कन्या भ्रूण हत्या पर निबंध | Kanya Bhrun Hatya Essay In Hindi

Kanya Bhrun Hatya Essay In Hindi:-प्रकृति के निर्माण के समय ईश्वर द्वारा एक स्वभाविक संतुलन की स्थति दी, मगर  मानव ने अपने स्वार्थ के कारण इस संतुलन को बिगाड़ने  प्रयत्न किया हैं. एक तरफ प्रकृति का अतिशय दोहन हुआ हैं, तो वही स्त्री अथवा कन्या भ्रूण हत्या (Female Foeticide) के कारण स्त्री पुरुष लिंगानुपात को गिराने का कार्य किया हैं. कन्या भ्रूण हत्या पर निबंध में इस सामाजिक अपराध का अर्थ, परिभाषा, प्रभाव, कारण, इसे रोकने के कानून व उपाय तथा कन्या/स्त्री भ्रूण हत्या पर कविता, भाषण की जानकारी यहाँ दी गईं हैं.

कन्या भ्रूण हत्या पर निबंध | Kanya Bhrun Hatya Essayकन्या भ्रूण हत्या पर निबंध | Kanya Bhrun Hatya Essay In Hindi

Female Foeticide Essay- हाल ही के कई दशकों में स्त्री पुरुष लिंगानुपात में आई बड़ी गिरावट का सबसे अहम कारण कन्या भ्रूण हत्या ही हैं. आधुनिक तकनीक के कारण आज गर्भ में पल रहे शिशु का लिंग जांच करवाना आसान हो गया हैं. दुनिया में आने से पूर्व शिशु के लिंग परिक्षण के बाद मादा भ्रूण होने की स्थति में उसे माँ के गर्भ में ही खत्म कर देना, कन्या भ्रूण हत्या कहलाता हैं.

कन्या भ्रूण हत्या आज एक ऐसी अमानवीय समस्या का रूप धारण कर चुकी हैं, जो कई और गंभीर समस्याओं की जड़ हैं. इसके कारण महिलाओं की संख्या दिन ब दिन घट रही हैं. 1901 में प्रति एक हजार पुरुषों पर 972 स्त्रियाँ थी, 1991 में महिलाओं की संख्या घटकर 927 को गईं.

सन 1991 से 2001 के मध्य महिलाओं की संख्या में वृद्धि दर्ज की गईं, जिसके फलस्वरूप प्रति हजार पुरुषों पर महिलाओं की संख्या बढ़कर 940 हो गईं. सामाजिक संतुलन के दृष्टिकोण से देखे तो यह वृद्धि पर्याप्त नही हैं. भारत के कुछ राज्यों में यह अनुपात बहुत कम हैं.

दिल्ली हरियाणा, पंजाब जैसे कुछ राज्यों में प्रति हजार पुरुषों पर स्त्रियों की संख्या 900 से भी कम हैं. केरल एक ऐसा राज्य हैं, जहाँ प्रति एक हजार पुरुषों के मुकाबले स्त्रियों की संख्या एक हजार से अधिक, 1058 हैं.

कन्या भ्रूण हत्या के कारण (kanya bhrun hatya ke karan)

भारत में कन्या भ्रूण हत्या के कई कारण हैं. प्राचीन काल में भारत में महिलाओं को पुरुषों के समान शिक्षा के अवसर उपलब्ध थे, किन्तु विदेशी आक्रमणों एवं अन्य कारणों से महिलाओं को शिक्षा प्राप्त करने से वंचित किया जाने लगा एवं समाज में पर्दा प्रथा, सती प्रथा जैसी कुप्रथाएं प्रारम्भ हो गईं.

महिलाओं को शिक्षा के समान अवसर नही मिलने का कुप्रभाव समाज पर भी पड़ा. लोग महिलाओं को अपने सम्मान का प्रतीक समझने लगे. सामाजिक एवं धार्मिक रूप से पुरुषों को अधिक महत्व दिया जाने लगा तथा महिलाओं को घर तक ही सिमित कर दिया गया. इसके कारण सन्तान के रूप में नर शिशु की कामना की गलत परम्परा शुरू हुई.

सन्तान प्राप्ति की प्रक्रिया में गर्भधारण महिलाओं को ही करना पड़ता हैं. युवावस्था में प्रेम के फलस्वरूप गर्भ धारण को हमारा समाज पाप मानता हैं, जिस परिवार की किशोरी ऐसा करती हैं, समाज में उसकी निंदा की जाती हैं. इसके अतिरिक्त यौन संबंध बनाने की स्थति में महिला की ही निंदा अधिक की जाती हैं, इसे समाज ने प्रतिष्ठा का प्रश्न बना दिया हैं.

