जुम्मा मुबारक शायरी – Jumma Mubarak Shayari in Hindi & Urdu with Images for WhatsApp – Jumma Mubarak Dua 2 lines

जुम्मा मुबारक शायरी – Jumma Mubarak Shayari in Hindi & Urdu with Images for WhatsApp – Jumma Mubarak Dua 2 lines:-विश्व के सभी पथो धर्मों के अपने अपने त्योहार व मान्यताएं है. जुम्मा इस्लाम धर्म से जुडी महत्वपूर्ण रस्म है. इसे salat al-jumu’ah के नाम से भी जाना जाता है. शुक्रवार के दिन की दोपहर की नमाज को जुम्मा कहा जाता है. यहाँ मुस्लिम भाइयों बहिनों के जुम्मा शेरो शायरी, हिंदी उर्दू शायरी SMS on जुम्मा. जुम्मा मुबारक लव शायरी डाउनलोड विथ इमेज इन हिंदी में उपलब्ध करवाई जा रही. जुम्मा मुबारक शायरी को अपने दोस्तों के साथ शेयर जरुर करे.जुम्मा मुबारक शायरी – Jumma Mubarak Shayari in Hindi & Urdu with Images for WhatsApp – Jumma Mubarak Dua 2 lines

जुम्मा मुबारक शायरी – Jumma Mubarak Shayari in Hindi & Urdu with Images for WhatsApp – Jumma Mubarak Dua 2 lines

ऐ खुदा ..
बस यें ही दुआ हैं आपसें …
धन व सम्रद्धि बरसे या ना पर…
अन्न व प्यार को कोई न तरसे
जुम्मा मुबारक


जुम्मे की नमाज के पहले, गुसुल करके पाक ऐ ओ साफ़,

लिबास पहनकर कोई पाक जगह कोई तन्हाई में 200 2⃣0⃣0⃣times

*_یَا اَللّه YA ALLAH_*


जो बन्दा अपने क्रोध को रोकेगा
अल्ल्लाह पाक ..
कयामत के दिन उस पर से
अजाब रोक देगा.
(जुम्मा मुबारक शायरी इन हिंदी)


जुम्मा मुबारक शायरी इन हिंदी

अपने आराध्य पर भरोसा करो, अल्लाह वो नहीं देता जो हमें अच्छा लगता है, अल्लाह वों देता है, जो हमारे लिए अच्छा होता है.

जो किस्मत में नही हो
वो रोने से नहीं मिलता
मगर अल्लाह से दुआ में
मिल जाता है.
Jumma Mubarak ho

तुम अल्लाह को याद रखों
अल्लाह तुम्हे याद रखेगा.

assalaam vaalekum
हर किसी के लिए दुआ किया करों
कया पता किसी के नशीब में
आपकी दुआ का इंतज़ार कर रही हो
जुम्मा मुबारक

काश उन को भी याद आउ मे जुम्मा की दुआओ मे
जो अक्सर मुझसे कहते हैं दुआओ मे याद रखना
Jumma Mubarak Quotes

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इस्लाम धर्म में अल्लाह की इबादत का महत्वपूर्ण स्थान है. शुक्रवार का दिन जुम्मा कहलाता है. इस दिन दोपहर को मुख्य नमाज अदा की जाती है. एक सच्चे मुसलमान के लिए जुम्मा का महत्व, भोजन, पानी, मित्र, परिवार तथा सन्तान से भी बढ़कर है.

जुम्मा क्या है, मुबारक शायरी आपको जुम्मा मुबारक हो (jumma mubarak meaning)

शुक्रवार की नमाज इतनी खास क्यों है, क्यों ऐसा मानते है कि आखिर इस दिन जो दुआ की जाती है, वो अल्लाह कबूल करता है. तथा कोई भी जुम्मा दुआ फिजूल नही जाती है. क्या इस्लामिक धर्म ग्रंथो में इस प्रकार का कोई वर्णन मिलता है, अथवा ये लोगो द्वारा बनाई गयी धारणा है. इस विषय पर बहुत से लोग अनभिज्ञ है.

शुक्रवार यानि जुम्मे का महत्व आप इस बात समझ से सकते हैं कि जुम्मा के दिन हर मुसलमान दोपहर को नमाज मस्जिद या दरगाह में ही अदा करता है, यदि वों वहां तक नहीं पहुच पाता है, तो यथा स्थान पर ही बिस्तर बिछाकर नमाज शुरू कर देता है.

अल्लाह बंदे की दुआ हर वक्त भी कबूल कर सकता है, फिर शुक्रवार का जुम्मा ही क्यों? इसके पीछे का इतिहास व कहानी यह है, कि जमा मस्जिद का नाम इस जुम्मे के कारण ही पड़ा है. यह वह स्थान है, जहाँ सभी नमाजी एकत्रित होकर एक दुसरे का सुख दुःख जानते है, तथा अनजान लोगो के साथ अपने रिश्ते बनाते हैं.

इसलिए कहा जाता है कि अल्लाह की इबादत के साथ ही शुक्रवार का दिन भाईचारे को के लिए जाना जाता है, इस्लामिक इतिहास में इस दिन को रहम का दिन मानते है, तथा लोगो का विश्वास है, कि अल्लाह इस दिन सभी भूलों व गलतियों को माफ़ कर देता हैं.

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