मानव शरीर के विभिन्न तंत्र | List The 11 Organ Systems Of The Human Body

human body system in Hindi मानव शरीर के विभिन्न तंत्र List The 11 Organ Systems Of The Human Body: हमारा मानव शरीर विभिन्न तंत्रों एवं अंगों से मिलकर बना है. different organ system and its function में हम मानव शरीर के तंत्र को एक एक कर पूरा विस्तार के साथ जानेगे. blood and our body in hindi में चलिए हम जानते हैं.

मानव शरीर के तंत्र  List The 11 Organ Systems Of The Human Body

मानव शरीर के तंत्र  List The 11 Organ Systems Of The Human Body

पाचन तंत्र (Digestive System)

  • सामान्य मानव की आहारनाल की लम्बाई 28-33 फीट की होती हैं.
  • आहारनाल के प्रमुख भाग मुखगुहा, ग्रासनली, आमाशय एवं आंत होती हैं.
  • दोनों जबड़ो के मध्य में स्थित गुहा को मुख गुहा कहते हैं मनुष्य के जबड़ों में ३२ दांत होते हैं.
  • मनुष्य के एक जबड़े में 4 कृतनक 2 रदनक 4 अग्रचवर्णक तथा 6 चवर्णक दांत पाए जाते हैं.
  • कृतनक सबसे आगे चपटे और धारदार होते है ये भोजन को काटने का कार्य करते हैं.
  • रदनक नुकीले होते हैं, जो भोजन को चीरते हैं.
  • अग्रचवर्णक भोजन को पीसते हैं.
  • दूध के दांत 20 होते हैं.
  • दांत के ऊपरी भाग को इनैमल कहते हैं जो शरीर का सबसे कठोर भाग होता हैं.

पाचन तंत्र का सारांश (total organ systems in human body)

  • मुखगुहा के फर्श पर एक मोटी व मांसल जिह्वा पाई जाती हैं, जो भोजन चबाने एवं उसके लार मिश्रित करने में मदद करती हैं.
  • जिह्वा के अग्र भाग से मीठे स्वाद, पीछे के भाग से कड़वे स्वाद का तथा बगल के भाग से खट्टे स्वाद का आभास होता हैं.
  • ग्रासनली एक लम्बी नली होती हैं, जो आमाशय में खुलती हैं इसकी दीवार पेशीय व संकुचनशील होती हैं, जिसकी सहायता से भोजन आगे बढ़ता हैं.
  • आमाशय में जठर रस का स्त्रावण होता है जिससे HCL रेनिन व पेप्सिन एंजाइम पाए जाते हैं. आमाशय में भोजन लुगदी के समान हो जाता हैं. आमाशय से भोजन छोटी आंत में जाता हैं.
  • छोटी आंत का प्रारम्भिक भाग U तरह मुड़ा रहता हैं, जिसे ग्रहणी या पक्वाशय कहते हैं. शेष भाग इलियम कहलाता हैं. ग्रहणी तथा आमाशय के मोड़ के मध्य अग्नाशय पाया जाता हैं.
  • छोटी आंत पचे हुए भोजन का अवशोषण करती हैं.
  • बड़ी आंत में अपशिष्ट पदार्थों का जलीय अपघटन होता हैं. बाद में अपशिष्ट पदार्थ मल द्वारा बाहर निकल जाते हैं.

यकृत (Liver)

  • यह मानव शरीर की सबसे बड़ी ग्रंथि होती हैं.
  • यकृत हिपेरिन का स्रवण करती हैं, जो रक्त शरीर के अंदर जमने से रोकता हैं.
  • यकृत फाइब्रिनोजन नामक प्रोटीन का निर्माण करती हैं जो शरीर के बाहर रक्त के थक्का बनने में मदद करता हैं.
  • यह विटामिन A का संश्लेषण तथा विटामिन A,C और D का संचय करती हैं.
  • यकृत अमोनिया का यूरिया में परिवर्तित करता हैं.

अग्नाशय (Pancreatic)

  • यह मानव शरीर की दूसरी सबसे बड़ी ग्रंथि हैं.
  • यह शरीर की एकमात्र ग्रंथि है जो अंतस्रावी तथा बही स्रावी दोनों प्रकार की होती हैं. अतः इसे मिश्रित ग्रंथि भी कहते हैं.
  • यह छोटी आंत के U आकार वाले भाग में स्थित होती हैं.
  • यह एसिनस नामक कोशिकाओं का बना होता हैं. जो अग्नाशयी रस के स्रवण करती हैं.
  • अग्नाशय की कोशिकाओं के बिच बिच में कुछ पीले रंग की कोशिकाएं समूहों के रूप में व्यवस्थित रहती हैं, जिन्हें लैंगरहेंस के द्वीप भी कहते हैं जो तीन प्रकार की कोशिकाओं एल्फा बीटा व गामा कोशिकाओं से बनी होता हैं.
  • लैंगरहेंस की बीटा कोशिकाओं से इन्सुलिन हार्मोन का स्राव होता हैं.
  • इन्सुलिन के अल्प स्राव से मधुमेह या डायबीटीज मेलिटस रोग हो जाता हैं इस रोग में रुधिर में ग्लूकोज की मात्रा बढ़ जाती हैं और ग्लोकोज मूत्र में विसर्जित होने लगता हैं.

