कृषि के बारे में जानकारी | Krashi Agriculture In Hindi

Krashi Agriculture In Hindi:- कृषि व्यवसाय जिन्हें खेतीबाड़ी भी कहा जाता हैं. भारत व विश्व की अधिकतर आबादी की आय का साधन कृषि ही हैं. भारतीय अर्थव्यवस्था पूर्णतया कृषि आधारित है. आधुनिक कृषि, विज्ञान व तकनीकी साधनों के प्रयोग से परम्परागत खेती से आगे जा चुकी हैं. कृषि पर निबंध में आप कृषि की परिभाषा व अर्थ समस्याएं व समाधान भारत में कृषि व्यवसाय के बारे में सामान्य जानकारी इस लेख में दी गईं हैं.

कृषि के बारे में जानकारी | Agriculture In Hindiकृषि के बारे में जानकारी | Krashi Agriculture In Hindi

आधुनिक कृषि कला, विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी का समन्वित प्रयास हैं. इसमें विज्ञान व अनुवांशिक अभियांत्रिकी के सिद्धांत पर बल मनचाहे लक्षणों वाली फसल प्राप्त करना संभव हो पाया हैं. जिससे तेजी से बढ़ती मानव की रोटी कपड़ा व अन्य आवश्यकताओं की पूर्ति हो रही है.

आधुनिक कृषि के चरण निम्न हैं.

  • उन्नत बीज– अधिक उत्पादन, रोग प्रतिरोधक क्षमता, परिपक्वता समय में एकरूपता तथा विभिन्न पर्यावरणीय परिस्थतियों में अनुकूलता बढ़ाने आदि उद्देश्यों की पूर्ति हेतु बीजों की गुणवता में सुधार किया जा रहा हैं.
  • फसलों का खनिज पोषण- फसली पादपों को भोजन बनाने व वृद्धि के लिए विभिन्न प्रकार के पोषक तत्वों की आवश्यकता होती हैं. पादप पोषक तत्व हवा, जल व मृदा से प्राप्त करते हैं. इन पोषक तत्वों की आपूर्ति हेतु मृदा में विभिन्न प्रकार की खाद व उर्वरक का उपयोग किया जाता हैं. खाद के रूप में गोबर खाद, कम्पोस्ट खाद, वर्मी कम्पोस्ट तथा हरी खाद का उपयोग किया जाता है. उर्वरक के रूप में यूरिया, डाईअमोनिया, फास्फेट, सुपर फास्फेट, अमोनियम सल्फेट व कैल्शियम अमोनियम नाइट्रेट का उपयोग किया जाता हैं.
  • खरपतवार- किसान मृदा में फसली पादपों के बीज बोता हैं, मगर मृदा में उपस्थित कई अन्य बीज भी फसल के बीजों के साथ अंकुरित होकर पौधे उत्पन्न कर देते हैं. खेतों में फसली पादपों के साथ उगे अवांछित पादपों को खरपतवार कहते हैं. फसली पादपों में खरपतवार में जल, खनिज तत्वों हेतु प्रतिस्पर्धा होती हैं, जिससे फसली पादपों को पर्याप्त जल व खनिज लवण उपलब्ध नही होते हैं. खरपतवार फसली पादपों को ढक लेती हैं. जिससे फसली पादपों को पर्याप्त सूर्य का प्रकाश ग्रहण करने में बाधा उत्पन्न होती हैं. कुछ खरपतवार जड़ों से निरोधक रसायनों का सरावन कर फसल की वृद्धि पर विपरीत प्रभाव डालती हैं. खरपतवार जीवाणु, विषाणु व रोगाणुओं का आश्रय स्थल होने से फसलों में रोग उत्पन्न होने की संभावना बढती हैं. खरपतवार नष्ट होने हेतु अतिरिक्त श्रम की आवश्यकता होने से फसल की लागत बढ़ जाती हैं. खरपतवार नियंत्रक हेतु हाथों से उखाड़कर रासायनिक व जैविक विधियों का उपयोग किया जाता हैं.
  • पादप रोग- पादप या उसके किसी भाग के असामान्य रूप से  कार्य करने की स्थति को पादप रोग कहते हैं. पादप में रोग विषाणु, जीवाणु व कवक आदि सूक्ष्म जीवों के कारण होते हैं. फसलों  में रोग नियंत्रण हेतु रोग प्रतिरोधी किस्मों का उपयोग तथा पीड़कनाशी का छिड़काव किया जाता हैं.

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