Mahatma Gandhi Story | महात्मा गांधी की कहानी

Mahatma Gandhi Story | महात्मा गांधी की कहानी

Story Of Mahatma Gandhi in hindi: शीर्षक के इस लेख में पूज्य राष्ट्रपिता गांधीजी के जीवन से जुड़ी एक कहानी दी जा रही हैं.सत्य और अहिंसा की प्रतिमूर्ति कहे जाने वाले महात्मा गांधी की इस कहानी में हम जान जाएगे, वो कितने अपने सिद्दांतो के पक्के और परिश्रमी थे, लोगों का उनके प्रति क्या नजरिया और रुझान था. यह बतलाने की जरुरत नही हैं, कि महात्मा गांधी अत्यंत परिश्रमी थे. कभी-कभी वे तो रात के ठाई बजे उठ बैठते और दिन में आधे घंटे तक विश्राम करके रात के दस बजे तक काम करते रहते, उनके सिर पर काम का बोझ निरंतर बना रहता था. समस्त देश की चिंता महात्मा गांधी को इतना व्यस्त रखती थी. उनके लिए हँसना हंसाना अत्यंत आवश्यक हो गया था. एक बार किसी विलायती सवाददाता ने उनसे पूछा- गांधीजी क्या आपमें हास्य की प्रवृति भी हैं, उन्होंने तुरंत जवाब दिया’ यदि मुझमे हास्य प्रवृति ना होती तो मैंने कभी का आत्मघात कर लिया होता.

(महात्मा गांधी कहानी) Mahatma Gandhi Life Story

महात्मा गांधी का मजाक छोटे-बड़े सभी के साथ चलता था. मन-बहलाव के लिए खास तौर पर बच्चों के साथ खूब दिल्लगी करते थे. एक बार महात्मा गांधी ने आश्रम की सभी महिलाओं की मीटिंग अपने कमरे में की. बातचीत का विषय था, उनकी गोद ली हुई अछूत कन्या को अपने चौके में बिठला कर रसोई बनाना कोई सिखाएगा. डेढ़ घंटे तक गंभीर वार्तालाप होता रहा. एकत्रित स्त्रिओ में से कोई भी इस पुण्य कार्य के लिए तैयार नही हुई. सभी ने एक स्वर में ना कह दिया.

स्नान कराने, सिर के बाल काढ देने इत्यादि छोटी-छोटी सेवा के लिए स्त्रियाँ तैयार हो गईं परन्तु अपने चौके में उस बालिका को ना घुसने देना को स्वीकार नही था. वातावरण कुछ गम्भीर सा हो गया.महात्मा गांधी जी ने उस समय मुस्करा कर इतना ही कहा- ” तब मुझे अभी लम्बी लड़ाई लड़नी पड़ेगी”

इसके तुरंत बाद इन्होने छोटे-छोटे बच्चों पर, जो अपनी माताओ के साथ बापू के पास गये थे. निगाह फेकी. एक बच्चे के हाथ में उन्हें एक पैसा दिख पड़ा.

Mahatma Gandhi Story Part-2

बापू को बस मौका मिल गया. उन्होंने उस बालक से कहा “अरे भाई पैसा मुझे दे दे”

बालक ने कहा- “मलाई बर्फ खाइये”

बापू ने कहा-“हमको तो मलाई की बर्फ मिलती नही”

बालक ने कहा-“हमारे घर चलो हम तुम्हे खूब खवावेगे”

इसके बाद बापू ने कुछ, जिसमे “शु” गुजरती शब्द आया था, जिसकी मानी हैं क्या”

वह बच्चा ”शु”न सनझ सका और सब महिलाएं हंस पड़ी, बापू भी हंस पड़े.

दुसरे दिन जब उस लड़के के पिता ने बापू की सेवा में उपस्थित होकर माफ़ी मांगी तो हसते हुए महात्मा गांधी ने सिर्फ इतना ही कहा” अरे यह बच्चा तो मेरा पुराना दोस्त हैं” बापू की इस स्वभाविक कोमलता के साथ-साथ कठोर नियन्त्रण वृति भी काम करती थी. महात्मा गांधी ने अन्य महिलाओं से तो कुछ नही कहा, पर अपनी भतीजे मगनलाल गाँधी की धर्मपत्नी को हुक्म दिया” आप अपने मायके चली जाएं. पर बच्चों को यही छोडती जाए, मुझे ऐसी बहु नही चाहिए. जो मेरी लड़की को चौके में घुसने न दे. श्री मगनलाल की धर्मपत्नी को अपने पिताजी के यहाँ जाना पड़ा और छ; सात महीने वही रहना पड़ा.

