कल्कि अवतार जयंती भविष्यवाणियों जन्म स्थान कहानी और महत्व | Kalki Avatar Of Lord Vishnu In Hindi Language

Kalki Avatar Of Lord Vishnu In Hindi Language हिन्दू धर्म में कुल तैंतीस करोड़ देवता की मान्यता हैं, सम्भवत इसका प्रमाण भले ही नही हो, हर तीज त्यौहार पर मनाएं जाने वाले पर्व इसकी पुष्टि करते हैं. देवताओं अर्थात भगवान् को श्रेणियों में रखा जाए तो ब्रह्मा, विष्णु और महादेव को सबसे बड़े यानि देवों के देव माने जाते हैं. कल्कि अवतार एक ऐसे भगवान् की कल्पना मात्र हैं, लोगों की धारणा और विशवास की माने तो कलयुग की समाप्ति पर स्वय भगवान् विष्णु जी कल्कि अवतार के साथ अपना दसवाँ रूप लेकर धरती पर अवतरित होंगे.

Kalki Avatar Of Lord Vishnu In Hindi Language

(कल्कि अवतार जयंती भविष्यवाणियों जन्म स्थान कहानी और महत्व)

यानि इसका मतलब हुआ कि ये एक भविष्यवाणी(predictions ) हैं. वे कहाँ अवतरित होंगे, उनके अवतार की तिथि क्या होगी. इस सम्बन्ध में कोई विशिष्ट धारणा नही हैं. विष्णु जी के दसवे अवतार कल्कि अवतार जी के कथा पुराण और जयंती पर्व तक प्रचलन हैं. ऐसे निष्कलंक भगवान् की पूजा और कई स्थानों पर मन्दिर भी बनाएँ जा चुके हैं. यदि आज के युग का कोई पढ़ा-लिखा इंसान जो विज्ञान की थोड़ी-बहुत जानकारी रखता हैं. शायद इन बातों को अपवाह कहे या भ्रांति. यह आम भारतीयों लोगों का विशवास हैं,

वैसे भी हमारे धर्म और पुराणों में विशवास को ही भगवान् का दूसरा नाम दिया गया हैं. यकीनन इसी को मानकर लोग चल रहे होगे कि स्वय विष्णु कल्कि अवतार के रूप में अवतरित होंगे. अब तक के विष्णु जी के दस अवतार ये हैं.पहला अवतार मतस्य के रूप में दूसरा कूर्मा तीसरा वराह चौथा अवतार नरसिम्हा पांचवा अवतार वामन छठा अवतार परशुराम सातवाँ राम और आठवा कृष्ण नौवा बुद्ध दसवा कल्कि अवतार माना जाता हैं, जिनका अभी तक जन्म नही हुआ हैं.

कल्कि अवतार जयंती, जन्म स्थान, समय (Kalki Avatar Jayanti, Birth Place, Time-date)

  • कल्कि अवतार जन्म (जयंती) – सावन महीने की छठ
  • माता-पिता – सुमति – विष्णुयश
  • घोड़ा- सफेद
  • बच्चे-जय, विजय, मेघमाल, बलाहक
  • गुरु-परशुराम
  • भाई-सुमंत, प्राज्ञ, कवी
  • जन्म स्थान-संभल

कल्कि भगवान के अवतार की अब तक की धारणाओं और भविष्यवाणीयों में उनके बारे में यह जानकारी निकलकर सामने आती हैं, कि कल्कि भगवान सावन की छठवी तिथि को सफेद रंग के घोड़े पर विराजमान होकर सर्व देवी-देवताओं की शक्ति के साथ धरती पर अवतरित होंगे. कृष्ण की भांति पीले वस्त्र धारी कल्कि भगवान बढ़ रहे पाप को मिटाने के लिए दुष्टों का संहार करेगे. हमारे पवित्र ग्रन्थ भागवत गीता में कल्कि भगवान के बारे में उनके जन्म-जन्म स्थान समय तिथि और रंग रूप सहित पूर्ण जानकारी दी गईं हैं.

kalki avatar story prophecies About birthplace

कल्कि अवतार के सम्बन्ध में कई स्थानों पर संभल नामक स्थल का वर्णन किया गया हैं. कि विष्णु के 10 वें अवतार का जन्म स्थान संभल हैं. मगर अभी तक इस सम्बन्ध में पता नही लगाया जा चूका हैं. कि कल्कि अवतार का जन्म स्थान बताया जाने वाला संभल कहां स्थित हैं, कौनसा राज्य किस जिले में.

