Mahatma Gandhi Biography In Hindi | महात्मा गांधी का जीवन परिचय

Mahatma Gandhi Biography In Hindi -परम पूज्य राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को कोन नही जानता हैं | सत्य और अहिंसा को वो मूरत जिन्होंने अपनी पूरी जिन्दगी भारत की आजादी में लगा दी| एक लकड़ी के सहारे चलने वाले गाँधीबाबा ने सत्य अहिंसा को अपना शस्त्र बनाकर करोड़ो हिन्दुस्थानियो के साथ जंग-ए-आजादी लड़ी| उनकी कुर्बानियों की वजह से ही आज हम खुले वातावरण में सांस ले रहे हैं| ऐसी महान आत्मा के जन्म के लिए धरती स्वय तरस जाती हैं| मानवता और हिन्दू मुस्लिम एकता की मिशाल बने महात्मा गांधी के जीवन में विपतियों के सिवाय कुछ नही था| जिन्हें सता प्राप्ति का कोई लोभ न था| प्यारा था तो वतन और उसकी आजादी| ऐसें प्रेरणादायक महापुरुष महात्मा गांधी का जीवन परिचय जीवनी और इतिहास में उनके जीवन से जुड़ीं मुख्य घटनाओं पर प्रकाश डालने की छोटी सी कोशिश की गईं हैं|

Biography of Mahatma Gandhi In Hindi

Essay On Mahatma Gandhi In Hindi And English Language | महात्मा गांधी पर निबंध

क्रमांक  जीवन परिचय बिंदु  महात्मा गांधी का जीवन परिचय
1.  पूरा नाम  मोहनदास करमचन्द गांधी
2.  धर्म  हिन्दू
3.  जन्म  2 अक्टूबर 1869
4.  जन्म स्थान  पोरबंदर, गुजरात
5.  माता-पिता करमचन्द गाँधी, पुतलीबाई
6.  विवाह कस्तूरबा गाँधी (1883)
7.  बच्चे
  • हरीलाल गाँधी
  • मणिलाल गाँधी
  • रामदास गाँधी
  • देवदास गाँधी
8.  राजनैतिक पार्टी  भारतीय राष्ट्रिय कांग्रेस

गांधी जी की जीवनी व इतिहास (Gandhiji’s biography and history)

आज इस हस्ती के बारे में कोन नही जानता देश का बच्चा-बच्चा महात्मा गांधी की ऑटोबायो ग्राफी से वाकिफ हैं, गांधीजी का पूरा नाम मोहनदास कर्मचन्द गाँधी था| इनका जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबन्दर शहर में हुआ था| उस समय यह प्रान्त बम्बई प्रेजिडेंसी के अंतर्गत आता था|

इनके पिता का नाम करमचन्द गाँधी जो पंसारी जाति के थे| अग्रेज सरकार में वो दीवान के पद पर सेवारत थे| इनकी माँ का नाम पुतलीबाई था | जो मध्यम वर्ग से आती थी | गृहणी का काम किया करती थी| दरअसल पुतलीबाई करमचन्द गांधी की चौथी पत्नी थी| इनसे पूर्व की तीन पत्नियों का देहांत हो चूका था|

महात्मा गांधी का आरंभिक जीवन (Early life of Mahatma Gandhi)

कट्टर हिंदूवादी विचारधारा के परिवार में जन्मे गाँधी के जीवन पर भी धार्मिक परवर्तियो का प्रभाव पड़ा| इनकी माता धार्मिक विचारो वाली महिला था| इनके पिताजी करमचंद गाँधी को कबा गाँधी उपनाम से भी जाना जाता हैं| हालाँकि वे शिक्षित तो नही थे| मगर जीवन के कड़े अनुभवो ने उनमे ऐसी शिक्षा का प्रदुभाव कर दिया था| जिससे वे हित और अहित को भली भांति जानते थे|

वे नही चाहते थे उनका बेटा मोहनचंद इसी अंग्रेजी हुकूमत का बाशिंदा बने| इसी पर इन्होने मोहनदास का दाखिला स्थानीय सामलाल कॉलेज में दिलाया| जहा से स्कूली शिक्षा पूरी करने के त्त्पश्तात गाँधी को बम्बई विश्विद्यालय में आगे की पढ़ाई के लिए भेज दिया|

