार पढ़ने की सुविधा होती हैं.

इस माध्यम के साक्षात्कार में समय की सीमा का भी कोई प्रतिबन्ध नहीं होता है लेकिन समाचार पत्र या पत्रिका में  उपलब्ध स्थान की जानकारी अवश्य रखनी पड़ती हैं. प्रिंट मीडिया के लिए यदा कदा सुविधानुसार साक्षात्कारदाता को प्रश्न लिखकर भी दे दिए जाते हैं, जिनका उत्तर वह लिखकर भी भेज देता है और फिर उसे प्रकाशित कर दिया जाता है. कहने का अर्थ यह हैं कि प्रिंट मीडिया के साक्षात्कार में दाता और कर्ता को एक दूसरे के सामने बैठकर बातचीत करने की बाध्यता नहीं होती है,  जबकि इलेक्ट्रानिक मीडिया के साक्षात्कार में ऐसा करना आवश्यक होता हैं.

इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के लिए साक्षात्कार (Interview for electronic media In Hindi)

रेडियो और टेलीविजन को इलेक्ट्रानिक मीडिया के अंतर्गत शामिल किया जाता हैं. इनके लिए किये जाने वाले साक्षात्कार की सफलता में तकनीकी पक्ष का भी विशेष योगदान होता हैं. जहाँ एक तरफ रेडियो श्रव्य माध्यम हैं. वहीँ दूसरी तरफ टीवी दृश्य श्रव्य माध्यम हैं. यदि हमें रेडियो के लिए साक्षात्कार करना है तो टेपाकंन विधि से परिचित होना साक्षात्कारदाता और साक्षात कर्ता दोनों के लिए जरुरी हैं.

पूर्व निधारित किसी स्थान विशेष या स्टूडियो में साक्षात्कार में शामिल होने से पूर्व दाता और कर्ता के माध्यम के तकनीकी पक्षों और गुणों की पूरी तरह जानकारी प्राप्त कर लेनी चाहिए. आवाज की गति, तीव्रता, उच्चाकरण,  माइक्रोफोन को निश्चित  दिशा एवं स्थिति आदि के सम्बन्ध में पूरी तरह सहज होने पर ही एक अच्छे साक्षात्कार का आयोजन सम्भव नहीं हो सकता हैं.

रेडियो के लिए किये जाने वाले साक्षात्कार के सम्बन्ध में साक्षातकर्ता और दाता को भी स्मरण रखना चाहिए कि एक बार टेपा किंत हो जाने के बाद उसमें सम्पादन की गुंजाइश बहुत कम और सीमित ही रहती हैं. कहने का अर्थ यह है कि साक्षात्कार में शामिल व्यक्तियों की बातचीत, श्रोता सीधे सुनता है, इसलिए उसमें सुधार की सम्भावना कम ही रहती हैं. इसी तरह टीवी के लिए आयोजित किये जाने वाले साक्षात्कार में भी अत्यंत सावधानी की जरूरत होती हैं.

बल्कि दृश्य श्रव्य माध्यम होने के कारण टीवी के लिए आयोजित किये जाने वाले साक्षात्कार में अतिरिक्त ध्यान देने की आवश्यकता होती हैं. हालांकि आजकल ऐसे सॉफ्टवेयर आ गये हैं जो कुशलता से इंटरव्यू को सम्पादित कर देते हैं और उसमें रही खामियों को भी दूर कर देते हैं.

साक्षात्कार का इतिहास (History of interview In Hindi)

संवाद को प्राचीन संस्कृत ग्रंथों में साक्षात्कार का प्राचीन रूप माना जाता हैं. नचिकेता यम संवाद, मरणासन्न रावण से लक्ष्मण का संवाद, भीष्म- युधिष्ठिर संवाद, कृष्णाजूर्न संवाद गीता, भरत आग्नेय संवाद, गार्गी याज्ञवल्क्य संवाद, गौतम सत्यकाम संवाद आदि साक्षात्कार के प्राचीन रूप माने जा सकते हैं.

पश्चिम में अठाहरवीं शताब्दी में साक्षात्कारों में कवि लैंडर की गद्य पुस्तक इमेजिनरी कनवर्सेशंस में अतीत के साहित्यिक पात्रों के लगभग 150 काल्पनिक संवाद वार्तालाप हैं, जिनमें जीवन और साहित्य से जुड़े अनेक विषय शामिल हैं. पैटामेरान में पेद्राक व् कोकेशियों के संवाद हैं. पश्चिम में रिव्यू ऑफ़ रिव्यूज के एडिटर स्टीड साक्षात्कार के महान विद्वान् थे. दुनिया में नेलिसन रोम्या रौलां, लुई फिशर, गाइतेलेज, रोबिन डे, जार्ज शेफर, फिल्डर कुक, राइनर, मेनवेल, रिचर्ड ब्रगिन स्टीव रिचर्डरास, डायना, गुडमैंन, डिस्का जोकी आदि पश्चिम के प्रमुख साक्षात्कारकर्ता के तौर पर जाने जाते हैं.

