मै चला तुम्हे भी चलना है | Mai Chala Tumhe Bhi Chalna Hai | Hindi Kavita

Mai Chala Tumhe Bhi Chalna Hai | Hindi Kavita

मै चला तुम्हे भी चलना है|
सर काट हथेली पर लेकर बढ़ आओ तो
इस युग को नूतन स्वर तुमको ही देना है.
अपनी क्षमता को आज जरा आजमाओ तो
दे रहा चुनोती समय अभी नवयुवको को
मै किसी तरह मंजिल तक पहले पहुचुगा
इस महाशांति के लिए हवन वेदी पर मै
हँसते हंसते अपने प्राणों की बलि दे जाउगा
तुम बना सकोगे भूतल का इतिहास नया
मै गिरे हुए लोगों को गले लगाउगा
क्यों उंच नीच कुल जाति रंग का भेद भाव
मै रूढ़ीवाद का कल्याण महल ढहाउगा ||

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