उन्हें शुरुआत से पढ़ाई में मन नही लगता था इसकी वजह अंग्रेजी भाषा थी| वे अग्रेंजी और अपनी मातृभाषा गुजराती में पूर्णत सामजस्य नही बिठा पाते थे| गाँधी बचपन से अपनी लिखावट में अच्छे नही थे| उनका मन और कही था| मगर परिवार तो कुछ और ही चाहता था| महात्मा गांधी शुरू से ही बेहद सवेदनशील इंसान थे| मानव पीड़ा उनके लिए सबसे बड़ा दर्द था| इसमे कमी लाने के लिए वे डोक्टर बनना चाहते थे|

मगर कट्टर ब्रह्मण वादी सोच अपने कुल में चिर फाड़ और ऐसे कार्यो को बिलकुल इजाजत नही देती थी| अपनी कुल परम्परा के मुताबिक उन्हें वकील बनने की हिदायत दी गईं| ब्रिटिश भारत में उस समय लो की शिक्षा का स्तर न्यून था| इसलिए माता-पिता ने महात्मा गांधी को इंग्लैंड भेजने का निश्चय किया गया|

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गांधी जी की अफ्रीका यात्रा व भारत लौटना (Gandhiji’s visit to Africa and returning to India)

गांधी जब 19 वर्ष के थे तो कॉलेज में मन ना लगने के कारण इन्हे इंग्लैंड जाने का ऑफर मिला| जिन्हें गांधी ने सहर्ष स्वीकार कर लिया| कानून की पढ़ाई करने जाने से पूर्व इनकी मुलाकात एक जैन भिक्षु के साथ हुई| कुछ दिन साथ रहने के बाद इनका काफी प्रभाव पड़ा| इसके अतिरिक्त इनकी जीवनचर्या पर माँ के विचारो का प्रभाव पड़ा| लन्दन में रहने के दोरान उनके शाकाहारी जीवन प्रवर्ती में बड़ा बदलाव आया|

अग्रेंजी रीती-रिवाज और शैली से बिलकुल अलग और शाकाहारी और साधू के रूप में जीवन व्यतीत करने लगे| बोध धर्म की एक संस्था थियोसोफिकल सोसायटी की सदस्यता ग्रहण की और इसके साथ काम करते रहे

लन्दन से बेरिस्टर की डिग्री हासिल करने के बाद मुंबई लौट आए| यहाँ उन्होंने कई बार वकालत की| मगर उन्हें यहाँ इतनी सफलता नही मिली| एक अग्रेज अधिकारी की लापरवाही के कारण गांधी को इस जॉब से हाथ धोना पड़ा फिर उन्हें एक शिक्षक के रूप में एक संस्था द्वारा आमत्रित किया गया| मगर गांधी ने इच्छा न जताते हुए अनिच्छा जाहिर की|

उस समय अग्रेंजी हुकूमत दक्षिण अफ्रीका में भी थी| अत: रिश्तेदारों के बुलावे पर महात्मा गांधी ने दक्षिण अफ्रीका की यात्रा पर गये| मगर यहाँ उन्हें जो कुछ झेलना पड़ा Mahatma Gandhi Biography में इसका वर्णन आगे दिया जा रहा हैं|

गाँधी जी पर निबंध (essay on mahatma gandhi in hindi)

यदि मोहनदास कर्मचन्द गाँधी दक्षिण अफ्रीका की यात्रा नही करते तो शायद वो महात्मा गांधी भी नही बनते | जब 1895 में गांधीजी ने अफ्रीका की यात्रा की तो उस समय वहा ब्रिटिश हुकूमत थी| जो वहा के निवासियों और अग्रेंजो के बिच रंगभेद Apartheid की दीवार खड़ी कर चुके थे|

काले और गोरे लोगों के बिच हर क्षेत्र में भेदभाव किया जाता था| यहाँ तक कि वे एक ही बस्ती में नही रह सकते थे| गांधीजी ने जब दक्षिण अफ्रीका में पहला ही कदम रखा| तो उन्हें रंगभेद का शिकार होना पड़ा|

एक घटना जिन्होंने अग्रेंजो के प्रति गुस्सा भर दिया | जब वे रेल मे यात्रा कर रहे थे| तब उनके पास फरिस्त क्लास की वैध्य टिकट होने के बावजूद डिब्बे में सवार गोरे लोगों ने उन्हें थर्ड क्लास में जाना को कहा गया| महात्मा गाँधी ने जब इसका विरोध किया तो कुछ गोरे लोगों ने उठाकर उन्हें चलती गाड़ी से बाहर फेक दिया|

उस समय गांधी की वेशभूषा एक धोती कुर्ता और पगड़ी पहने थी| गोरे लोगों ने उन्हें अपनी बस्ती के आस-पास आने जाने रेस्टोरेंट में रुकने से पाबंदी लगा दी| साथ ही जब वे एक मुकदमें को लेकर कोर्ट गये तो अग्रेंजी कोर्ट ने उन्हें पगड़ी तक उतारने का आदेश दिया|

