इस्लाम धर्म इतिहास संस्थापक और शिक्षाएं | Islam Religion History Founder And Teachings In Hindi

Islam Religion History Founder And Teachings In Hindi इस्लाम के संस्थापक हजरत मोहम्मद थे. इनका जन्म 570 ई में मक्का में हुआ था. इनके पिता का नाम अब्दुल्ला और माता का नाम आमिना था. पिता का देहांत मोहम्मद साहब के जन्म से पूर्व तथा माता का देहांत इनकी बाल्यावस्था में ही हो गया था.

इस्लाम धर्म इतिहास संस्थापक और शिक्षाएं | Islam Religion History Founder And Teachings In Hindi

  • हजरत मोहम्मद का जीवन (life of hazrat muhammad in hindi)

 इनका लालन पोषण इनके दादा द्वारा व्यवस्था के अनुसार हलीमा दाई ने किया. मोहम्मद साहब ने 25 वर्ष की आयु में एक विधवा स्त्री खदीजा से विवाह कर लिया. खदीजा की आयु उस समय 40 वर्ष की थी. वह हजरत मोहम्मद साहब की ईमानदारी से प्रभावित थी. लेकिन विवाह के बाद हजरत मोहम्मद साहब लिन रहने लगे.

  • इस्लाम धर्म का इतिहास (History of Islam)

    इस्लाम के पूर्व अरब की जनता बहुदेववाद थी, वे मूर्तिपूजा में विश्वास करती थी. इन्ही परिस्थियों में वहां इस्लाम का उदय हुआ. हजरत मोहम्मद साहब को हिरा नामक गुफा में ईश्वरीय ज्ञान हुआ. उन्होंने अरबी जनता को संदेश दिया कि ” अल्लाह के सिवाय कोई भी पूजनीय नही है और मै उनका पैगम्बर हू. उन्होंने काबा में रखे हुए 360 देवताओं की पूजा का विरोध किया.

    इस कारण मक्कावासी नाराज हो गये और उनका विरोध करने लगे जिसके कारण हजरत मोहम्मद को मक्का छोड़कर मदीना जाना पड़ा. यह महत्वपूर्ण घटना इस्लाम में हिजरत कहलाती है. इसी घटना से ही 622 ई से इस्लाम में हिजरी सन शुरू हुआ. मक्का पहुचने पर हजरत साहब का सत्कार एवं स्वागत करने वाले अंसार कहलाएं. यही से उन्होंने इस्लाम का प्रचार शुरू किया.

  • मक्कावासी धीरे धीरे उनके विचारों को मानने लगे और समस्त अरब जगत में उनका प्रचार प्रसार हुआ. 632 ई में उसकी मृत्यु के बाद उनके खलीफाओं ने विशाल सम्राज्य की नीव डाली. हजरत अबुबकर सिद्दीकी, हजरत उमर फारुक, हजरत गनी, हजरत अली आदि ख्लिफाओं ने इस्लामी मजहब का खूब प्रचार किया.
  • इस्लाम के नियम (The rules of Islam)

इस्लाम का दार्शनिक चिंतन मुसलमानों के पवित्र ग्रन्थ कुरान में संग्रहित है. ये चिंतन/नियम इस प्रकार है. पांच मुख्य शिक्षाएं निम्नानुसार है.

  1. मूल मन्त्र (कलमा)- अल्लाह के सिवाय कोई पूजनीय नही है और मोहम्मद उसके पैगम्बर है अर्तात इस्लाम एकेश्वरवाद में विश्वास करता है.
  2. नमाज- प्रतिदिन पांच निश्चित समयों पर अल्लाह को सजदा नमन करना. यह समय सूर्योदय से पहले (फजर), दोपहर (जोहर) तीसरा पहर (असर), सूर्यास्त (मगरिब) तथा रात्रि शयन से पूर्व (इशा) है. शुक्रवार को बड़ी सामूहिक नमाज.
  3. रोजा (व्रत)- रमजान के पूरे महीने में प्रतिदिन सूर्योदय से सूर्यास्त तक खाना पीना नही करना.
  4. जकात (दान)- यदि वर्ष में साढ़े सात तोला सोना या 52 तोला चांदी के बराबर या अधिक धन हो तो इसका 40 वाँ हिस्सा दान में दे देना.
  5. हज यात्रा- जीवन में कम से कम एक बार मक्का में मजहबी यात्रा पर जाना.

इस्लाम की मान्यता है कि मनुष्य की मृत्यु के बाद अल्लाह उसके कर्मों का हिसाब कर उसे जन्नत अथवा दोजख प्रदान करता है. इस्लाम के अनुसार यह जीवन अंतिम है, अर्थात इस्लाम पुनर्जन्म को नही मानता है. तथा इस्लाम मूर्ति पूजा में भी विश्वास नही करता है.

Leave a Reply