Kamada Ekadashi Story In Hindi | कामदा एकादशी व्रत कथा एवं महत्व

Kamada Ekadashi Story In Hindi कामदा एकादशी व्रत कथा एवं महत्व: ऐसी मान्यता हैं कि भूत प्रेत यौनियों से मुक्ति के लिए Kamada Ekadashi का व्रत किया जाता हैं. साधक इस दिन व्रत रखकर व्रत कथा सुनने से समस्त पापों से छुटकारा पा सकता हैं. कामदा एकादशी 2019 की डेट 15 अप्रैल हैं यह चैत्र शुक्ल एकादशी के दिन रखा जाने वाला महत्वपूर्ण व्रत हैं. आज हम इस व्रत कथा महत्व पूजा विधि आदि जानेगे.

Kamada Ekadashi Story In Hindi

Kamada Ekadashi Story In Hindi

Kamada Ekadashi Story Vrat Katha in Hindi, Vrat Vidhi, Pujan Vidhi, Kamada Ekadashi mahtva Ki Kahani: चैत्र महीने की शुक्ल एकादशी को कामदा या फलदा एकादशी के नाम से जाना जाता हैं. धर्मराज युधिष्ठिर द्वारा श्रीकृष्ण से इस एकादशी का उपाय पूछने पर वो इसकी कथा एवं महत्व बताते हैं. जिस तरह लकड़ी को अग्नि जलाकर राख कर देती हैं उसी तरह एकादशी के पुण्य से व्यक्ति के समस्त पाप दूर हो जाते हैं. विधि विधान के अनुसार व्रत रखने से साधक को प्रेम योनि से मुक्त हो जाता हैं तथा मोक्ष की प्राप्ति होती हैं.

Kamada Ekadashi Vrat Katha

कथा- प्राचीन काल में नागलोक में राजा पुंडरिक राज्य करता था. उस विलासी की सभा में अप्सराएं, किन्नर, गन्धर्व नृत्य किया करते थे. एक बार ललित नाम गन्धर्व जब उसकी राज सभा में नृत्य गान कर रहा था, सहसा उसे अपनी सुन्दरी की याद आ गई.

जिसके कारण उसके नृत्य, गीत लय वादिता में अरोचकता आ गई. कक्रत नामक नाग यह बात जान गया तथा राजा से कहा सुनाया. इस पर क्रोधातुर होकर पुंडरिक नागराज ने ललित को राक्षस हो जाने का शाप दे दिया, ललित सहस्त्रों वर्ष तक राक्षस योनि में अनेकों लोकों में घूमता रहा.

इतना ही नहीं उसकी सहधर्मिणी ललित भी उन्मत वेश में उसी का अनुसरण करती रही. एक समय वे दोनों शापित दम्पति विध्यांचल पर्वत के शिखर पर स्थित ऋषयमूक नामक मुनि के आश्रम में पहुचे और उनकी करुण संवेदनशील स्थिति देखकर मुनि को दया आ गई.

और उन्होंने चैत्र शुक्लपक्ष की कामदा एकादशी व्रत करने का आदेश दिया. मुनि के बताएं गये नियमों का इन लोगों न्र पालन किया तथा एकादशी के प्रभाव से इनका शाप मिट गया. दिव्य शरीर को प्राप्त कर वे दोनों स्वर्ग लोक को गये.

कामदा एकादशी व्रत विधि (Kamada Ekadashi Vrat Vidhi in Hindi)

कामदा एकादशी के दिन भगवान विष्णु जी की पूजा की जाती हैं. ग्रंथों के अनुसार इस दिन साधक को जल्दी उठकर व्रत रखने का संकल्प करना चाहिए तथा इसके बाद फल, फूल, दूध, पंचामृत, तिल के साथ भगवान विष्णु की पूजा अर्चना के साथ व्रत की शुरुआत की जाती हैं. भक्त को व्रत रखने के साथ ही कामदा की रात्रि को सोना नहीं चाहिए, उसे रात भर भजन कीर्तन प्रभु की भक्ति में बिताने के बाद अगले दिन पारण के मुहूर्त में ब्राह्मण को भोजन कराकर दान दक्षिणा देकर उपवास खोलना चाहिए.

चैत्र माह की अमावस्या तिथि को हिन्दू वर्ष सम्वत का अंतिम दिन होता हैं इसके अगले दिन से हिन्दू नववर्ष का आगाज हो जाता हैं. नव सम्वत के साथ दुर्गा के चैत्र नवरात्रे होते हैं तथा शुक्ल पक्ष की एकादशी को समस्त कामनाओं की पूर्ति के लिए किया जाने वाला कामदा एकादशी व्रत कहलाता हैं.

ज्योतिषियों का मानना हैं कि इस दिन भगवान श्रीकृष्ण का पूजन किया जाना चाहिए. एकादशी के दिन निर्धनों को दान देने का विशेष महत्व हैं. मान्यता हैं कि व्रत के एक दिन पहले मुंग एवं गेहूं धान का भोजन करके ईश्वर का स्मरण करना चाहिए. अगले दिन सवेरे जल्दी उठकर निवृत होने के बाद भगवान की पूजा अर्चना करे. रात को ईश्वर की प्रतिमा स्थापित कर जागरण किया जाना चाहिए. कामदा के व्रत का समापन अगले दिन द्वादशी तिथि को होता हैं. इस व्रत के दौरान साधक को नमक का सेवन बिलकुल नहीं करना चाहिए, विधि पूर्वक कामदा एकादशी का व्रत रखने से भक्त की समस्त इच्छाएं पूरी हो जाती हैं.

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