मंगला गौरी व्रत कथा पूजन विधि एवं महत्व | Mangla Gauri puja vrat mahatv katha mantra udyapan vidhi in hindi

मंगला गौरी व्रत कथा पूजन विधि एवं महत्व | Mangla Gauri puja vrat mahatv katha mantra udyapan vidhi in hindi

मंत्र: ‘कुंकुमागुरुलिप्तांगा सर्वाभरणभूषिताम्। नीलकण्ठप्रियां गौरीं वन्देहं मंगलाह्वयाम्।।

इस मंत्र के साथ सावन महीने में मंगला गौरी व्रत किया जाता हैं. इस दिन गौरी व हनुमान जी की पूजा आराधना किये जाने का प्रावधान हैं. हिन्दू धर्म की मान्यता के अनुसार गौरी मंगला व्रत कुवारी तथा शादी शुदा औरतों द्वारा किया जाता हैं. इस मंगलवार को व्रत रखने से कुवारी कन्याओं को मनोवांछित वर की प्राप्ति होती है, तथा शादीशुदा महिला का दाम्पत्य जीवन कष्ट रहित व्यतीत होता हैं, तथा अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती हैं. ऊपर बताए गये मंत्र के अनुसार मंगला गौरी व्रत के दिन शिव, मंगला गौरी और हनुमान जी का षोडशोपचार पूजा आराधना करनी चाहिए.

मंगला गौरी व्रत कथा पूजन विधि एवं महत्वमंगला गौरी व्रत कथा पूजन विधि एवं महत्व

Mangla Gauri puja vrat mahatv katha mantra udyapan vidhi in hindi

मंगला गौरी पूजन विधि- गौरी व्रत सावन में जितने भी मंगलवार आते है रक्खा जाता है इस दिन गौरी जी की पूजा करनी चाहिए यह व्रत मंगलवार को किया जाता है इस कारण इसको मंगला गौरी व्रत कहते है यह व्रत स्त्रियो के लिए है पूजा करने से पहले स्नान कर लेवे.

उसके बाद एक पट्टे पर लाल एवं सफ़ेद कपड़ा रखे. सफेद कपड़े पर चावल की 9 किलों और लाल कपड़े पर गेहूं की 16 छोटी छोटी ढेरी बना देवे. उसी पट्टे पर थोड़े से चावल रख कर गणेश जी को रख देवे तथा पट्टे के एक कोने में गेहूं रखकर उस पर कलश में जल रख देवे.

एक आटे का चौमुखा दीपक जलावे १६ धुपबत्ती जलावे फिर पूजा करने के लिई संकल्प लेवे सबसे पहले गणेश जी की पूजा करे उन पर पंचामृत ,जनेऊ ,चन्दन ,रोली ,सिंदूर ,सुपाड़ी ,लौग ,पान ,चावल ,फूल ,इलाइची ,परसाद ,बेल-पत्र ,फल मेवा और  दक्षिणा चढ़ावें और उनकी आरती उतार लेवें.

फिर कलश की पूजा करे, कलश को जल से भर लेवे उसमें आम की डाल भी लगावे. एक सरवा (सकोरा) में गेहूं का आटा रखकर उस पर सुपारी रखे और दक्षिणा रखे उसे आटे में दबा देवे.फिर बेल पत्र नही चढ़ावे. इसके बाद जो चावल की 9 ढेरियाँ बनाई थी, उनकी कलश की तरह पूजा करे उनको नौ ग्रह कहते हैं.

इसके बाद 16 जगह पर जो गेहूं रखे थे, उनकी पूजा करे. उनकों षोडश मातृका कहते हैं. इन पर खाली जनेऊ नही चढ़ावे. हल्दी, मेहँदी तथा सिंदूर चढ़ावे. इन सबकी पूजा कलश और गणेश जी के अनुसार ही होती हैं. इसके बाद कलाई लेकर पंडित जी के बाँध दे. तथा फिर पंडित जी से अपने हाथ में बंधवा ले.

तदन्तर मंगला गौरी का पूजन करे. मंगला गौरी के पूजन के लिए एक थाली में चकला रख ले. उस पर गंगा जी की मिटटी से गौरी की मूर्ति काढ़ ले या मूर्ति बनाले. आटे की एक लोई बनाकर रख ले. पहले मंगला गौरी की मूर्ति को जल, दूध, दही, घी, चीनी, शहद आदि का पंचामृत बनाकर स्नान करावे.

स्नान करा कर कपड़े पहनावे और नथ पहनाकर रोली, चन्दन, सिन्दूर, हल्दी, चावल, मेहँदी, काजल लगाकर 16 तरह के फूल चढ़ावे 6 माला 16 तरह के पत्ते चढ़ावे, 16 आटे के लड्डू 16 फल, ५ तरह की मेवा, 16 बार चढावे, 16 बार 7 तरह का अनाज, 16 जीरा, 16 धनियाँ, 16 पान, 16 सुपारी, 16 लौंग, 16 इलायची, 1 सुहाग की डिब्बी में तेल, रोली, मेहँदी, काजल, हिंगुल, सिंदूर, कंघा, शीशा, 16 चूड़ी, एक रुपया और दो बंदी. उस पर दक्षिणा चढावें, फिर कहानी/व्रत कथा सुने, चौमुखा, दीपक बनाकर उसमें 16 तार की चार बत्ती बनावें और कपूर से आरती उतारे फिर परिक्रमा करे.

