करवा चौथ व्रत की कहानी | Karwa Chauth Ki Katha Kahani

Karwa Chauth Ki Katha Kahani सुख मंगल और अपने पति की लम्बी आयु की दुआ के लिए सुहागन स्त्रियों द्वारा करवाचौथ का व्रत रखा जाता है. करवा चौथ की कथा कहानी में लोगों के विशवास और धारणा को लेकर अलग-अलग क्षेत्रों में भिन्न भिन्न विशवास है. मुख्य रूप से सात भाइयो और बहिन, कृष्ण द्रोपदी, सत्यवान-सावित्री और करवा नामक स्त्री की कथाओं को सर्वमान्य माना जाता है. इस दिन प्रत्येक पतिव्रता स्त्री अपने पति के लिए व्रत रखती है. पूजा मुहूर्त के अनुसार उन्हें करवा चौथ कहानी का पाठ करना चाहिए जिससे उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है. जो कथा इस प्रकार है.

करवा चौथ व्रत की कहानी | Karwa Chauth Ki Katha Kahani

करवा चौथ कहानी 1

एक समय की बात है जब निलगिरी पर्वत पर पांडव पुत्र अर्जुन तपस्या करने गये. उस समय पाडवों पर गहरा संकट आ पड़ा. तब चिंतित व शोककुल द्रोपदी ने भगवान श्रीकृष्ण का ध्यान किया. कृष्ण के दर्शन होने पर द्रोपदी ने पांड्वो के कष्ट के निवारण के उपाय जाने.

तब श्री कृष्ण बोले- हे द्रोपदी में तुम्हारे दुःख का कारण जानता हु. इसके निवारण के लिए तुम्हे एक उपाय करना होगा. जल्द ही कार्तिक महीने की कृष्ण चतुर्थी आने वाली है. उस दिन तुम मन से करवा चौथ का व्रत करना, भगवान शिव पार्वती और गणेश की उपासना करना. तुम्हारे सारे कष्ट दूर हो जाएगे और सब कुछ ठीक हो जाएगा.

कृष्ण की आज्ञा के अनुसार द्रोपदी ने वैसा ही किया. जल्द ही उनकी सारी इच्छाए पूर्ण हुई तथा उनके पति के दर्शन हो गये.

करवा चौथ कहानी 2

जब पार्वती ने भगवान् शिव से अपने पति की दीर्घायु और सुख सम्रद्धि की विधि पूछी तो तब भगवान् शिव ने करवा चौथ की व्रत कथा सुनाई.करवा चौथ व्रत कथा के अनुसार एक धोबिन अपने पति के साथ तुगभद्रा नदी के तट पर रहा करती थी. उसका पति बुढा व् निर्बल था.

एक दिन जब वह नदी के किनारे कपड़े धो रहा था तो वहां पर एक मगरमच्छ आया और धोबी के पैरो को अपने मुह में दबाकर यमलोक की ओर ले जाने लगा. तब धोबी को कुछ नही सुझा वह करवा करवा चिल्लाने लगा.

जब उसकी पत्नी करवा ने अपने पति की आवाज सुनी तो वह नदी की ओर गई तथा उस मगरमच्छ को सूत के धागे से बांधकर यमराज के सामने ले जाकर कहने लगी.

यमराज आप ही मेरे पति की रक्षा कीजिए तथा इस मगर को इस कृत्य के लिए कठिन से कठिन सजा दीजिए.
तथा इसे नरक पंहुचा दीजिए.

यमराज बोले करवा अभी तक इसकी आयु पूर्ण नही हुई है, इससे पूर्व में इसे नही मार सकता. तब करवा ने कहा यदि आप मेरे पति की रक्षा करने के लिए ऐसा नही करेगे तो मै आपकों श्राप दे दुगी.

इस तरह करवा के साहस को देखकर यमराज ने डर से उस मगर को यमलोक भेज दिया तथा करवा के पति को दीर्घायु होने का आशीर्वाद दे दिया. तब से कार्तिक कृष्ण माह की चतुर्थी को करवा चौथ मनाने का चलन शुरू हुआ.

