मंगलाचरण इन संस्कृत | Mangalacharan In Sanskrit

मंगलाचरण इन संस्कृत | Mangalacharan In Sanskrit

वक्रतुंड महाकाय, सूर्यकोटि समप्रभा
निर्विध्न करू मै देव, सर्वकार्येषु समप्रभा.
गजानंद भूतगणादिसेवितम, कपितथजम्बूफलचारूभक्षणं
उमासुत शोकविनाश्कारकम नमामि विध्नेश्वर पाद पंकजम.
कर्पूरगौंर करुणावतार संसारसार भुजगेन्द्रहारम.
सदा वसंत हर्दियारविन्द, भव भवानीसहित नमामि.
त्वमेव माता च पिता त्वमेव, त्वमेव बन्धुश्च संखा त्वमेव.
त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव, त्वमेव सर्व मम देव देव
लोकाभिराम रणरंगधीर, राजीवनेत्रं रघुवंशनाथम्
कारुप्यरूप करुणाकरत, श्री रामचन्द्र शरण प्रपधो
नीलाम्बुजश्यामल कोमलांग,सीतासमारोपितवामभागम
पाणौ महासायकचारुचाप, नमामिरामं रघुवंशनाथम्
अतुलित बलधामं हैम शैलाभदेहं, दनुजवन कृशानु ज्ञानिनामगर्गन्यम
सकलगुण निधानं वानराणाधीशम, रघुपतिप्रियभक्त वात जात नमामि
मनोजवं मारुततुल्यवेगं, जितेन्द्रियं बुद्धिमता वरिष्ठम.
वातात्मजं भुजनशयन पदमनाभ शुभागंम
लक्ष्मीकांत कमलनयन योगिभिधर्योनगम्यम
वन्दे विष्णु भयभयहर सर्व लोकैकनाथं
करारविन्देन पदारविंद, मुखारविंदेंविनिवेशयन्तम
वटस्य पत्रस्य पुतेश्यान बालं मुकुंद मनसा स्मरामि
वंशी विभूषित करात्रवनीरदाभात पीताम्बरादारुणंविम्बफलाध्रोष्ठात
पूर्णेंदुसुंदरमुखादरविन्दनेत्रात कृष्णातत्पर किमपि त्तव्मंह न जाने
कस्तूरीतिलकं ललाटपटले वक्ष; स्थले कौस्तुभम
नासाग्रे वरमोक्ति कं करतले, वेणु; करे कंकणम
सर्वागे हरिचंदन सुललित, कंठे च मुक्ताविला
गोपस्त्रीपरिवेष्टितो विजयते गोपालचूड़ामणि;
मूक करोति वाचालं पंगु लघयते गिरिम्
यत्कृपा तमहं वंदे परमानन्दमाधवं

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