यह बतलाने की आवश्यकता नही हैं कि अतत उस तथाकथित अछूत बालिका को रसोई में ले जाना स्वीकार कर लिया.एक बार बापू की सवेरे की प्रार्थना में शामिल होने के लिए सवेरे चार बजे मै भी गया था. मेरे हाथ में हॉकी स्टिक थी. उसे प्रार्थना स्थल के बाहर रखकर मै बैठ गया. प्रार्थना समाप्त होने पर ज्यो ही अपने हाथ में ली बापू उधर से आ निकले. हंसकर कहा- ये लाठी आपने बड़ी मजबूत बाँधी हैं. मैंने उतर दिया” इसका नाम माखनलाल चतुर्वेदी ने मस्तक भजन रख दिया हैं”

बापू बोले-हाँ और सत्याग्रह आश्रम में मस्तक-भंजन रखनी ही चाहिए, आस-पास खड़े व्यक्ति हंस पड़े.

Mahatma Gandhi Story Part-3

एक बार महात्मा गांधी ने मुझे सवेरे सात बजे और सवा सात बजे का टाइम बातचीत के लिए दिया.

मै उन दिनों नया-नया आश्रम में गया था. मन में सोचा कि बापू जाते थोड़े ही हैं, दो-चार मिनट की देरी भी हो जाएं तो क्या? सात बजकर दस बारह मिनट पर पंहुचा. बापू मुस्कराकर बोले-तुम्हारा टाइम तो बीत गया. अब भाग जाओ, फिर कभी वक्त तय करके आना” मुझे बहुत लज्जित होना पड़ा. एक बार फिर ऐसी घटना घट गईं, परन्तु उसमे मेरा कोई अपराध नही था. बापू ने एक राजा साहब को शाम को तीन बजे का टाइम दिया था.

और मेरे सुपुर्द का काम यह था कि उनको लाऊ. उन्हें अहमदाबाद से आना था, बस एक मिनट की देरी हो गईं. मै राजा साहब को लेकर बापू की सेवा में पंहुचा तो वे बोले” मै तो मिनट भर से आपका इन्तजार कर रहा हु.  महात्मा गांधी चाय को स्वास्थ्य के लिए सबसे हानिकारक मानते थे. परन्तु जिनको चाय पीने की आदत पड चुकी थी, उनके लिए चाय का प्रबंध भी अवश्य कर देते हैं.

एक बार मिस आगेथा हैरिसन नामक महिला अंग्रेज उनके साथ यात्रा पर आ रही थी और उन्हें इस बात की चिंता थी,कि प्रातकालीन चाय का इंतजाम कैसे होगा. महात्मा गांधी जी को जब यह पता लगा तो वे बोले ” आप फ़िक्र ना करिए आपके लिए मैंने आधा पौंड जहर रख दिया हैं. एक बार बापू ने मेरे साथ भी चाय के बारे में कई मजाक किये.

कलकता से चलकर वर्धा में उनकी सेवा में उपस्थित हुआ था. रात के साढ़े आठ से नौ बजे तक तक का टाइम मुझे दिया.

Mahatma Gandhi Story Part-4

ठीक वक्त पर पंहुचा, आधे घंटे तक बातचीत होती रही.चलते वक्त महात्मा गांधी जी कहा-”खूब आराम से चाय पीना” मैंने कहा- क्या बापू आपकों मेरे चाय पीने का पता लग गया हैं? उन्होंने कहा- हाँ काका साह्ब मुझे बतला दिया हैं कि तुम कलकते में चाय पीने लग गये हो.

मुझे भी उसी वक्त मजाक सुझा, मैंने कहा-बापू आप मि. एंड्रयूज को छोटा भाई मानते हैं?

उन्होंने कहा- हाँ.

” और वे आपकों बड़ा भाई मानते हैं”

बापू ने कहा- हाँ.

मैंने तुरंत ही कहा-तो मै बड़े भाई की बात न मानकर छोटे भाई की बात मानता हु,

बापू हंसकर बोले- ” तब तो मै एंड्रयूज को लिख दू कि तुमको कितना अच्छा शिष्य मिल गया हैं.

फिर बापू ने गम्भीरतापूर्वक कहा-‘ रात के ढाई बजे से उठा हुआ हुआ हु,अब नौ बज रहे हैं, दिन में बीस मिनट आराम मिला हैं. मै चकित रह गया. अठारह घंटे मेहनत के बाद भी बापू कितने सजीव हैं. मानो वे हमारी काहिली का प्रायश्चित कर रहे थे. संध्या समय जब महात्मा गांधीडच-गायना प्रवासी भारतीयों के लिए संदेश लिखाने बैठे तो मैंने अपनी जेब से फाउन्टेन पैन निकाला, तुरंत ही महात्मा गांधी जी ने कहा- कब से फाउन्टेन पेन से लिखते हो?

मैंने कहा- कई साल हो गये”

“कितने साल”

मैंने कहा-ठीक-ठीक नही बतला सकता”

तब महात्मा गांधी जी ने कहा-दक्षिण अफ्रीका में जब मेरे पास फाउन्टेन पैन था, परन्तु अब तो कलम से लिखता हु. डच गायना वाले भी क्या कहेगे कि इनके पास घर की कलम भी नही हैं” तुरंत चाक़ू और कलम मंगाई गईं. परन्तु मै जिस कागज पर लिखने चला था, वह था बढ़िया बैक पेपर.

