महालक्ष्मी व्रत की कहानी | Mahalaxmi Vrat Katha

महालक्ष्मी व्रत की कहानी | Mahalaxmi Vrat Katha

vaibhav mahalaxmi vrat katha in marathi hindi pdf free download– यह व्रत राधाअष्टमी से शुरू होता हैं. और आश्विन कृष्ण अष्टमी को समाप्त होता हैं. इस दिन धन की देवी माँ लक्ष्मी जी की पूजा आराधना की जानी चाहिए. महालक्ष्मी व्रत के दिन लक्ष्मी जी की मूर्ति को स्नान करावें फिर नयें वस्त्र पहनाकर भोग लगावें. और आचमन कराकर फूल धूप दीप चन्दन आदि से आरती करे और भोग को आरती के बाद बाँट देवे. रात को चन्द्रमा के उगने पर अर्ध्य देवे और आरती करे फिर स्वयं भोजन करे. इस व्रत के करने से धन धान्य की वृद्धि होती है और सुख मिलता हैं.mahalaxmi vrat katha

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एक समय की बात है किसी गाँव में एक निर्धन ब्राह्मण रहा करता था. वह अपनें नियमों का बेहद पक्का था. पास ही के एक जंगल में एक विष्णु जी का मंदिर था. वह ब्राह्मण रोज उस मंदिर में जाकर नियम के अनुसार पूजा करता था. ब्राह्मण की भक्ति से प्रसन्न होकर विष्णु जी ने उसे दर्शन दिए.

जब भगवान ने ब्राह्मण को कुछ मांगने के लिए कहा तो ब्राह्मण ने धन प्राप्ति का उपाय पूछा. तब भगवान बोले इस मंदिर के सामने मेरी पत्नी तथा धन की देवी लक्ष्मी रोजाना कंडे थापने आती हैं. हर रोज तुम यहाँ आना तथा उन्हें अपने घर ले जाने के लिए आग्रह करना, अपनी हठ तब तक न छोड़ना जब तक कि महालक्ष्मी जी तुम्हारे घर चलने को तैयार न हो जाए. यदि तुम इस कार्य में सफल हो गये तो तुम्हारे सम्पूर्ण दुःख एवं दरिद्रता समाप्त हो जाएगी.

इतना कुछ बताने के बाद विष्णु जी ओझल हो गये तथा ब्राह्मण अपने घर चला गया. अगले दिन भौर होने से पहले ही वह ब्राह्मण विष्णु मंदिर के सामने आकर बैठ गया. जब लक्ष्मी जी कंडे थापने आई तो उसने लक्ष्मी को कस के पकड़ लिया. इससे लक्ष्मी जी चक्कर में पड़ गई कि किसने उनका आंचल पकड़ा हैं.

जब उन्होंने पीछे मुड़कर देखा तो ब्राह्मण खड़ा था. उन्होंने आंचल छोड़ने को कहा, फिर भी ब्राह्मण नही माना. ब्राह्मण बोला- आप वादा करो कि आप मेरे घर निवास करोगी तभी मैं आपकों छोड़ूगा. उस ब्राह्मण की बात सुनकर लक्ष्मी जी ब्राह्मण की करतूत समझ गई तथा ब्राह्मण से बोली- हे ब्राह्मण देव आप अपनी पत्नी सहित 16 दिनों तक (महालक्ष्मी व्रत) करों.

सोलहवें दिन चन्द्रोदय के बाद महालक्ष्मी व्रत कथा वाचन के पश्चात उत्तर दिशा में मुह करके याद करना. मैं अवश्य आपके घर आ जाउगी. ब्राह्मण ने देवी लक्ष्मी के बताए अनुसार सोलह दिनों तक महालक्ष्मी व्रत किया तथा अंतिम दिन रात को चन्द्रमा की पूजा के बाद उत्तर दिशा में आवाज दी तो लक्ष्मी जी उस ब्राह्मण के घर आ गई तथा उनके साथ भोजन कर वही निवास करने लगी.

इसीलिए यह व्रत महालक्ष्मी व्रत के नाम से प्रसिद्ध हैं. हे ,माँ लक्ष्मी जिस तरीके से आप उस ब्राह्मण के घर पधारी उसी तरह महालक्ष्मी व्रत करने वाले हर प्राणी के घर आना तथा हमारे घर आकर भी हमारी दरिद्रता का हरण करना.

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