कामिका एकादशी व्रत कथा विधि | Kamika Ekadashi Vrat Katha In Hindi

Kamika Ekadashi Vrat Katha:- कामिका या कामदा एकादशी का हिन्दू धर्म के तीज त्योहारों में महत्वपूर्ण स्थान हैं. पौराणिक महत्व के कारण इस एकादशी को पूजा एवं व्रत का विशेष महत्व हैं. कामदा एकादशी के दिन भगवान वासुदेव व विष्णु की पूजा आराधना की जाती हैं. भगवान कृष्ण ने युधिष्ठिर को सावन मास की कामदा एकादशी की व्रत कथा सुनने भर से वाजपेय यज्ञ के समान महात्म्यं हैं.

कामिका एकादशी व्रत कथा विधि | Kamika Ekadashi Vrat Katha In Hindiकामिका एकादशी व्रत कथा विधि | Kamika Ekadashi Vrat Katha In Hindi

यह सावन कृष्ण एकादशी को मनाई जाती हैं. इसे पवित्रा के नाम से पुकारा जाता हैं. प्रातः स्नानादि से निवृत हो भगवान विष्णु की प्रतिमा को पंचामृत में स्नान कराके भोग लगाना चाहिए. आचमन के पश्चात् धूप, दीप, चंदन आदि सुगन्धित पदार्थों से आरती उतारनी चाहिए.

Kamika Ekadashi Vrat Katha

कामिका एकादशी व्रत कथा- प्राचीन काल में किसी गाँव में एक ठाकुर रहते थे. क्रोधी ठाकुर की एक ब्राह्मण से भिडंत हो गईं. परिणामस्वरूप वह ब्राह्मण मारा गया. इस पर उन्हें उसकी तेरहवी करनी चाही. मगर सब ब्राह्मणों ने भोजन करने से इनकार कर दिया.

तब उस ठाकुर ने सभी ब्राह्मणों से निवेदन किया कि, भगवान् ! मेरा पाप कैसे दूर हो सकता हैं?. इस प्रार्थना पर उन सबने कामिका एकादशी व्रत करने की आज्ञा दी. ठाकुर ने वैसा ही किया. रात्रि में भगवान की मूर्ति के पास गया जब वह शयन कर रहा था. तभी एक स्वप्नं हुआ.

स्वप्न में भगवान ने कहा- हे ठाकुर, तेरा पाप सब दूर हो गया. अब तू ब्राह्मण की तेरहवी कर सकता हैं. तेरे घर का सूतक नष्ट हो गया हैं. ठाकुर तेरहवीं करके ब्रह्महत्या के पाप से मुक्त हो विष्णु लोक गया.

Kamika Ekadashi Vrat Katha Story- 2

एक बार जब धर्मराज युधिष्ठर कृष्ण से श्रावण माह की कृष्ण एकादशी का नाम व व्रत कथा का महात्म्य जानने की इच्छा से निवेदन करते हैं. इस पर श्रीकृष्ण कहते हैं. हे पार्थ, श्रावण माह की इस एकादशी का नाम कामिका एकादशी हैं, इसकी कथा स्वयं ब्रह्मादेव ने देवऋषि नारद को बतलाई थी, वही मैं आपकों बता रहा हूँ.

नारद जी ने ब्रह्मा जी से पूछा- प्रभु श्रावण एकादशी का क्या नाम हैं इसकी व्रत कथा व महत्व को कृपा करके बताइए. इस पर ब्रह्मदेव कहते हैं. हे नारद आपने लोकहित का एक महत्वपूर्ण सवाल किया हैं. श्रावण माह की कृष्ण एकादशी को कामिका एकादशी कहा जाता हैं. इस दिन मनुष्य को व्रत रखकर व्रत कथा सुनने से वाजपेय यज्ञ के समान पूण्य की प्राप्ति होती हैं. इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती हैं, कामिका एकादशी की पूजा से जो फल मिलता हैं, उसका वर्णन मैं आपकों सुनाता हूँ.

इस एकादशी को विष्णु जी की पूजा करने से गंगा तथा पुष्कर स्नान के समान महात्म्य हैं. इस दिन के पुण्य के बारे में आगे बताते हैं, कि चन्द्र व सूर्य के ग्रहण में काशी स्नान, पृथ्वी का दान, सिंह राशि के ब्रहस्पति में गंडकी तथा गोदावरी नदियों में स्नान करने से जिस पुण्य की प्राप्ति होती हैं, उससे अधिक कामिका एकादशी के दिन विष्णु की पूजा करने से फल प्राप्त होता हैं.

इस दिन विष्णु का पूजन करने से 33 करोड़ देवी देवताओं के अतिरिक्त सूर्य तथा गन्धर्वों का पूजन भी हो जाता हैं. इंसान को अपने पाप धोने के लिए कामिका से अच्छा कोई विकल्प नही हैं. इस दिन पापों तथा कष्टों से छुटकारा पाने की इच्छा रखने वाले सभी स्त्री पुरुषों को यह व्रत रखकर विष्णु पूजन करना चाहिए.

कामिका एकादशी का महत्व

हिन्दू धर्म की मान्यता के अनुसार स्वर्ण तथा भूमि इन दोनों दानों को सभी दान से श्रेष्ट माना जाता हैं. ग्रंथों के अनुसार अगली योनी में जन्म मिलने पर मनुष्य को अच्छे परिवार, जिसमें अतुल सुख संपदा हो जन्म मिलता हैं. पद्पुरान में आगे कहा गया हैं, कि जो व्यक्ति इन दोनों को नही कर सकता, उन्हें श्रावण माह की कृष्ण एकादशी (कामिका) के दिन व्रत रखना चाहिए.

इस दिन व्रत रखने से भूमि दान के समान पुण्य की प्राप्ति होती हैं. इंसान को आगामी लोक में अच्छा स्थान पाने तथा सभी पापों के नाश के लिए इस दिन व्रत रखकर विष्णु की पूजा करनी चाहिए.

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