Kamika Ekadashi Vrat Katha Dates | कामिका एकादशी

Kamika Ekadashi hindu calendar के मुताबिक प्रत्येक बारह महीने में 24 ekadashi निश्चित होती हैं, मगर कभी किसी तिथि के टूटने अथवा दो होने की स्थति में एकादशियो की संख्या चौबीस से बढ़कर 25 अथवा 26 भी हो जाती हैं. शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष की इन एकादशी के दिन को एक पर्व की भांति मनाने का रिवाज हैं, जिनके पीछे एक धार्मिक कथा जुड़ी होती हैं. साथ ही इन तीज त्योहारों को मानने के विशेष नियमो और विधियों का प्रावधान होता हैं. सावन महीने की ग्यारहवीं तिथि जिन्हें कामिका एकादशी कहा जाता हैं. इस दिन व्रत रखने से वर्तमान और पिछले जीवन में किये गये कुकर्मो जिनमे ब्रहाहत्या और भूर्ण हत्या भी सम्मलित हैं. कामिका एकादशी के दिन व्रत रखकर दान पूर्णय करने से समस्त पापों का नाश होता हैं.

Kamika Ekadashi Vrat Katha

कामिका एकादशी की व्रत कथा सुदीप मुनि और युधिष्टर से जुड़ी हुई हैं. जब युधिष्टर मुनि से पूछते हैं- महामुनि समस्त महापापों का नाश करने वाली, मनोइच्छा पूरी करने वाली, पुत्र प्राप्ति की कामना को पूरी करने वाली कामिका एकादशी की व्रत कथा क्या हैं.

इसका महात्म्य क्या हैं, इसकी विधि क्या हैं. तब सुदीप मुनि आगे कहते हैं.

हे धर्मराज युधिष्ठिर – मनुष्य को जो सुख पूर्णय संतान प्राप्ति, मोक्ष, पापों से छुटकारा जीवन भर दान पुण्य करने से मिलता हैं, उतना ही पुण्य सुख एश्वर्य कामिका एकादशी का व्रत धारण करने, पूर्ण विधि विधान और ब्राह्मणों को भोजन कराकर उन्हें दक्षिणा देने से प्राप्त हो जाता हैं.आगे सुनो- कामिका एकादशी के दिन भगवान श्री विष्णु जी की आरती दीप दान कर तुलसी के पत्ते चढाने से वो पुण्य मिल जाता हैं, जो लाखों करोड़ो के हीरे जवाहरात दान करने से भी नही मिलता हैं. प्रत्येक मानुष को यह एकादशी का व्रत करना चाहिए.

ऐसा करने से उनकी सारी मनोइच्छा पूरी हो जाती हैं.

मुनिवर आगे कहते हैं, इस कामिका एकादशी व्रत को करने से प्रत्येक स्त्री पुरुष को वह सब कुछ प्राप्त हो जाता हैं, जो वे दिल से चाहते हैं. इस संसार में सुख और एश्वर्य की प्राप्ति के साथ ही जीवन लीला की समाप्ति पर उनके लिए मोक्ष के द्वार खुले रहते हैं. हे वत्स इसीलिए इस एकादशी को कामिका या पवित्रा एकादशी कहा जाता हैं, क्युकि यह बड़े से बड़े पापों से मुक्ति देने वाली, सन्तान सुख की प्राप्ति देने वाली और मृत्यु के बाद मोक्ष की राह बताने वाली हैं.

Kamika Ekadashi Puja Vidhi-Vidhan

सावन महीने की ग्यारस का व्रत धारण करें. सुबह उठने के पश्तात अपने नित्य कर्मो से निवर्त होने के बाद स्नानादि कर लेवे. अब पूर्व दिशा की ओर अपना मुख कर स्वच्छ स्थान को पूजा स्थल बनाए. भगवान विष्णु जी को स्वच्छ जल, दूध दही और पंचामृत से स्नान कराए. अब विष्णु जी की प्रतिमा को पोछकर उन्हें चन्दन का टिका लगाए.

कामिका एकादशी पूजन विधि के अनुसार गन्ध, पुष्प, दीपक और नारियल चढ़ाए.

अब कपूर और दीपक के साथ विष्णु प्रतिमा की आरती मंत्रोचार के साथ उतारे.

मेवे मिष्ठान का भोग भगवान् को लगाकर इसे सभी भक्तो में वितरित कर देवे. एकादशी पूजा पाठ के पश्तात ब्राह्मणों को भोजन करवाए. उन्हें दान देकर विदा करे.

स्वय पूरा दिन फलाहार के अलावा कुछ भी ग्रहण ना करे.

भगवान् विष्णु के ध्यान में पूरा दिन व्यतीत करे. इस कामिका एकादशी के दिन कुकर्मो चोरी, हिंसा, झूट बोलने से बचकर रहे.

Kamika Ekadashi Importance

कामिका एकादशी का दिन सभी पापों से मुक्ति सदाचार पूर्ण जीवन जीने और सम्पूर्ण कष्ट पीड़ा नाशक समझी जाती हैं,

इस दिन को अपने आराध्य देव की सच्ची भक्ति में व्यतीत करने से भगवान् को संतुष्टि प्राप्त होती हैं,

इस दिन विशेषकर तुलसी के पतों को पूजा सामग्री में शामिल किये जाने पर सभी पापों और कष्ट पीड़ा का नाश होता हैं.जो पुण्य हमें केदारनाथ और कुरुक्षेत्र के संध्या के बाद के दान में प्राप्त होता हैं, उतना ही पुण्य इस एकदशी का व्रत कर लेने से प्राप्त होता हैं विष्णु जी की श्रद्धा भाव से पूजा करने पर जीवन की सारी उलझने बिगड़े काम पितरों के दुःख और मृत्यु के बादमिलने वाली यातना से बचा जा सकता हैं.

कामिका एकादशी के व्रत में विष्णुजी की पूजा करने से सारे गन्धर्व, देवता,नांग और पितृ प्रसन्न हो जाते हैं.

इस व्रत की पावन कथा सुनने से एक धार्मिक यज्ञ के बराबर पुण्य की प्राप्ति होती हैं.

Kamika Ekadashi 2017 Time Date

Kamika Ekadashi इस वर्ष 20 जुलाई को हैं तिथियों के घटने बढ़ने की वजह से कई कैलेंडर में इनकी अलग-अलग तिथियों हो सकती हैं यदि 20 को एकादशी माने तो 19 की शाम के बाद ही एकादशी का व्रत सूर्योदय के साथ ही शुरू हो जाता हैं जो सूर्यास्त तक चलता हैं कुछ लोग इसे द्वाद्श की सुबह व्रत तोड़ना शुभ समझते हैं और ये अच्छा समय भी हैं.

कई बार Kamika Ekadashi का उपवास दो दिनों तक भी चलता हैं.

पहले दिन स्वस्थ सभी सदस्य इस व्रत को धारण कर सकते हैं, जबकि एकादशी का दूसरा दिन वैकल्पिक हैं Ekadashi Tithi में व्रत रखने का शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं- 19 जुलाई 7 बजकर 25 मिनट से 20 जुलाई शाम 4 बजकर 27 मिनट.

Kamika Ekadashi यह लेख आपकों कैसा लगा ?

Leave a Reply