Mahatma Gandhi Story Part-5

महात्मा गांधी जी ने कहाँ यह बढ़िया कागज हम लोगों को कहा से मिल सकता हैं?

यह तुम्हारे ऑफिस वालों को ही मिलता हैं, जहाँ चाय भी मिलती हैं,

हम तो कोरा पानी पीने वाले गरीब आदमी ठहरे. मै लज्जित हो गया,

फिर महात्मा गांधी जी गम्भीर होकर बोले -मेरा संदेश स्वदेशी कागज पर लिखो. आज तो हम लोगों ने आश्रम में कार्ड और लिफ़ाफ़े भी बनवाएं हैं हाथ का बना कागज लाया गया और मैंने नेजे की कलम से और घर की स्याही से महात्मा गांधी का वो संदेश लिखा.महात्मा गांधी अपने अधिनस्थो को पूरी-पूरी स्वाधीनता देते थे. और वे भी उनसे मजाक करने से नही चुकते थे. मै भी यह ध्रष्टता कर बैठता था.

जब श्री पदमजा नायडू के लिए कॉफ़ी का सब सामान लाया गया.

तो बापू ने हंसकर कहा- यह सब तुम्हारा साज-समान हैं.

मैंने कहा- ”देखिए बापू , मेरी वोट हो रही हैं”

”कैसे”

मैंने कहा- महादेव भाई चाय पीते हैं, बां काफी पीती हैं और पदमजा जी भी कोफ़ी पीती हैं और मै चाय, चार वोट हो गयी.

बापू ने तुरंत उत्तर दिया-बुरी चीजों के प्रचार के लिए वोट की जरुरत थोड़े ही पड़ती हैं, वे तो अपने आप फैलती हैं.

महात्मा गांधी जी मजाक में पीछे रहने वाले आदमी नही थे. वे बड़े हाजिर जवाब थे.

एक बार विद्यापीठ के प्रिंसिपल कृपलानीजी बोले- जब हम लोग आपस में दूर रहते हैं, तो हमारी अक्ल ठीक रहती हैं, परन्तु पास होते ही खराब हो जाती हैं’

बापू हंसकर बोले-”तब तो मै आपकी खराब अक्ल का जिम्मेदार मै अकेला ठहरा”

खूब हंसी हुई, कलकत्ते में बापू ने बीस मिनट का टाइम दिया-सवेरे पौने चार बजे का.

Mahatma Gandhi Story Part-6

अकेले जाने की बजाय में 16-17 आदमियों के साथ गया. जब जीने पर चढने लगा, तब महादेव भाई नाराज हुए और बोले” आप तो आश्रम में रह चुके हैं, यह क्या बे-नियम कार्यवाही करते हैं. परन्तु महात्मा गांधी जी ने इतना ही कहा- तुम तो पूरी की पूरी फोज ले आए.

मैंने कहा- क्या करता, ये लोग माने ही नही, मैंने इन्हे वचन दे रखा था कि बापू के दर्शन निकट से कराउगा.

बीस मिनट तक वार्तालाप होता रहा जब प्रार्थना के लिए महात्मा गांधी जी उठे तो मैंने कहा-बापू मै तो ,मासिक पत्र में आपके खिलाफ बहुत कुछ लिखा करता हु” पर बापू बोले- सो तो ठीक हैं, पर कोई सुनता भी हैं? ”सब हंस पड़े”

मुनि श्री जिनविजय ने महात्मा गांधी का एक किस्सा सुनाया था. महात्मा गांधी पहले मोटर से बाहर निकले परन्तु थोड़ी दूर चलकर कोने में अपनी मोटर खड़ी कर ली. इसके दो मिनट बाद ही पंडित मोतीलाल जी नेहरु और मुनि जी की मोटर निकली, मोतीलाल जी ने मुनि से कहा- देखा आपने? महात्मा गांधी जी ने मेरे ख्याल से अपनी मोटर रोक रखी हैं.चलकर उनसे कारण पूछे, पंडितजी ने जब पूछा तो महात्मा गांधी जी बोले” मै नही चाहता था कि आपकों धुल फाक्नी पड़े, मै तो आपकों ज्यादा दिन जिन्दा देखना चाहता हु.

महात्मा गांधी जी के मजाक, हाजिर-जवाबी और उनकी जागरूकता के सैकड़ो किससे हैं, जो उनके भक्तो को सैम-समय पर याद आ जाते हैं. साथ ही अपनी घ्रष्टता का ख्याल करके लज्जा का बोध भी होता हैं.ऐसे अवतारी महापुरुष मर्यादा पुरुषोतम के किसी भी प्रकार के मजाक की हिमाकत तो था, ही परन्तु वे अत्यंत क्षमाशील थे और सबको पूर्ण स्वाधीनता देने के पक्षपाती. उनकी पावन स्मृति में सहस्त्र बार प्रणाम!-बनारसीदास चतुर्वेदी

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