Kids Story In Hindi | बुद्धिमान खरगोश की हिंदी कहानी शिक्षा सहित

Kids Story In Hindi -शीर्षक की यह बाल कहानी एक बुद्धिमान खरगोश की हैं, हमारी पाठयपुस्तको में पंचतन्त्र की कई ज्ञानवर्धक कहानियाँ दी हैं, जंगली जानवरों पर आधारित ये स्टोरी छोटे से जानवर की बुद्दिमता से किस तरह एक जंगल के सभी निवासियों की समस्या का सदा-सदा के लिए समाधान कर देता हैं, इस कहानी से हमे प्रेरणा मिलती हैं, चाहे कोई कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो उन्हें बुद्दि के बल पर पराजित किया जा सकता हैं- लीजिए शुरू करते हैं यह बच्चो के लिए शिक्षाप्रद कहानी-

Kids Story In Hindi (बुद्धिमान खरगोश )

किसी जंगल में भासुरक नाम का एक सिंह रहा करता था. वह प्रत्येक दिन वन्य जीवों को मारा करता था, वन के सभी जीव जन्तु उससे परेशान थे. एक दिन जंगल के सभी जानवर उसके पास पास पहुचे और उससे निवेदन किया- वनराज, प्रतिदिन अनेक जानवरों को मारने से आपकों क्या लाभ ? आपका आहार तो एक जीव से पूर्ण हो जाता हैं. अत: प्रतिदिन एक जीव आपके पास आ जाया करेगा, इस प्रकार बिना परिश्रम से आपका जीवन निर्वाह होता रहेगा.

और हम लोगों का सामूहिक विनाश भी नही होगा, क्युकि प्रजा पर कृपा करने वाला राजा निरंतर बढ़ोतरी प्राप्त करता हैं. सिंह उनकी बात मान गया. तब से वन्य प्राणी निर्भय होकर रहने लगे, इसी क्रम में कुछ दिनों बाद एक खरगोश की बारी आई, खरगोश सिंह की गुफा की ओर चल पड़ा.

किन्तु मृत्य के भय से उनके पैर नही उठ रहे थे, मौत की घड़ियों को कुछ समय टालने के लिए इधर-उधर भटकता रहा. एक स्थान पर उसे कुआ दिखाई दिया, उसे देखकर मन में एक विचार आया, क्यों न भासुरक को उनके वन में दुसरे सिंह के नाम से उसकी परछाई दिखाकर इस कुई में गिरा दिया जाए, यही उपाय सोचता-सोचता वह भासुरक सिंह के पास पंहुचा, सिंह उस समय भूख प्यास से व्याकुल होता हुआ, अपने होठ चाट रहा था. उसके भोजन की घड़ियाँ बीत रही थी, कुछ ही देर में कोई पशु नही आया तो वह शिकार को चल पड़ेगा. और पशुओ के खून से सारे जंगल को सींच देगा. उसी समय खरगोश उनके पास पहुच गया और प्रणाम करके बैठ गया.

Kids Story In Hindi आप hihindi.कॉम पर पढ़ रहे हैं.

खरगोश को देखकर सिंह ने क्रोध से लाल-लाल आँखे करके गरजकर कहा- ”अरे खरगोश, एक तो तू छोटा हैं और इतनी देर लगाकर आया हैं, आज तुझे मारकर कल जंगल के सारे पशुओ की जान ले लूँगा. उनके वंश का नाश कर डालूगा. खरगोश ने विनयपूर्वक सिर झुककर कहा- क्षमा करे स्वामी, आप व्यर्थ क्रोध कर रहे हैं, इसमे न मेरा अपराध हैं, न अन्य पशुओ का. कुछ फैसला करने से पूर्व मेरे देरी से आने का कारण तो जान लीजिए. शेर गुराया- जो बोलना हैं, जल्दी बोल. मै बहुत भूखा हु, कही तेरे कुछ कहने से पहले ही मै तुम्हे चबा ना जाऊ.

