Jaigarh Fort Jaipur History In Hindi | जयगढ़ किले का इतिहास

Jaigarh Fort Jaipur History- जयगढ़ किला राजस्थान का प्राचीन दुर्ग है जो जयपुर में स्थित हैं. चील का टीका नामक पहाड़ी पर स्थित यह किला जयपुर के ऐतिहासिक धरोहर का प्रतीक हैं. जयगढ़ में विश्व की सबसे बड़ी तोप को रखा गया हैं. आमेर दुर्ग और वहां स्थित एक झील जिसका नाम मावता है उसके पास जयपुर नरेश सवाई जयसिंह द्वितिय ने इसका निर्माण करवाया था.

जयगढ़ किला – Jaigarh Fort को आमेर के शासकों ने अपनी सुरक्षा एवं निवास के उद्देश्य से बनाया था. इस किले का एक अन्य नाम विजयी दुर्ग भी हैं. किले का नाम उस समय के शासक जयसिंह के नाम ही रखा गया था. जयवैन नाम से विख्यात जयगढ़ किले की कुल लम्बाई ३००० मीटर तथा चौड़ाई ७०० मीटर के आस-पास हैं. इस किले में इतिहास के कई रहस्य छुपे पड़े हैं. आज हम जयगढ़ के बारे में जानेगे.

Jaigarh Fort Jaipur History In Hindi

Jaigarh Fort Jaipur History In Hindi | जयगढ़ किले का इतिहास

आमेर के राजप्रासाद के दक्षिणवर्ती पर्वत शिखर पर निर्मित जयगढ़ का निर्माण महाराजा मानसिंह प्रथम ने करवाया था. मगर इतिहासकार जगदीश सिंह गहलोत और डॉ गोपीनाथ शर्मा के अनुसार जयगढ़ का निर्माण मिर्जा राजा जयसिंह ने करवाया था, उन्ही के नाम पर यह किला जयगढ़ कहलाता हैं.

जयगढ़ राजस्थान का एकमात्र किला है, जिस पर कभी बाह्य आक्रमण नहीं हुआ. श्रीमती इंदिरा गांधी के प्रतिनिधित्व काल में गुप्त खजाने की खोज में इस किले के भीतर व्यापक खुदाई की घटना ने जयगढ़ को देश विदेश में चर्चित बना दिया.

जयगढ़ उत्कृष्ट गिरि दुर्ग हैं. सुद्रढ़ और उन्नत प्राचीर, घुमावदार विशाल बुर्ज तथा पानी के विशाल टाँके इसके स्थापत्य की प्रमुख विशेषता हैं. जयगढ़ के भवनों में जलेब चौक, दीवान ए आम, दीवान ए ख़ास ललित मंदिर, विलास मंदिर, लक्ष्मी निवास, सूर्य मंदिर, आराम मंदिर, राणावतजी का चौक आदि मुख्य हैं.

किले में राम, हरिहर व काल भैरव के प्राचीन मंदिर बने हुए हैं. आराम मंदिर के सामने मुगल उद्यान शैली पर निर्मित एक मंदिर हैं. जयगढ़ के भीतर एक लघु अन्तः दुर्ग भी बना हुआ हैं. जिसमें महाराजा सवाई जयसिंह ने अपने छोटे भाई विजयसिंह को कैद कर रखा था. विजयसिंह के नाम पर यह विजयगढ़ी कहलाया.

विजयगढ़ी के पार्श्व में एक सात मंजिला प्रकाश स्तम्भ हैं जो दिया बुर्ज कहलाता हैं. जयगढ़ में तोपें ढालने का विशाल कारखाना था जो राजस्थान के किसी अन्य किले में नहीं मिलता हैं. महाराजा सवाई जयसिंह द्वारा बनवाई गई एशिया की सबसे बड़ी तोप जयबाण यहीं पहियों पर रखी हुई हैं. जयगढ़ में मध्यकालीन शस्त्राशस्त्रों का विशाल संग्रहालय बना हुआ हैं.