इन्ही कारणों से लोग चाहते हैं, कि भविष्य में अपनी प्रतिष्ठा को ठेस पहुचने की आशंका से बचने के लिए वे सिर्फ नर शिशु को ही जन्म दे. कोई भी महिला अपनी गर्भस्थ सन्तान को मारना नही चाहती हैं, भले ही वह कन्या शिशु ही क्यों न हो, लेकिन परिजन विभिन्न कारणों से उसे कन्या भ्रूण हत्या करवाने के लिए बाध्य करते हैं.

कन्या भ्रूण हत्या का एक बड़ा कारण दहेज़ प्रथा भी हैं. लोग लड़कियों को पराया धन समझते हैं और उनकी शादी के लिए दहेज़ की व्यवस्था करनी पड़ती हैं. दहेज़ जमा करने के लिए कई परिवारों का कर्ज लेना पड़ता हैं. इसलिए भविष्य में इस प्रकार की समस्याओं से बचने के लिए लोग गर्भावस्था में ही लिंग परीक्षण करवा कर कन्या भ्रूण होने की स्थति में उनकी हत्या करवा देते हैं.

कन्या भ्रूण हत्या के उद्देश्य (female foeticide/ infanticide essay in India)

हमारे समाज में महिलाओं से अधिक पुरुषों को महत्व दिया जाता हैं. पहले महिलाएं पूरी तरह से पुरुषों पर हर कार्य के लिए निभर हुआ करती थी. परिवार में पुरुष सदस्य ही परिवार के भरन पोषण के लिए अर्थोपार्जन का कार्य करता था. अभी भी कामकाजी महिलाओं की संख्या बहुत कम हैं, उन्हें सिर्फ घर के काम-काज तक सिमित रखा जाता हैं.

संविधान द्वारा महिलाओं को समान अधिकार दिए जाने के बाद भी उनके प्रति सामाजिक भेदभाव में कमी नही हुई हैं. इसलिए परिवार के लोग भविष्य में परिवार की देखभाल करने वाले के रूप में नर शिशु की कामना करते हैं. भारतीय समाज में यह अवधारणा रही हैं, कि वंश पुरुष से ही चलता हैं, महिला से नही. इसलिए सभी लोग वंश परम्परा को कायम रखने के लिए नर शिशु की चाह रखते हैं व उन्हें महिला शिशु की तुलना में अधिक लाड़ प्यार देते हैं.

कन्या भ्रूण हत्या की समस्या एवं रोकने के उपाय

किसी भी देश की प्रगति तब तक संभव नही हैं, जब तक वहां कि महिलाओं को प्रगति के पर्याप्त अवसर न मिले. जिस देश में महिलाओं का अभाव हो, उसके विकास की कल्पना कैसे की जा सकती हैं. साक्षर महिला ही अपने अधिकारों की रक्षा कर पाने में सक्षम होती हैं.

कन्या भ्रूण हत्या पर नियंत्रण कर इसे पूरी तरह समाप्त कर देने में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होगी. इसलिए हमे महिला शिक्षा पर विशेष ध्यान देना होगा. महिला परिवार की धुरी होती हैं. समाज के विकास के लिए योग्य माताओं, गृहणियों तथा पत्नियों के रूप में पर्याप्त महिलाओं का होना आवश्यक हैं. यदि महिलाओं की संख्या में कमी होती रही तो सामाजिक संतुलन बिगड़ जाएगा एवं समाज में बलात्कार, व्याभिचार आदि कुरीतियों में वृद्धि होने लगेगी.

कन्या भ्रूण हत्या पर कानून

भारत में कन्या भ्रूण हत्या को कानूनन अपराध घोषित कर दिया गया हैं. इसके बावजूद भी कन्या भ्रूण हत्या पर पूर्ण नियंत्रण नही हो पाया हैं. लोग चोरी छिपे एवं पैसे के बल पर इस कुकृत्य को भी अंजाम दे देते हैं. कन्या भ्रूण हत्या एक सामाजिक अभिशाप हैं और इसे रोकने के लिए हम लोगो को जागरूक होना होगा, जब तक कि उसे जनता का सहयोग न मिले.

जनता के सहयोग से ही किसी भी अपराध को रोका जा सकता हैं. कन्या भ्रूण हत्या एक ऐसा अपराध हैं, जिसमें परिवार एवं समाज के लोगों की भागीदारी होती हैं. इसलिए जागरूक नागरिक ही इस कुकृत्य को खत्म करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं.

सरकारी एवं गैर सरकारी संगठन समाज के इस कलंक को मिटाने के लिए कार्यरत हैं. इस कार्य में मिडिया भी सशक्त भूमिका निभा रहा हैं. आवश्यकता बस इस बात कि हैं कि जनता अपने कर्तव्यों को समझते हए कन्या भ्रूण हत्या जैसे सामाजिक कलंक को मिटाने में समाज का सहयोग करे.

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