स्वामी ! बात यह हैं कि सभी पशुओ ने आज सभा करके और सोचकर मै बहुत छोटा हु, मुझे तथा अन्य चार खरगोशो को आपके भोजन के लिए भेजा था. हम पांच आपके पास आ रहे थे, कि मार्ग में दूसरा सिंह अपनी गुफा से निकलकर आया और बोला- अरे किधर जा रहे हो तुम सब, अपने देवता को याद कर लो, मै तुम्हे खाने आया हु. मैंने उससे कहा- हम अपने स्वामी भरासुक के पास आहार के लिए जा रहे हैं.

तब वह बोला- भासुरक कौन हैं ? क्या उसे ज्ञात नही कि यह जंगल तो मेरा हैं ? मै ही तुम्हारा राजा हू. तुम्हे जो बात कहनी हैं, मुझसे कहो. भासुरक चोर हैं, तुम में से चार खरगोश यही रह जाओ, एक खरगोश भासुरक के पास जाकर उसे बुला लाए, मै स्वय निबट लूँगा. हममे से जो बलशाली होगा, वही इस जंगल का राजा होगा.

में तो किसी तरह से उससे जान छुड़ाकर आपके पास आया हु, महाराज ! इसलिए मुझे बहुत देरी हो गयी, आगे स्वामी को जो इच्छा हो करे. यह सुनकर भासुरक बोला- ऐसा ही हैं, तो मुझे जल्दी उस दुसरे सिंह के पास ले चलो. आज मै उसका रक्त पीकर ही अपनी पास बुझाउगा, इस वन में मेरे अतिरिक्त अन्य किसी सिंह का हस्तक्षेप मुझे मंजूर नही. खरगोश ने कहा- हे स्वामी ! यह तो सत्य हैं, कि अपने स्वाभिमान के लिए युद्ध करना आप जैसे शुरविरो का काम हैं. किन्तु दूसरा सिंह अपने दुर्ग में बैठा हैं, दुर्ग से बाहर आकर उसने हमारा रास्ता रोका था.

दुर्ग में रहने वाले शत्रु पर विजय पाना कठिन हैं, दुर्ग में बैठा हुआ शत्रु सौ शत्रुओ के बराबर माना जाता हैं. दुर्गहिन् राजा और दंतहिन् राजा और मदहिन् हाथी की तरह कमजोर हो जाता हैं. उसके प्रत्युतर में भासुरक ने कहा- तेरी बात ठीक हैं, किन्तु मै उस दुर्ग में बैठे सिंह को मार डालूगा. शत्रु को जितना जल्दी हो सके नष्ट कर देना चाहिए. मुझे अपने बल पर पूरा भरोसा हैं. शीघ्र ही उसका नाश नही किया तो बाद में असाध्य रोग की तरह ताकतवर हो जाएगा.

खरगोश ने कहा- ठीक हैं, यदि स्वामी का यही निर्णय तो आप मेरे साथ चलिए. यहकहकर खरगोश भासुरक को उसी कुए के पास ले गया, जहाँ झुककर उसने अपनी परछाई देखि. वहां पहुचकर वह बोला- स्वामी मैंने कहा था वही हुआ, आपकों आता देखकर अपने दुर्ग में छिप गया हैं, आइये आपकों उसकी सूरत दिखा देता हु, ” जरुर मै उस नीच को देखकर दुर्ग में ही उससे लडुगा.

खरगोश भासुरक सिंह को कुए की मेड पर ले गया,भासुरक ने झुककर देखा तो अपनी ही परछाई दिखाई दी, उसने समझा यही दूसरा सिंह हैं. तब वह जोर से गरजा , उसकी गरज के उत्तर में कुए से दुगुनी गरज सुनाई दी, उस गूंज को दुसरे सिंह की गरज समझ कर उसी क्षण कुँए में कूद पड़ा और वही जल में डूबकर मर गया.

शिक्षा-

Kids Story In Hindi बुद्धिमान खरगोश कहानी में खरगोश ने अपनी बुद्दिमत्ता से सिंह को हरा दिया. वहां से लौटकर वह वन्य जीवों को सभा में छा गया. उसकी चतुराई जानकार और सिंह की मौत के समाचार सुनकर सभी जानवर प्रसन्नता से झूम उठे. प्लीज Kids Story In Hindi को अधिक से अधिक शेयर करे.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *