करत करत अभ्यास ते जड़मति होत सुजान | Karat Karat Abhyas Ke Jadmati Hot Sujan Essay In Hindi

Karat Karat Abhyas Ke Jadmati Hot Sujan Essay In Hindi मनुष्य स्रष्टि का श्रेष्टतम प्राणी है उसकी श्रेष्टता का आधार पर ही सर्जन कर सकता है. अपनी बुद्दी के बल के आधार पर ही स्रजन करता है. स्रजन के लिए अभ्यास की आवश्यकता होती है.निरंतर अभ्यास से सर्जन की उन बारीकियों को छू लेता है जिनसे वह संसार में अपना नाम उजगार कर लेता है. चाहे भौतिक स्रजन हो या बौद्धिक सर्जन, स्रजन के बिना अभ्यास के संभव नही है. अतः मनुष्य को किसी जीवन के किसी क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए निरंतर अभ्यास करने की जरुरत पडती है.

करत करत अभ्यास ते जड़मति होत सुजान | Karat Karat Abhyas Ke Jadmati Hot Sujan Essay In Hindi

एक उक्ति कवि वृन्द द्वारा लिखित दोहे के रूप में इस प्रकार है.
करत करत अभ्यास के जडमति होत सुजान
रसरी आवत जात ते, सिल पर होत निशान

इसका अर्थ यह होता है कि निरंतर अभ्यास करने से जडमति बुद्धि भी सुजान बन जाती है. जिस प्रकार कुँए के पत्थर पर बारी बारी से रस्सी खीचने से निशान पड़ जाते है. अर्थात बार बार अभ्यास करने से मुर्ख व्यक्ति भी बुद्धिमान हो सकता है. इस दोहे के माध्यम से कवि ने अभ्यास के महत्व पर बल दिया है. यह अनुभव कथन मानव के लिए उस मन्त्र के समान है. जो असफलता को सफलता में और निराशा को आशा में बदल देता है.

अभ्यास का महत्व (importance of practice)

अभ्यास का जीवन में बड़ा महत्व है अभ्यास से अनजान भी सुजान बन सकता है. माँ की कोख से जन्म लेने वाला बालक अबोध अनजान होता है. धीरे धीरे जगत की पहर पर चलते रगड़ते वह बुद्धिमान और सबल बन जाता है. इतिहास में अनेक ऐसे उदहारण है जिन्होंने अभ्यास के बल पर ही अपने जीवन में सफलता प्राप्त की. लार्ड डिजरायली के सम्बन्ध में एक कथा प्रचलित है. जब वे ब्रिटिश संसद में बोलने के लिए पहली बार खड़े हुए तो सम्बोधन के अलावा कुछ नही बोल सके.

तब उन्हें बहुत संकोच हुआ और उन्होंने मन ही मन अच्छा वक्ता बनने का निश्चय किया, और जंगल में जाकर पेड़ पौधों के सामने बोलने लगे. जब वे दूसरी बार संसद में बोले तो उसका भाषण सुनकर सभी संसद सदस्य आश्चर्यचकित रह गये.

रॉबर्ट ब्रूस और स्पाइडर द्वारा बच्चों के लिए प्रसिद्ध स्कॉटिश स्टोरी

इसी प्रकार रोबर्ट ब्रूस जिसकी युद्ध में निरंतर पराजय हो रही थी. वह गुफा में छिपकर बैठ गया. वहां उसने एक मकड़ी को बार बार चढ़ने का अभ्यास करते हुए देखा सातवीं बार वह मकड़ी अपने अभ्यास में सफल हुई. इस अभ्यास रूपी घटना से रोबर्ट ब्रूस इतना उत्साहित हुआ कि कि उसने एक बार फिर युद्ध करने का निश्चय किया और सफलता प्राप्त की. प्रसिद्ध हॉकी खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद की हॉकी की जादू विश्व भर में प्रसिद्ध है.

वे निरंतर अभ्यास के कारण हॉकी के जादूगर कहलाये. तानसेन जैसे संगीतकार का निरंतर अभ्यास करके ही दीपक राग गा सके और बैजू बावरा मल्हार आलाप सके. इसकी प्रकार महेश भूपति, लिएंडर पेश, सचिन तेंदुलकर और अभिनव बिंद्रा अपने अपने क्षेत्र में अभ्यास करके ही श्रेष्ट खिलाड़ी बन सके.

विद्यार्थी जीवन में अभ्यास का महत्व (Importance of practice in student life)

यह सत्य है कि अभ्यास ही सफलता की कुंजी है. जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने के लिए निरंतर अभ्यास करते रहना आवश्यक है. अभ्यास से ही कार्य में सफलता मिलती है. इतिहास इस बात का साक्षी है.

द्रोणाचार्य द्वारा एकलव्य को धनुष विद्या न सिखाने के बावजूद उसने द्रोणाचार्य की मूर्ति के सामने निरंतर अभ्यास किया. परिणामत वह अर्जुन जैसा कुशल धनुर्धर बन गया.

अभ्यास अच्छाई और बुराई दोनों का साधन होता है. अच्छे अभ्यास से जीवन संवर जाता है और बुरे अभ्यास से जीवन नरक बन जाता है. इसलिए हमे जागरूक रहकर बुरे अभ्यास से बचने का प्रयत्न करना चाहिए. निरंतर अच्छा अभ्यास करने वाला व्यक्ति जीवन में यश, धन और सुख प्राप्ति करता है.

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