16 लड्डुओं का वायना सासुजी के पाय लगाकर देवे. इसके बाद भोजन कर लेवे. इसमें एक ही अनाज की रोटी खानी चाहिए, नमक नही खावें. दुसरे दिन मंगला गौरी को तालाब या कुआँ के पास विसर्जन करके भोजन करे.

मंगला गौरी व्रत मंत्र (mangla gauri vrat mantra)

  1. शिव मंत्र (Shiva Mantra): ॐ ह्रं कामदाय वर्प्रियाय नमः शिवाय।
  2. मंगला गौरी मंत्र (Mangala Gauri Mantra): ह्रीं मंगले गौरि विवाहबाधां नाशय स्वाहा।
  3. हनुमान मंत्र (Hanuman Mantra): क्रौं बीजात्मा नयनयोः पातु मां वानरेश्वरः हं हनुमते नमः।

मंगला गौरी व्रत की व्रत विधि मान्यताएं व महत्व (Mangla Gauri puja vrat mahatv katha udyapan vidhi)

  • मंगला गौरी का व्रत रखने तथा उपाय करने से इंसान को सुख सौभाग्य एवं सम्रद्धि की प्राप्ति होती हैं.
  • इस दिन विशेष रूप से नव दम्पति बंधन में बंधने वाली स्त्री व्रत रखकर गौरी व हनुमान जी का व्रत रखकर उनकी कथा सुनती हैं.
  • इस व्रत को मोराव्रत भी कहा जाता हैं, जो कुवारी कन्या यह व्रत को धारण करती हैं उसको अच्छा व योग्य वर मिल जाता है, शादी को लेकर आ रही अड़चने दूर हो जाती है, देवी गौरी (पार्वती) की पूजा करने से उन्हें शिव जैसा योग्य वर मिल जाता हैं, हिन्दुओं में शिवजी को सबसे अधिक सुयोग्य वर माना जाता हैं.
  • गौरी व्रत कब आता है? (Gauri vrat Date 2018)

    मंगला-गौरी व्रत की तारीख 2018 में इस पर्व को इन तिथियों को मनाया जाना हैं.

     तारीख  वार  प्रमुख मंगला गौरी व्रत
    28 July 2018 Saturday प्रथम श्रावना तिथि
     31 July 2018 Tuesday  मंगला गौरी व्रत
    07 August 2018 Tuesday  मंगला गौरी व्रत
    August 14, 2018 Tuesday  मंगला गौरी व्रत
    21 August 2018 Tuesday  मंगला गौरी व्रत
    26 August 2018 Sunday  श्रावण की आखिरी तिथि
  • गौरी व्रत कथा (Gauri vrat katha) की कोई विशेष कथा नहीं है. इसके पीछे सती के अवतार के रूप में देवी पार्वती का जन्म तथा शिव को पति के रूप में पाने के लिए मंगला गौरी का व्रत रखती हैं. तदोपरान्त उनका विवाह भोलेनाथ से हो जाता हैं. इसी परम्परा पर चलते हुए आज भी कुवारी कन्याएं अच्छे वर की प्राप्ति के लिए इस व्रत को धारण करती हैं.

मंगला गौरी पूजा व्रत कथा मंत्र व उद्यापन विधि | Mangla Gauri Vrat Puja Vidhi in hindi

मंगला गौरी व्रत पूजन सामग्री (Material of Mangla Gauri Vrat Puja)

गौरी व्रत-पूजन के लिये निम्न सामग्री चाहियें.

लोग, जीरा, धनिया,फूलों की माला, सुपारी, इलायची, फल, लड्डू, पान, रोली, नारियल इत्यादि सभी वस्तुएं 16 सोलह होनी होनी चाहिए, इसके अतिरिक्त पांच प्रकार के मेवे तथा 16 प्रकार की चुडिया सात प्रकार के धान सभी धान के 16-16 कण अथवा मात्रक के रूप में लेना चाहिए.

मंगला गौरी व्रत कैसे करें (How to Perform Mangla Gauri Vrat)

इस मंगला गौरी व्रत के लिए पूर्व से सावन के सोमवार के सांयकाल से ही गौरी व हनुमान जी से व्रत रखने का संकल्प करना चाहिए, इसके पश्चात निर्धारित तिथि (सावन का प्रथम मंगलवार) के दिन सूर्य उदय से पूर्व उठकर दातुन, करके नहा धोकर अपने नित्य कर्मों से निवृत होने के पश्चात सफ़ेद व लाल रंग के वस्त्र में मंगला गौरी व बजरंग बली की तस्वीर को घर के पूजा स्थल में स्थापित करे. इसे गद्दे अथवा लकड़ी के बाजोट पर रखा जा सकता हैं. स्नानादि करने के बाद मिट्टी अथवा गेहूं के आटे से बने दीपक को चार बातियों के साथ प्रज्वलित करना चाहिए. शेष व्रत क्रिया विधि व व्रत कथा का उल्लेख ऊपर किया जा चूका हैं.

READ MORE:-

Please Note :- अगर आपको हमारे Mangla Gauri puja vrat mahatv katha mantra udyapan vidhi in hindi अच्छे लगे तो जरुर हमें Facebook और Whatsapp Status पर Share कीजिये.

Note:- लेख अच्छा लगा हो तो कमेंट करना मत भूले. These Mangla Gauri puja vrat mahatv katha used on:- मंगला गौरी व्रत कथा पूजन विधि एवं महत्व इन हिंदी, mangla gauri vrat, mangala gauri pooja, mangalagaur information.

Leave a Reply