 Jaigarh Fort History In Hindi जयगढ़ दुर्ग का इतिहास

जयपुर के इस किले में  लक्ष्मी विलास, ललित मंदिर, विलास मंदिर और आराम मंदिर के अलावा शस्त्रागार तथा यहाँ का म्यूजियम विशेष रूप से दर्शनीय हैं. यहाँ की जयबाण तोप विशेष रूप से लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र रहती है जो वजन में 50 टन से अधिक वजन की हैं. इस दुर्ग में जल के संग्रहण के लिए टाँके और तालाब बने हुए है.

जयगढ़ का यह किला शहर से 14 किमी की दूरी पर स्थित हैं. इस दुर्ग के चारो ओर तीन किलोमीटर लम्बी प्राचीर बनी हुई हैं. किले में प्रवेश के दो द्वार हैं.  विद्याधर नामक वास्तुकार के निर्देशन में इसका निर्माण कराया गया था. यह राजपरिवार का आवासीय स्थान था. जहाँ से खड़े होकर जयपुर शहर को स्पष्ट देखा जा सकता हैं.

मुगलों के काल में इस किले का उपयोग शस्त्रागार के रूप में किया गया था. बताया जाता है कि बाबर ने जब भारत के कई नगरों के धन को लूटने के बाद इसी जयगढ़ किले में कही छिपा दिया था. मुगलों के बाद में यह किला सवाई जयसिंह के हाथ में आ गया. उन्होंने जयपुर के विकास के लिए भी काफी धन खर्च किया था.

जयगढ़ किला की कुछ रोचक बाते – Jaigarh Fort Interesting Facts

बात इंदिरा गांधी के शासन काल की है जब भारत में आपातकाल लगा हुआ हैं. बताया जाता है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टों ने इंदिरा गांधी को एक पत्र लिखा जिसमें मिसेज गांधी से जयगढ़ किले में छिपे खजाने का आधा हिस्सा पाकिस्तान को देने की बात कही गई थी.

जब सरकार को एक ऐसे खजाने के बारे में पता चला तो उन्होंने सेना की मदद लेकर जयपुर के इस दुर्ग में खजाने की खुदाई का कार्य 10 जून 1976 को आरम्भ करवा दिया.

अगले छः महीने तक सेना का एक दल जयगढ़ में खजाने की खोज करता रहा. आखिर एक दिन जयपुर दिल्ली हाईवे को बंद कर दिया गया था. मगर सरकार ने स्पष्ट तौर पर मना कर दिया कि उन्हें इस तरह के खजाना नहीं मिला हैं उन्होंने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को भी लिखा कि विशेषज्ञों का मानना है कि इस पर पाकिस्तान का कोई हक नहीं हैं.

बताया जाता है कि यह गुप्त खजाना तकरीबन 128 करोड़ का था. मगर सरकार का यह दावा कि जयगढ़ से कोई खजाना नहीं निकला, इसका मतलब न देश समझ पाया हैं. न जयपुर के वे लोग जो लम्बे समय तक इस दुर्ग में खजाना छिपा होने की बात करते थे. यदि खजाना नहीं था तो हाईवे बंद क्यों किया गया. यदि खजाना नहीं मिला तो आखिर वो कहाँ गया.

यह भी संभव हैं. सरकार ने लोगों को धोखे में रखकर उस बंद हाईवे से ट्रक भरकर दिल्ली पहुचा दिया गया. कई लोगों ने सुचना के अधिकार का उपयोग करते हुए सरकार से इस खजाने के बारे में जानने की अपील की, मगर विभागों द्वारा इस सम्बन्ध में उनके पास कोई सूचना न होने का हवाला हर बार दिया जाता रहा.

जयगढ़ के शस्त्रागार में तलवारें, ढाल, बंदूकें और 50 किलोग्राम भारी तोप और प्राचीन समय के हथियार रखे गये है. वर्तमान में ये पर्यटकों के देखने के लिए इसे खुला रखा गया हैं.  1720 में निर्मित जयबाण तोप को किले के ऊपर रखा गया है. इस तोप से 40 किमी की मारक क्षमता हैं जिसमे  100 किलोग्राम गनपाउडर का उपयोग एक गोला दागने के लिए किया जाता था.

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