उस समय दक्षिण अफ्रीका में भारतीयों की तादाद बड़ी संख्या में थी, उनके साथ रंगभेद का घोर अपमान किया जाता था| गांधी ने भारतीयों को जाग्रत कर जुलू से अग्रेंजो के खिलाफ मोर्चा खोल दिया| इन्होने भारतीय जनमत इंडियन ओपिनियन के जरिए भारतीयों को न्याय दिलाने की कोशिश भी की|

Mahatma Gandhi Return India From South Africa

कई सफल और विफल प्रयासों के बाद महात्मा गांधी दक्षिण अफ्रीका छोड़कर 1915 में अपने वतन हिंदुस्तान लौट आए| भारत आकर इन्होने भारतीयों की अपने ही देश में राजनितिक आर्थिक दुर्दशा देखी|

अग्रेजो की फुट डालो और राज करो की निति का पूर्ण अध्ययन करने के बाद उन्होंने कई सभाओ को सम्बोधित किया| उस समय भारतीय राष्ट्रिय कांग्रेस के अध्यक्ष गोपाल कृष्ण गोखले (Gopal Krishna Gokhale) थे| जो महात्मा गांधी के विचारों से सहमत थे|

गांधीजी उस समय प्रत्येक क्षेत्र में भ्रमण कर रहे थे ताकि वास्तविक स्थति का पता लगाया जाए| तभी उनसे गुजरात के खेड़ा और बिहार के चम्पारण के किसान अपनी परेशानियों को लेकर पहुचे|

अंग्रेजी हुकूमत उन से अन्यायपूर्ण तरीके से नील और अफीम की खेती करवाती थी| गाँधी जी ने बहुत सोच-विचार के बाद इन किसान की आवाज बनने का निर्णय किया और हजारो किसानो और किसान नेताओ के साथ 1918 में खेड़ा चम्पारण का आन्दोलन आरम्भ कर दिया|

यह पहला अवसर था जब मोहनदास कर्मचन्द गांधी को लोगों ने बापू और महात्मा गांधी के नाम से पुकारना शुरू किया| इस आन्दोलन में किसानो की तरफ से रखी गईं मांगो में बढे हुए राजस्व में कमी, कृषक का उनके खेत पर पूर्ण स्वामित्व, साथ ही सभी अन्यायपूर्ण सहमती पत्र रद्द किये गये|

अंग्रेजी हुकूमत ने खेड़ा और चम्पारण के किसानो की आवाज दबाने की पूरी कोशिश की महात्मा गांधी को जेल में भी डाला गया| मगर किसानो के आन्दोलन की बढती लोकप्रियता और दवाब के कारण सरकार को अपने कदम वापिस लेने पड़े|

इस आन्दोलन से बिखरे समाज में न केवल एकता लाने का काम किया बल्कि महात्मा गांधी की लोकप्रियता भी बढ़ी| लोगों में यह विश्वास जगा कि शांतिपूर्ण तरीको से भी सरकार पर दवाब बनाकर अपनी मांगे मनवाई जा सकती हैं| महात्मा गांधी के सभी स्वतंत्रता संग्राम और आंदोलनों को Mahatma Gandhi Biography में पढ़ते रहिये|

महात्मा गांधी के आंदोलन नमक सत्याग्रह (Salt satyagraha)

दांडी नमक यात्रा गांधीजी की एक विरोधात्मक रैली और आन्दोलन था| जिनमे हजारो लोगों ने भाग लिया था| 5 अप्रैल 1930 को गुजरात की दांडी नामक स्थल से आरम्भ की गईं|

लगभग 450 किलोमीटर की इस यात्रा को पूरी कर महात्मा गांधी ने सत्याग्रहियों के साथ मिलकर नमक बनाकर अंग्रेजी सरकार के उस नमक कानून का उल्लघंन किया| इस आन्दोलन से अंग्रेजी सरकार की नीव पूर्णत हिलाकर रख दी थी|

12 मार्च के दिन लगभग 1 लाख से अधिक लोगों ने सरकार के नामक निर्माण और उसकी बिक्री के एकाधिकार का हनन कर सरकार को कड़ा संदेश देने का कार्य किया| महात्मा गांधी के इस आन्दोलन के बाद तकरीबन 70 हजार लोगों को जेल में डाला गया|