करवा चौथ कहानी 3

प्राचीन समय में काशी में एक ब्राह्मण परिवार रहा करता था. उस परिवार में सात भाई और एक बहिन थी. सात भाइयो की एक बहिन होने के कारण सभी लोग उन्हें अपने दिल का टुकड़ा मानते थे. बहिन रूपा की शादी के बाद वह ससुराल चली गई. कुछ दिन तक वह ससुराल में रहने के बाद अपने मायके लौटी थी.

सभी भाई और उनकी पत्नियां घर पर थी. इधर उधर का हालचाल जानने के बाद उन्होंने रूपा को खाने के लिए कहा मगर उन्होंने करवा चौथ का निर्जला व्रत का कहकर खाने के लिए मना कर दिया.

दिन ढलने के साथ ही सभी भाई अपनी बहिन की उतरी दशा देखकर चिंतित थे. वह किसी भी हालत में करवा चौथ का व्रत चाँद के दर्शन के पूर्व नही तोड़ सकती थी. अतः उनके सबसे छोटे भाई को एक तकरीब सूझी और वह घर से थोड़ी ही दूर खड़े एक घने वृक्ष पर दीपक रखकर उसके उपर छलनी रख आया. घर आकर उन्होंने रूपा को चन्द्र दर्शन का झांसा देकर उपवास तोड़ने को कहा. जब रूप ने छत पर जाकर देखा तो छलनी के पार वह दीपक चाँद सा नजर आ रहा था. उन्हें इस झांसे का पता नही था. अतः उन्होंने भोजन करने की हामी भर दी.

जब वह भोजन करने बैठी तो उनके पहले निवाले के खाते ही उनके छिक आई.

जब वह अगला निवाला मुह में डालती है तो सिर का बाल आ जाता है. जब उसने तीसरा निवाला मुह में डाला ही था कि उन्हें अपने पति की मृत्यु का संदेश आ जाता है. जिसके सुनते ही वह पागलों की तरह रोने लगती है. तभी उनकी छोटी भाभी उन्हें इस अनहोनी का कारण समझाते हुए कहती है,

आपने करवा चौथ का व्रत गलत तरीके से तोडा है इस कारण गणेश जी आपसे नाराज हो गये है.

अपनी भूल का अहसास होने पर वह अपने पति का अंतिम संस्कार न करने का निर्णय ले लेती है. उस मृत शव की रोजाना कड़ी निगरानी रखती है. उसके पास उगने वाले सुई नुमा घास को इकट्ठा करती है. जब कार्तिक माह की कृष्ण चतुर्थी (करवा चौथ) का दिन आता है. इस दिन सभी भाभिया अपने पति की लम्बी आयु के लिए व्रत रखती है.

तथा आशीर्वाद लेने के लिए रूपा के पास जाती है. रूपा एक ही रट लगाए जा रही थी.

यम सुई ले लो पिय सुई दे दो. मगर सभी बड़ी भाभिया उनका तिरस्कार कर चली जाती है. अंत में सबसे छोटी भाभी उनके पास आशीर्वाद लेने आती है. जिनके कारण रूपा के पति की मृत्यु हुई थी. वह वही प्रक्रिया अपनाती है.

इस बार रूपा छोटी भाभी को जोर से पकड़ लेती है तथा पिय सुई देने का आग्रह करती है. हजारों प्रयत्न के बाद भी वह रूपा को दूर नही कर पाती है. इतने यत्न के बाद छोटी भाभी का दिल भी पसीज जाता है. तथा वह अपनी छोटी अंगुली को छिरकर रूपा के पति के मुह में अमृत की धार डालती है.

जिससे उसका पति जय श्री गणेश जय श्री गणेश करता हुआ खड़ा होता है. इस प्रकार छोटी भाभी की दया से रूपा को अपना पति मिल जाता है. हे शिव पार्वती गणेश जिस प्रकार रूपा को करवा चौथ का वर मिला है. ऐसा वर हर सौभाग्यवती स्त्री को प्राप्त हो.

प्यारे मित्रों उम्मीद करते है करवा चौथ व्रत की कहानी  का यह लेख आपकों अच्छा लगा होगा. करवा चौथ कथा के बारे में दी गई जानकारी आपकों अच्छी लगी हो तो इसे सोशल मिडिया पर अपने दोस्तों के साथ शेयर करना ना भूले.

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