साक्षात्कार की तैयारी (Preparation for interview In Hindi)

इलेक्ट्रानिक मीडिया या पत्र पत्रिकाओं के लिए साक्षात्कार विभिन्न माध्यमों के तैयार होते हैं. परम्परागत रूप से मौखिक व लिखित साक्षात्कार तैयार होते रहे हैं. मौखिक साक्षात्कार में किसी व्यक्ति से समय लेकर या आवश्यकता पड़ने पर आकस्मिक रूप से बातचीत कर साक्षात्कार तैयार किया जाता हैं.

समय लेकर निर्धारित स्थान पर भेंटवार्ता में जानने समझने का काफी अवसर मिल जाता हैं. आकस्मिक रूप से किसी विषय घटना प्रसंग, समाचार की पुष्टि व खंडन के लिए मीडियाकर्मी सम्बन्धित व्यक्ति को जहाँ भी मिले, घेरकर प्रश्नों की झड़ी लगा देते हैं और अपने मतलब की बात निकाल ले जाते हैं. टेलीफोन, विडियो कांफ्रेसिंग सुविधा के माध्यम से दर्शकों के सामने वाले से बात कर लेते हैं. आजकल इंटरनेट चेटिंग के जरिये भी साक्षात्कार तुरंत फुरंत सामने आ रहे हैं.

पहले पत्र द्वारा प्रश्न भेजकर साक्षात्कार लिया जाता था, जो अब दूरसंचार माध्यमों के तीव्र विकास के साथ ही ईमेल या सोशल साइट्स के माध्यम से होने लगा हैं. साक्षात्कार लेने के लिए यदि समय हो तो सम्बन्धित व्यक्ति से पहले ही बात करके दिन समय और स्थान तय करना बेहतर हैं इससे इंटरव्यू देने वाले को भी सुविधा रहती हैं. जिसका इंटरव्यू करना हैं उसके सम्बन्ध में जितनी भी सूचनाएं उपलब्ध हों उनका अध्ययन कर लेना चाहिए. सूचनाएं व जानकारियाँ किताबों, पत्रिकाओं व इंटरनेट पर आसानी से मिल जाती हैं.

साक्षात्कार की कला के टिप्स (Interview Tips In Hindi)

साक्षात्कार लेने वाले नम्रता, लेखन शक्ति, जिज्ञासा, बोलने की शक्ति, भाषा का अधिकार, तटस्थता, बातें निकालने की कला, पात्र को सुनने का धैर्य, मनोविज्ञान, बदलती परिस्थतियों के अनुरूप बातचीत को मोड़ देने की कला, व्यवहार कुशलता एक अच्छे साक्षात्कार को तैयार करने में सहायक होते हैं. प्रिंट मीडिया में इंटरव्यू करने वाले को शीघ्र लिपि यानी शोर्ट हेंड का ज्ञान होना जरुरी नहीं है, लेकिन वाक्यांश, घटनाएं, तिथियाँ, स्थान, सिद्धांत, वाक्य, व्यक्ति के मनोभाव जो भी लिखना चाहे सहज रूप से अंकित कर निष्पक्षता से उसे ढालना होता हैं.

अखबार या टीवी के लिए साक्षात्कार के दौरान सामने वाले व्यक्ति के सम्मान की रक्षा व अभिव्यक्ति को पूरा महत्व मिलना बहुत जरुरी हैं चाहे वह किसी भी हैसियत का क्यों न हो, व्यक्तित्व, परिधान, भाषा की कमजोरी, शिक्षा की कमी, गरीबी के कारण उसकी अपेक्षा नहीं की जा सकती. उससे महत्वपूर्ण सूचनाएं व विचार मिलते हैं. यदि किसी व्यक्ति से साक्षात्कार करते समय घमंड, रूखापन, बात थोपना, वाचालता, कटुता, सुस्ती से परहेज करने वाले पत्रकारों ने सामने वाले के ऐसे दुर्गुणों को सहन करते हुए अच्छे साक्षात्कार प्रस्तुत करने में सफलता पाई हैं. कई बार इंटरव्यू देने वाले चतुर होते हैं. वे प्रश्नों को टाल जाते है या छिपाते है तो घुमा फिराकर ख़ूबसूरती से वह अपनी बात सामने ले आना एक अच्छे साक्षातकर्ता की सफलता हैं.

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