आखिर मार्च 1931 को इरविन गांधी समझोते के बाद सभी कैदियों को रिहा करने के साथ सरकार ने सभी सत्याग्रहियों की मांग को स्वीकार कर लिया| जिसके बाद गांधी ने सविनय अवज्ञा आन्दोलन को रोक दिया|

महात्मा गाँधी के आन्दोलन (mahatma gandhi ke andolan in hindi)

दांडी नमक यात्रा और खेड़ा चम्पारण के अतिरिक्त महात्मा गांधी ने कई बड़े राजनितिक और सामाजिक आन्दोलन किये जिसकी वजह से अंग्रेजी सता को कमजोर और भारतीय आंदोलनकारियो के विशवास को मजबूत करने में मदद मिली| आएये Mahatma Gandhi Biography में जानते हैं उनके कुछ प्रभावशाली जन-आंदोलनों के बारे में सक्षिप्त में|

  • असहयोग आन्दोलन-गांधीजी के सबसे लोकप्रिय जनआंदोलनों में से एक था| पहले विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद अंग्रेजी सरकार ने भारत में समाचार पत्रों पर पूर्णत पाबंदी लगा दी| साथ ही इसका उलघंन करने पर बिना कोई न्याय प्रक्रिया के कठोर कारावास का प्रावधान कर दिया| महात्मा गांधी ने इस रोलेट एक्ट के विरुद्ध आन्दोलन छेड़ दिया| इस विरोध का सबसे अधिक प्रभाव पंजाब में पड़ा| वहा पर सालो से अंग्रेजी हुकूमत की सेवा करने वाले लोगों को भी जेलों में डाला गया| महात्मा गांधी के आव्हान पर हजारो युवको ने अम्रतसर और आस-पास के सभी शहरों में हड़ताल पर चले गये| बाजार पूरी तरफ ठप हो गये थे| सभी सत्याग्रही पंजाब के जलियावाला बाग़ नामक स्थान पर एकत्रित होकर शांति पूर्ण सभा कर रहे थे| अंग्रेजी सरकार को इसकी सुचना मिलने पर जनरल डायर के आदेश पर उन बेकसूर लोगों को गोलियों से भुन दिया गया| भारतीय इतिहास में इस हत्याकांड को जालियाँवाला बाग हत्याकांड Jallianwala Bagh massacre के नाम से जाना गया| सरकारी आकड़ो के अनुसार इस में चार सो लोग मारे गये| मगर मरने की वास्तविक संख्या 2 हजार से अधिक थी| सरकार के इस दमनकारी रवैये के बाद महात्मा गांधी ने देशभर में सविनय आन्दोलन आरम्भ कर दिया| 1921 तक चले इस प्रोटेस्ट के लिए सभी भारतीय लोगों की अंग्रेजी नौकरी और सेना सहित किसी कार्य में सहयोग न करने की अपील की गईं| तक़रीबन चार सौ हडतालों में 10 लाख से अधिक मजदूर और किसान सम्मलित हुए थे| इस आन्दोलन से भले ही भारत को आजादी नही मिल पाई हो मगर अंग्रेजो को यह एहसास हो चूका था| कि अब भारत को अधिक वर्षो तक दबाकर नही रखा जा सकता|
  • भारत छोड़ो आन्दोलन ( Quit India Movement )-अभी तक के महात्मा गांधी के सभी आंदोलनों में सबसे व्यापक और शक्तिशाली आंदोलनों में से भारत छोड़ो आन्दोलन सबसे अधिक प्रभावकारी था| सरकार के दमनकारी रेवैये के कारण गाँधी को दुश्मन बना चुके थे| इस आन्दोलन की शुरुआत तो दुसरे विश्वयुद्ध की शुरुआत से ही हो गईं| महात्मा गांधी इस विश्व युद्ध का फायदा उठाना चाहते थे| सरकार की शक्ति दोनों तरफ बटी होने के कारण इस आन्दोलन को राष्ट्रव्यापी रूप से शुरू किया गया| 1857 के स्वतन्त्रता संग्राम के बाद यह पहला अवसर था जब वतन की आजादी की खातिर सभी वर्ग जिनमे बड़ी संख्या में महिलाओं ने भी इस जन आन्दोलन में हिस्सा लिया| महात्मा गांधी ने अब तक सरकार के खिलाफ उपयोग किये गये सभी उपक्रमों का एक साथ प्रयोग किया| जिनमे अहिंसा सत्याग्रह अवज्ञा के साथ-साथ हिंसा भी बड़े पैमाने में इस आन्दोलन में शामिल रही| गाँधी के लिए यह आन्दोलन उनकी पराकाष्टा थी| वर्ष 1942 में ही इन्होने करो या मरो का नारा दिया था| इसी दोरान उन्हें दो वर्ष तक की कठोर कारावास में भी रहना पड़ा| जेल से छुटने के बाद उनकी पत्नी कस्तूरबा गाँधी और परम मित्र और सहयोगी महादेव देसाई का निधन हो चूका था| डू ऑर डाय के नारे के बाद लाखो की संख्या में आंदोलनकारी सड़को पर उतर आए थे| कही सरकार की सेना पर हमला हो रहा था तो कही लुट मार मची थी| बड़ी संख्या में जेल भरो निति से अपनी गिरफ्तारी दे रहे थे| 1943 तक भारत छोड़ो आन्दोलन को सरकार ने दबा भी दिया था| मगर सभी कैदियों की रिहाई के साथ भारत की पूर्ण स्वतंत्रता के संकेत भी दे दिए|
  • हरिजन आंदोलन (Harijan movement)-डॉ॰ बाबासाहेब अम्बेडकर द्वारा भारत के नए सविधान में मुस्लिम और हिन्दू निर्वाचन क्षेत्रो के अतिरिक्त दलित समुदाय के लिए अलग से निर्वाचन क्षेत्र में आरक्षण की माग की| इस पर अंग्रेजी सरकार भी सहमत थी| मगर सितम्बर में महात्मा गांधी ने इस जातीय विभाजन को रोकने के लिए 6 दिनों तक भूख हड़ताल की| आखिर तीनो पक्षों ने मिलकर इस नई व्यवस्था को छोड़कर पुन: पुरानी व्यवस्था को अपनाए रखा| महात्मा गांधी दिन हिन् और पिछड़े वर्ग के उद्दारक थे| इन्होने सामाजिक आन्दोलन द्वारा समाज में दलितों की स्थति सुधारने के कई अथक प्रयास किये| जिनमे से एक था अछूत वर्ग के लोगों को अब से हरिजन नाम से बुलाए जाने की व्यवस्था की शुरुआत की|इन्ही के प्रयासों की बदोलत नीची जाति के लोगों का धार्मिक स्थलों में प्रवेश संभव हो पाया|

