जाम्भोजी का इतिहास और विश्नोई समाज | Jambho Ji History Hindi

Jambho Ji History Hindi जाम्भोजी विश्नोई सम्प्रदाय के संस्थापक थे. इनका जन्म विक्रम संवत् 1508 में (1451 ईस्वी) भाद्रपद शुक्ल अष्टमी को नागौर जिले के पीपासर गाँव में पंवार लोह्टजी और हाँसा देवी के यहाँ पर हुआ था. लगभग 20 वर्ष तक पशु चराने का कार्य किया और उसके बाद सन्यास ग्रहण कर लिया और विक्रम संवत् 1593 में देह त्याग किया.

जाम्भोजी का इतिहास और विश्नोई समाज | Jambho Ji History Hindiजाम्भोजी

विक्रम संवत् 1542 में जाम्भोजी ने कार्तिक कृष्णा अष्टमी पर समराथल नामक स्थान पर प्रथम पीठ स्थापित करके विश्नोई समाज का प्रवर्तन किया. शासक वर्ग व विशिष्ट वर्ग दोनों ही इनसे प्रभावित थे. जाम्भोजी के सिद्धांत लोगों के दैनिक जीवन से जुड़े हुए है. जाम्भोजी ने अपने अनुयायियों को 29 नियम पालन करने पर जोर दिया. विश्नोई नाम भी (बीस-नौ) अंको में (20-9) के आधार पर ही दिया.

जाम्भोजी शांतिप्रिय, सह्रदयी, साग्राही, समन्वयकारी, उदार चिंतक, मानव धर्म के पोषक, पर्यावरण के संरक्षक व हिन्दू मुसलमानों में एकता व सामजस्य के समर्थक थे. अकाल के समय जाम्भोजी ने सामान्य जन की सहायता की थी. उन्होंने बताया कि ईश्वर प्राप्ति के लिए सन्यास की आवश्यकता नही है. समराथल के पास मुकाम नामक स्थान पर वर्ष में दो बार जाम्भोजी का मेला लगता है.

जाम्भोजी ने चारित्रिक पवित्रता और मूलभूत मानवीय गुणों पर बल दिया. इनके वचनों का सामूहिक नाम सबदवाणी है. जाम्भोजी की शिक्षाओं के कारण ही विश्नोई समाज निरंतर पर्यावरण की रक्षा एवं जीव हत्या के विरोध में प्रयासरत है.

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