इस विषय में लोगों की भी कोई स्पष्ट राय नही हैं. कुछ लोग मानते हैं. यह उत्तरप्रदेश का संभल गाँव ही कल्कि अवतार का जन्म स्थान होगा. कुछ लोग मानते हैं. चाइना के क्षेत्राधिकार के मरुस्थल में संभल गाँव स्थित हैं. कोई मथुरा के पास को कोई भारत के अन्य राज्य में इसके होने का दावा करते हैं. कुछ कृष्ण भक्त मानते हैं, कि मथुरा वृन्दावन नगरी पर ही कल्कि अवतार लेगे. स्पष्ट हैं अभी तक इनके जन्म स्थान के बारे में सर्वमान्य स्पष्ट राय नही बन पाई हैं.

कल्कि अवतार कथा (kalki avatar story)


कल्कि अवतार के अवतार की कथा काली के साथ भी जोड़कर देखी जाती हैं, यदि आपने ध्यान दिया हो तो काली देवता की फोटो में वे सफेद घोड़े पर सवार हाथ में तलवार लिए इस घोड़े के तीन पैर जमीन पर जबकि एक हवा में हैं. कहते हैं ये पैर धीरे-धीरे जमीन पर आ रहा हैं, जिस दिन ये पूर्णतया जमीन पर आ जाएगा वो कल्कि अवतार का समय होगा. इस दिन से कलयुग का अंत और नये युग की शुरुआत मानी जाएगी.

भविष्य के कल्कि अवतार की भविष्यवाणी को गुरु गोविन्द सिंह जी के शब्द और पुख्ता करते हैं. गुरु जी ने स्वय कल्कि अवतार के जन्म और उनकी शक्ति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कल्कि अवतार जो 100 सिखों का अवतार होंगे. साथ ही गुरूजी ने विष्णु पुराण में इस सम्बन्ध लिखी बात की पुष्टि करते हुए लिखते हैं कि कल्कि भगवान विष्णु का दशम अवतार होगा. जो इस युग की समाप्ति पर श्वेत घोड़े पर सवार होकर पापियों और दुष्टों का सहार करने आएगे.

Kalki Jayanti (कल्कि जयंती )


बहुप्रतीक्षित कल्कि अवतार को पिछले सैकड़ो वर्षो से पूजा जाता हैं, बकायदा इनके मन्दिरों की भी स्थापना हो चुकी हैं. देश के कई हिस्सों में कल्कि अवतार के मन्दिर बनाएँ जा चुके हैं, जिनमे जयपुर राजस्थान में सबसे विशाल मन्दिर भी बना हुआ हैं. कल्कि अवतार की सम्भावित जन्मतिथि को कल्कि जयंती के रूप में मनाने का प्रचलन हैं.

कई स्थानों पर मन्दिरों में पूजा पाठ के साथ सामूहिक भोज का भी आयोजन किया जाता हैं. विष्णु पुराण, गीता भागवत और गुरु गोविन्द सिंह जी के दशम ग्रन्थ में इनका उल्लेख होने के कारण लोग इन्हें पूर्ण सत्य मानकार भक्ति और साधना के साथ भविष्य के भगवान् कल्कि अवतार का जन्म का इन्तजार हजारों साल से करते आ रहे हैं.

कल्कि पुराण और कथा (kalki purana In Hindi)

हिन्दू धर्म में वेद पुराणों का बड़ा महत्व हैं, इन्हें पूजनीय समझा जाता हैं. इन्ही ग्रंथो में से एक ग्रन्थ का नाम हैं कल्कि पुराण जो कल्कि यानि विष्णु के दसवे अवतार की कथा प्रस्तुती हैं. इस पुराण में बताया जा चूका हैं कि 4,320 यानि आज से लगभग दो हजार साल बाद कलयुग का अंत होगा. और इसी समय विष्णु अपने नये रूप में कल्कि अवतार लेगे.

इस पुराण के पहले भाग में मार्कण्डेय जी और शुक्रदेव के बिच के वार्तालाप की कथा का वर्णन किया गया हैं. संभावित जन्म स्थान संभल गाँव में दिव्य शक्तियों के साथ प्रकट धरती के महावतार का जन्म की कहानी दी गयी हैं. इनके अगले खंडो में सिहल द्वीप से पद्मावती से विवाह और पुन: हरिद्वार आकर ऋषि मुनियों के साथ पुरुषोतम श्रीराम के जीवन का आदर्श वर्णन करते हैं.

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