महात्मा गांधी की आलोचना (Criticism of Mahatma Gandhi)

एक महान देश नायक और राष्ट्रपिता होने के बावजूद उनके काम करने का तौर तरीका और किसी सम्प्रदाय के प्रति नजदीकी और किसी के साथ दुरी बनाए रखने के विषय पर महात्मा गांधी पर कई तरह के आरोप और आलोचनाए हुई हैं| Mahatma Gandhi Biography में एक नजर उनकी Criticism पर-

  1. शुरुआत के दोनों वर्ल्ड वॉर में ब्रिटिश राज्य को समर्थन देना|
  2. अग्रेंजो की दमनकारी निति के आगे सत्य और अहिंसा बेकार हैं|
  3. देश को आजादी मिलने के बाद प्रधानमन्त्री पद के लिए नेहरु को समर्थन देना|
  4. जब असहयोग आन्दोलन पुरे उफान पर था अग्रेंजी पुलिस थाने पर हमले से आन्दोलन वापिस ले लेना|
  5. भारत की आजादी के बाद पाकिस्तान का विभाजन
  6. विभाजन में पाकिस्तान को 55 करोड़ की आर्थिक मदद मज़बूरी से दिलाने के लिए भूख हड़ताल पर बैठना|
  7. कांग्रेस के अध्यक्ष पद के उम्मीदवार नेताजी सुभाषचंद्र बोस को समर्थन ना देना|
  8. गांधी-इरविन समझौता जो पूर्णत अंग्रेजी हुकूमत के फायदे की शर्तो पर था इसे मंजूरी देना|
  9. सशस्त्र क्रान्तिकारियों को हताश करना उनकी राह में रोड़ा बनना|

Mahatma Gandhi Quick Facts

  • mahatma gandhi family में उनके माता पिता चार बच्चे और पत्नी कस्तूरबा गाँधी थी|
  • karamchand gandhi इनका मूलनाम था 6 जुलाई 1944 में पहली बार इन्हे राष्ट्रपिता की उपाधि दी गयी|
  • mohandas k gandhi 1915 में राजवैद्य जीवराम कालिदास ने पहली बार महात्मा नाम से पुकारा|
  • mahatma gandhi का विवाह मात्र 13 वर्ष की अवस्था में कस्तूरबा के साथ हो गया था| उस समय बाल विवाह का प्रचलन था|

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