जयशंकर प्रसाद का जीवन परिचय | Jaishankar Prasad Biography In Hindi

जयशंकर प्रसाद का जीवन परिचय | Jaishankar Prasad Biography In Hindi :

जयशंकर प्रसाद एक युग प्रवर्तक रचनाकार थे. जिन्होंने एक साथ कविता, नाटक, कहानी और उपन्यास के क्षेत्र में हिंदी को गौरवान्वित करने वाली रचनाएं लिखी. आधुनिक हिंदी साहित्य के इतिहास में प्रसाद का गौरव अक्षुण्ण है. काशी के प्रसिद्ध सुंघनी साहू परिवार में जन्म, आरम्भिक शिक्षा और जीवन समर्द्धता से प्रारम्भ हुआ, किन्तु 17 वर्ष की आयु में प्रसाद पर आपदाओं का कहर टूट पड़ा. जयशंकर प्रसाद ने धीरता और गंभीरता से विषम परिस्थतियों का सामना किया.

जयशंकर प्रसाद का जीवन परिचय

Jaishankar Prasad Biography In Hindi-प्रसाद के साहित्य में प्रकृति की चेतना के सचेतन रूप के साथ साथ मानव के लौकिक और परलौकिक जीवन की जैसी विविधतापूर्ण झाँकी प्रस्तुत की गई है, वैसी आधुनिक युग के किसी अन्य कवि में नही मिलती है. कवि के रूप में जयशंकर प्रसाद निराला, पंत, महादेवी के साथ छायावाद के चौथे स्तम्भ के रूप में प्रतिष्ठित हुए. नाट्य लेखन में स्वर्णिम इतिहास को आधार बनाकर गौरवशाली भारतवर्ष का रेखांकन कर उस समय के जनमानस में आत्म चेतना का संचार किया. कहानी और उपन्यास के माध्यम से मानवीय करुना और भारतीय मनीषा के अनेकानेक अनावृत पक्षों का उद्घाटन किया है.

Jaishankar Prasad Ka Jeevan Parichay

जीवन परिचय बिंदु जयशंकर प्रसाद जीवन परिचय
पूरा नाम जयशंकर प्रसाद
धर्म हिन्दू
जन्म 30 जनवरी 1889
जन्म स्थान वाराणसी उत्तरप्रदेश
माता-पिता देवीप्रसाद
मृत्यु 15 नवम्बर 1937, 48 वर्ष की आयु में
मुख्य रचनाएं
  • कानन कुसुम
  • महाराणा का महत्व
  • झरना
  • आंसू
  • लहर
  • कामायनी
  • प्रेम पथिक
पेशा कवि, नाटककार, कहानीकार, उपन्यासकार

इनका जन्म 30 जनवरी 1889 को काशी के देवी प्रसाद जी के घर हुआ था. काशी में इनकी पुश्तेनी पैठ थी, इनके दादा के बाद पिता का जनता बड़ी श्रद्धा से सम्मान किया करती थी. इस तरह के परिवार में जन्मे पले प्रसाद जी को बहुभाषीय (संस्कृत, हिंदी, उर्दू, तथा फारसी) शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिला. जब वे 17 साल के थे तब इनके बड़े भाई और माताजी के निधन ने इनकी जिन्दगी में दुखों का पहाड़ खड़ा कर दिया.

विषम परिस्थतियों में परिवार को सभालने के साथ ही इन्होने क्वींस कोलेज में अपना अध्ययन जारी रखा. साहित्य को धन अर्जन का साधन मानने की बजाय प्रसाद जी इसे साधना मानते थे. कलम के जादूगर कहे जाने वाले जयशंकर प्रसाद जी की जीवनचर्या में व्यायाम, सात्विक खान पान और अपने विचारों के पक्के थे. ये शतरंज के भी अच्छे खिलाड़ी रहे है. नवम्बर 15, 1937 को काशी में ही इनका निधन हो गया, जब प्रसाद जी 48 साल के थे.

जयशंकर प्रसाद की रचनाएँ ( Jaishankar Prasad Compositions)

  • कानन कुसुम
  • महाराणा का महत्व
  • झरना
  • आसू
  • लहर
  • कामायनी (काव्य)
  • स्कन्दगुप्त
  • चन्द्रगुप्त
  • धुर्वस्वामिनी
  • जनमेजय का नागयज्ञ
  • राजश्री (नाटक)
  • छाया
  • प्रतिध्वनि
  • आकाशद्विप
  • आँधी
  • इंद्रजाल (कहानी संग्रह)
  • कंकाल
  • तितली
  • इरावती (उपन्यास)

Jaishankar Prasad जी हिंदी साहित्य के अमूल्य रत्न थे. आज भी उनकी जीवंत रचनाओं के कारण उन्हें याद किया जाता है, भारत के गौरवमयी इतिहास को अपने नाटकों के जरिये आमजन तक पहुचाने वाले प्रसाद जी अपनी कलम के चिन्हों से आज भी हमारे बिच अमर है, उन्ही की रचना की दो पक्तियाँ..

“मधुप गुन-गुनाकर कह जाता कौन कहानी अपनी यह,
मुरझाकर गिर रहीं पत्तियाँ देखो कितनी आज घनी।
इस गंभीर अनंत-नीलिमा में असंख्‍य जीवन-इतिहास
यह लो, करते ही रहते हैं अपने व्‍यंग्‍य मलिन उपहास”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *