महात्मा गांधी पर निबंध | Mahatma Gandhi Essay in Hindi

महात्मा गांधी पर निबंध Mahatma Gandhi Essay in Hindi:भारत की भूमि पर अनेक महापुरुषों ने जन्म लिया. जिनमे  हमारे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का नाम प्रमुख है.  आज भी  महात्मा गांधी  की राह पर चलने वाले करोड़ो लोग  है. जिन्होंने अपनी सत्य और अहिंसा की निति से भारत में 200 वर्षो से स्थापित अंग्रेजी शासन को उखाड़ फेका था. महात्मा गांधी निबंध – Mahatma Gandhi Essay में हम गांधी जयंती 2019 पर राष्ट्रपिता का संक्षिप्त परिचय इस हिंदी निबंध के जरिये दे रहे हैं.

महात्मा गांधी पर निबंध | Mahatma Gandhi Essay in Hindiमहात्मा गांधी पर निबंध | Mahatma Gandhi Essay in Hindi

Essay On Mahatma Gandhi In Hindi 2019- महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ था.एक समर्द्ध परिवार में जन्मे गांधी के पिता का नाम करमचन्द गांधी था जो पोरबन्दर में दीवान थे. उनकी माँ का नाम पुतलीबाई था जो धार्मिक विचारों वाली महिला थी. घर के धार्मिक माहौल का बड़ा असर पड़ा. राजनीति में आने के उपरान्त भी वे धर्म से जुड़े रहे.

इनकी आरम्भिक शिक्षा पोरबंदर के ही एक विद्यालय से हुई. इसके बाद आगे की पढाई के लिए भावनगर के श्यामलदास कॉलेज भेजा गया था. किन्तु यहाँ पर महात्मा गांधी का मन नही लगने के कारण उनके बड़े भाई लक्ष्मीदास जी ने गांधी को बैरिस्टर की पढ़ाई के लिए इंग्लैंड भेज दिया.

अपनी पहली विदेश यात्रा से ठीक पहले मात्र 13 साल ही आयु में ही महात्मा गांधी का विवाह कस्तूरबा गांधी के साथ हो गया था. कुछ वर्षो तक इंग्लैंड में रहने के बाद 1891 में गांधी स्वदेश लौट आए. और बम्बई (वर्तमान में मुंबई) की एक अदालत में वकालत करने लगे.

1893 में इनके सामजिक और राजनितिक जीवन की शुरुआत हुई. इसी दौरान उन्हें एक मुकदमे के सिलसिले में दक्षिण अफ्रीका जाना पड़ा था. जब ये दक्षिण अफ्रीका गये तो वहां भारतीयों के साथ बुरे बर्ताव को देखकर महात्मा गांधी बहुत दुखी हुए. यही पर उन्हें पहली बार किसी अंग्रेज के सामने बेइज्जत होना पड़ा था. एक बार रेल में यात्रा करते समय उपयुक्त टिकट होने के बावजूद अंग्रेजो के डिब्बे में चढ़ जाने के कारण उन्हें चलती रेलगाड़ी से बाहिर फेक दिया था.

अंग्रेजो से अपमानित गांधी ने उनके विरुद्ध मौर्चा खोल दिया और अपने विरोध के लिए सत्य और अहिंसा को माध्यम बनाया.जब तक वे साउथ अफ्रीका में रहे हमेशा श्वेत लोगों की रंगभेद की निति का विरोध करते रहे. यहाँ पर महात्मा गांधी ने एक अध्यापक की भूमिका निभाते हुए लोगों को अपने अधिकारों के प्रति शिक्षित करने के साथ ही चिकित्सक के रूप में बीमार लोगों के इलाज, एक वकील के रूप में मानवाधिकार व पत्रकार के रूप में वर्तमान परिस्थिति से लोगों को अवगत कराने का कार्य करते रहे.

महात्मा गांधी ने अपने जीवनकाल के दौरान कई पुस्तकों की रचना की, जिनमे उनकी आत्मकथा ” माय एक्सपेरीमेंटस विथ ट्रुथ दुनिया की प्रसिद्ध पुस्तकों में गिनी जाती है. दक्षिण अफ्रीका में गांधी के प्रयत्नों के समाचार भारतीयों तक पहुच चुके थे. इस कारण बहुत से लोग उनको जानने लगे थे.

वर्ष 1915 में महात्मा गांधी भारत लौटे तो गोपालकृष्ण गोखले और लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक जैसे महान नेताओं के उनका भव्य स्वागत किया. भारत आकर उन्होंने बिहार में नील की खेती करने वाले किसानों के प्रति हो रहे शोषण के विरुद्ध आवाज उठाई,

अपने उद्देश्यों की पूर्ति के लिए गांधीजी ने गुजरात के अहमदाबाद में एक आश्रम की स्थापना की. इसके बाद अंग्रेज सरकार के विरुद्ध इनका संघर्ष प्रारम्भ हुआ और भारतीय राजनीती की बागडोर एक तरह से उनके हाथ में आ गई. वे जानते थे कि सामरिक रूप से ब्रिटिश सरकार से भारत को आजादी शस्त्र के बल पर कतई नही मिल सकती है. इसी बात को समझते हुए महात्मा गांधी ने सत्य और अहिंसा को अपना मुख्य हथियार बनाया.

भारत की आजादी के इस संघर्ष में गांधीजी को कई बार जेल भी जाना पड़ा. अंग्रेजी हुकूमत का प्रखर विरोध करने की शुरुआत 1920 के असहयोग आंदोलन के साथ शुरू हुई. जब ब्रिटिश सरकार ने नमक पर भी करारोपण किया तो गांधीजी ने 13 मार्च 1930 के दिन दांडी यात्रा की. 24 दिनों तक अपने अनुयायियों के साथ पैदल चलने के पश्चात् दांडी नामक स्थान पर पहुचकर अपने हाथो से नमक बनाकर अंग्रेज सरकार के नमक कानून का उल्लघंन किया.

इसके पश्चात महात्मा गांधी जी ने सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरू किया. इसी वर्ष गांधी और इरविन के बिच समझोता भी हुआ. अंग्रेज सरकार द्वारा अपनी शर्तो से मुखर जाने के कारण यह समझौता विफल हो गया था. इसके बाद इन्होने फिर से असहयोग आन्दोलन शुरू किया, जो 1934 तक चलता रहा. इस आंदोलन में भी अपने लक्ष्यों में प्राप्त होते न देख महात्मा गांधी ने 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन छेड़ा.

Short Mahatma Gandhi Essay Hindi 2019

इस आंदोलन के दौरान ही बापू ने भारतीय जनता को करो या मरो का नारा दिया था. इस तरह गांधीजी के अथक प्रयासों के परिणामस्वरूप 15 अगस्त 1947 को अन्तः भारत को स्वतंत्रता मिल ही गई. इस तरह 1915 से 1947 तक के समय में इस महापुरुष के अद्वितीय योगदान को देखते हुए इसे गांधी युग की संज्ञा दी गई.

महात्मा गांधी आजीवन हिन्दू मुस्लिम एकता के लिए प्रयत्न करते रहे. मगर दुर्भाग्य की बात यह रही कि आजादी के बाद तक यह एकता और सद्भाव नही बन पाया. अंग्रेजो की चाल के अनुसार कट्टर मुस्लिम अलग राष्ट्र की मांग करने लगे थे. यहाँ पर हिन्दू एवं मुस्लिम दोनों धर्मो के लोगों ने गांधी को समझने में गलती की. उनके न चाहते हुए भी परिस्तिथिया कुछ इस तरह तैयार हो गई कि भारत के विभाजन के सिवाय कोई दूसरा रास्ता नही था.

उधर पाकिस्तान निर्माण के बाद महात्मा गांधी ने उन्हें आर्थिक मदद देने के लिए भारत सरकार पर दवाब बनाया. इस घटना के बाद अधिकतर लोग उनके खिलाफ खड़े हो गये तथा 30 जनवरी 1948 के दिन जब महात्मा गांधी प्रार्थना सभा में जा रहे थे, नाथूराम गोडसे नामक नवयुवक ने उन्हें गोली मार दी थी. इस तरह एक सदी के महानायक सत्य और अहिंसा के पुजारी के जीवन का अंत हो गया.

भले ही गांधीजी आज हमारे मध्य नही हो, मगर गांधीवाद के रूप में उनके विचारों और शिक्षाओं पर आधार विचारधारा आज भी हमारा मार्गदर्शन कर रही है. आज उनकी याद में 2 अक्टूबर यानि गांधी जयंती को विश्वभर में विश्व अहिंसा दिवस के रूप में मनाया जाता है. भारत के राष्ट्रिय त्योहारों में भी गांधी जयंती को को भी शामिल किया गया है.

महात्मा गांधी ने सत्य, अहिंसा और राजनीति में इन तत्वों का सफल प्रयोग कर आज की युवा पीढ़ी के सामने एक उदहारण प्रस्तुत किया है. उन्होंने एक राजनेता, समाज सुधारक, देशभक्त के रूप में अत्याचारी शासन के विरुद्ध विरोध करने के साथ ही समाज में व्याप्त बुराइयाँ जातिवाद, भेदभाव, अस्वच्छता, नशाखोरी, बाल विवाह, बहुविवाह और साम्प्रदायिकता जैसी बड़ी समस्याओं के खिलाफ अपनी अंतिम सांस तक जंग जारी रखी.

Mahatma Gandhi Essay in Hindi 400 Words

जीवन परिचय और शिक्षा-महात्मा गांधी का पूरा नाम मोहनदास करमचन्द गांधी था. इनका जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात राज्य के पोरबंदर नामक स्थान पर हुआ था. इनके पिताजी कर्मचन्द गांधी राजकोट रियासत के दीवान थे. इनकी माता का नाम श्रीमती पुतलीबाई था. राजकोट जिले से हाईस्कुल की उतीर्ण कर ये बैरिस्ट्री पढ़ने के लिए इंग्लैंड चले गये. गांधी ने 1889 में बैरिस्ट्री पास कर भारत लौटे और वकालत का कार्य आरम्भ किया. इनका विवाह 13 वर्ष की आयु में कस्तूरबा के साथ हुआ था.

जीवन की घटनाएँ-वकालत पास करने के बाद गांधीजी पोरबंदर की एक फर्म के मुकदमें में 1893 में दक्षिण अफ्रीका चले गये थे. वहां भारतीयों के साथ गोरे लोग बेहद बुरा व्यवहार किया करते थे. ऐसा देखकर गांधीजी को बहुत बुरा लगा. ऐसे अमानवीय व्यवहारों से पीड़ित होकर गांधीजी ने सत्याग्रह किया और सत्याग्रह में विजयी होकर स्वदेश लौट आए. विजय की भावना से प्रेरित होकर देश को स्वतंत्र करवाने की अभिलाषा जागृत हो उठी. सन 1921 में असहयोग आंदोलन प्रारम्भ कर मद्द्य निषेध, खादी प्रचार, अस्पर्श्यता निवारण, सरकारी वस्तुओ का बहिष्कार एवं विदेशी वस्त्रों की होली जलाना जैसे कार्य सम्पन्न हुए.

गांधीजी ने वर्ष 1930 में नमक कानून के विरोध में सत्याग्रह किया. वर्ष 1942 में महात्मा गांधी ने भारत छोड़ो आंदोलन प्रारम्भ किया. इस दौरान गांधीजी को अनेक बार जेल जाना पड़ा और अनेक कष्ट उठाने पड़े. इनके प्रयत्नों के फलस्वरूप 15 अगस्त 1947 को हमारा देश पूर्ण रूप से स्वतंत्र हो गया. स्वतंत्र भारत के निर्माता होने से हम बापू और राष्ट्रपिता के संबोधन से आदर देते है.

उपसंहार-देश में भारत-पाकिस्तान विभाजन के फलस्वरूप साम्प्रदायिक दंगे हुए. गांधीजी ने इन दंगो को शांत करने के लिए पूर्ण प्रयत्न किया. परन्तु 30 जनवरी 1948 को दिल्ली में संध्या के समय नाथूराम विनायक गोडसे नामक एक मराठा युवक ने प्रार्थना सभा में पिस्तौल से गांधीजी को गोली मार दी. इस तरह अंहिसा के उपासक महात्मा गाँधी का जीवनांत हो गया.

Mahatma Gandhi Essay in Hindi 200 Words

प्रस्तावना– हमारे देश में समय समय पर राम कृष्ण बुद्ध जैसे महापुरुषों का जन्म होता रहा हैं. इन्ही महापुरुषों ने संकट के समय जनता को दिशा दिखाई, इसी श्रंखला में भारत को अंग्रेजों की दासता से मुक्ति दिलाने वाले महापुरुषों में महात्मा गांधी का नाम बड़े आदर के साथ लिया जाता हैं.

जन्म एवं शिक्षा- गांधीजी का पूरा नाम मोहनदास करमचन्द गांधी था. उन्हें सारा राष्ट्र महात्मा के नाम से जानता हैं. भारतीय उन्हें श्रद्धा के साथ बापू और राष्ट्रपिता कहते हैं. उनका जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबन्दर नामक स्थान पर हुआ था. तेरह वर्ष की अल्पायु में ही उनके पिता करमचन्द ने उनका विवाह कस्तूरबा के साथ कर दिया. वे उन्नीस वर्ष की अवस्था में बेरिस्ट्री की शिक्षा के लिए विलायत गये. सन 1891 में वे बेरिस्ट्री की परीक्षा पास कर भारत लौट आए.

सत्याग्रह का आरम्भ– विदेश से वापिस आकर गांधीजी मुंबई में वकालत करने लगे, वही पोरबन्दर की एक फर्म के एक मुकदमें की पैरवी हेतु वें 1893 में दक्षिण अफ्रीका गये. वहां गोरे शासकों द्वारा कालों लोगों पर किये जा रहे अत्याचार को देखकर उनका मन दुखी हो गया.उन्होंने काले गोरों का भेदभाव मिटाने का कार्य करने का संकल्प ले लिया. अंग्रेजों ने उन पर अत्याचार किये उनका अपमान किया.

परन्तु गांधीजी ने सत्याग्रह जारी रखा. अंत में गांधीजी के सत्याग्रह के सामने गोरी सरकार को झुकना पड़ा और गांधीजी की जीत हुई. अफ्रीका से लौटने के बाद गांधीजी को कांग्रेस के बड़े नेताओं में गिना जाने लगा.

स्वतंत्रता संग्राम का नेतृत्व– भारत आते ही स्वतंत्रता आंदोलन की बागडोर गांधीजी के हाथ में आ गई, उन्होंने भारतीयों को अंग्रेजों के विरुद्ध संगठित किया, उन्होंने सत्य और अहिंसा का सहारा लिया. वे अनेक बार जेल गये, उन्होंने 1920 में असहयोग आंदोलन, 1930 में नमक सत्याग्रह तथा 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के माध्यम से संघर्ष जारी रखा.15 अगस्त 1947 को देश आजाद हो गया.

जीवन का अंत– देश स्वतंत्र हो जाने पर गांधीजी ने कोई पद स्वीकार नही किया. गांधीजी पक्के वैष्णव थे. नियमित रूप से प्रार्थना सभा में जाते थे. 30 जनवरी 1948 के दिन प्रार्थना सभा में एक हत्यारे ने गोली मारकर उनकी हत्या कर दी. पूरा देश दुःख और ग्लानी से भर उठा. उनकी मृत्यु का दुःख पूरे राष्ट्र ने महसूस किया.

उपसंहार– महात्मा गांधी को भारतवर्ष ही नही पूरा विश्व आदर के साथ याद करता हैं, वे मानवता, सत्य एवं अहिंसा के पुजारी थे. गांधीजी जैसे व्यक्ति हजारों वर्षों में अवतरित होते हैं. सत्य और अहिंसा का पालन करते हुए राष्ट्रसेवा में लग जाना ही गांधीजी के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी.

Long Essay on mahatma gandhi in Hindi Language

भारत के स्वतन्त्रता प्राप्ति के महायज्ञ में योगदान करने वाले सैनानियों में महात्मा गांधी का नाम प्रमुखता से लिया जाता हैं. इन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन भारत की आजादी के लिए समर्पित कर दिया था.

सत्य एवं शान्ति की राह दिखाने वाले गौतम बौद्ध एवं महावीर स्वामी के बाद महात्मा गांधी का नाम लिया जाता हैं. राष्ट्र इन्हें बापू कहकर याद करता हैं.

2 अक्टूबर 1869 को इनका जन्म गुजरात के पोरबन्दर में हुआ था. बापू का पूरा नाम मोहनदास करमचन्द गांधी हैं. उनके जन्म दिवस को सम्पूर्ण भारत गांधी जयंती के रूप में मनाता है.

इनके पिताश्री करमचन्द गांधी राजकोट में दीवान हुआ करते थे जबकि इनकी माँ पुतली बाई धार्मिक विचार रखने वाली एक गृहणी थी. महात्मा गांधी ने अफ्रीका के बाद भारत आकर चार बड़े आन्दोलन किये.

उनके सभी आंदोलनों का मूल मन्त्र सत्य एवं अहिंसा था जिसके चलते उन्हें भरपूर समर्थन तथा सफलता भी हासिल हुई. इन्होने इंग्लैंड से वकालत की पढाई की तथा कुछ समय तक बम्बई कोर्ट में प्रैक्टिस भी की.

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