आँख (Eye)

  • आइरिस का कार्य आँख में जाने वाले प्रकाश की मात्रा को नियंत्रित करना होता है.
  • मानव नेत्र उतल लैंस की भांति कार्य करता हैं.
  • नेत्रदान में आँख का कार्निया दान किया जाता हैं.
  • आँख का रंग अलग अलग आयरिश के कारण होता हैं.
  • आँख के भीतर प्रकाश के प्रति संवेदनशील अंग का नाम रेटिना हैं.
  • आंख में प्रतिबिम्ब रेटिना पर उल्टा और वास्तविक बनता हैं.
  • आँख के लेंस की फोकस दूरी कम ज्यादा प्क्ष्मभिकी पेशियों के कारण होती हैं.
  • रक्तक पटल प्रकाश का अव्शोष्ण करता हैं.
  • नेत्र की स्पष्ट द्रष्टि की न्यूनतम दूरी 25 सेमी हैं.
  • नेत्र की विभेदन क्षमता 0.1 mm होती हैं.
  • छीकते समय आँख खुली नहीं रखी जा सकती हैं.
  • आँख में लाइसोजाइम एंजाइम होता हैं जो जिवानुनाशी होता है यह नेत्रों की जीवाणुओं से रक्षा करता हैं. आँख से आंखू का निकलना एक प्रतिवर्ती क्रिया हैं.

श्वसन तंत्र (the respiratory system)

  • श्वसन क्रिया में o2 की उपस्थिति में जटिल भोज्य पदार्थों का अपघटन सरल भोज्य पदार्थों co2 तथा जल में होता हैं. तथा ऊर्जा मुक्त होती हैं.
  • श्वसन दो प्रकार का होता है- बाह्य श्वसन और आंतरिक श्वसन
  • फेफड़ों में होने वाले गैसीय विनिमय को बाह्य श्वसन कहते हैं.
  • निश्वसन में वायु ग्रहण की जाती हैं तथा उच्छ्वसन क्रिया में फेफड़ो से वायु बाहर निकलती हैं. एक बार सांस लेने की क्रिया 5 सैकंड अर्थात 2 सैकंड में निश्वसन में उच्छश्वसन होता हैं.
  • श्वसन में 21% ओक्सीजन ग्रहण की जाती हैं और 16% ऑक्सीजन वापिस छोड़ी जाती हैं. इसी प्रकार co2 -0.03 प्रतिशत ग्रहण की जाती हैं तथा 4 प्रतिशत वापिस छोड़ी जाती हैं.
  • सांस द्वारा लगभग 400 ml पानी प्रतिदिन हमारे शरीर से बाहर निकलता हैं.
  • शरीर के अंदर रुधिर एवं ऊतक द्रव्य के बिच गैसीय विनिमय होता हैं उसे आंतरिक श्वसन कहते हैं.
  • आंतरिक श्वसन दो प्रकार का होता हैं अनोक्सी श्वसन तथा ऑक्सीश्वसन.
  • अनाक्सीश्वसन में ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में ग्लूकोज का विघटनएथिल एल्कोहल में होता हैं.
  • ऑक्सीश्वसन में ऑक्सीजन की उपस्थिति में ग्लूकोज का विघटन co2 व जल के रूप में होता हैं व 36 atp ऊर्जा मुक्त होती हैं.
  • सम्पूर्ण आंतरिक या कोशकीय श्वसन में एक अणु ग्लूकोस से 38 ATP ऊर्जा मुक्त होती हैं.

उत्सर्जन तंत्र (Excretory system)

  • हानिकारक अपशिष्ट पदार्थ की अधिक मात्रा में शरीर से निष्काषित करने की जैविक प्रक्रम को उत्सर्जन कहते हैं.
  • मनुष्य में उत्सर्जन तंत्र में प्रमुख अंग हैं वृक्क, फेफड़ा, त्वचा, यकृत, आंत आदि.
  • किडनी परासरण नियंत्रण द्वारा ही जल की निश्चित मात्रा बनाए रखते हैं. (जल्द ही अन्य भाग जोड़े जाएगे)

यह भी पढ़े-

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *