मासिक दुर्गा अष्टमी व्रत कथा व्रत एवं पूजा विधि महत्व इन हिंदी | Masik Durga Ashtami Vrat Katha Vrat Vidhi In Hindi

मासिक दुर्गा अष्टमी व्रत कथा व्रत एवं पूजा विधि महत्व इन हिंदी | Masik Durga Ashtami Vrat Katha Vrat Vidhi In Hindi

दुर्गा अष्टमी कब है 2018:- 17 अक्टूबर 2018 को भारत में मासिक दुर्गा अष्टमी का व्रत रखा जाएगा. इस साल नवमी तथा अष्टमी दोनों एक ही दिन हैं. हिन्दू धर्म में शक्ति की देवी माने जाने वाली माँ दुर्गा के नौ रूपों की इस दौरान पूजा की जाती हैं. शारदीय नवरात्र के आठवें दिन शुक्ल अष्टमी तिथि को दुर्गा अष्टमी का व्रत पड़ता हैं. मनुष्य अपनी मनोकामनाएं पूर्ण करने के लिए इस दिन व्रत रखकर माँ दुर्गा के नौ रूपों की पूजा करते हैं.मासिक दुर्गा अष्टमी व्रत कथा व्रत एवं पूजा विधि महत्व इन हिंदी | Masik Durga Ashtami Vrat Katha Vrat Vidhi In Hindi

मासिक दुर्गा अष्टमी व्रत पूजा विधि (Masik Durga Ashtami Vrat pooja Vidhi)

यह त्यौहार आश्विन शुक्ल पक्ष की अष्टमी को आता हैं. इस दिन देवी दुर्गा की पूजा की जाती हैं. भगवती दुर्गा को उबाले हुए चने, हलवा, पुड़ी, खीर, पुआ आदि का भोग लगाया जाता हैं. कई लोग इस दिन महाशक्ति को प्रसन्न करने के लिए हवन आदि भी करते हैं. जहाँ शक्ति को अधिक मान्यता दी जाती हैं वहां बहुत बड़ा उत्सव मनाया जाता हैं. इस दिन कन्या लांगुरा जिमावें, देवी जी की जोत करे.

शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री ये दुर्गा देवी के नौ रूप हैं. नवरात्रि के नौ दिनों तक इन सभी रूपों की पूजा की जाती हैं. दुर्गा अष्टमी के दिन विशेष रूप से माँ दुर्गा के महागौरी रूप का पूजन किया जाता हैं. यह देवी का सबसे छोटा रूप है एक नन्ही बालिका के रूप में इन्हें दर्शाया जाता हैं. महागौरी की मूर्ति में उन्हें एक बैल पर सफेद रंग की साडी में दिखाया जाता हैं.

दुर्गा अष्टमी की पूजा सामग्री में लाल फूल, लाल चन्दन, दीया, धूप को शामिल किया जाता हैं. क्षत्रिय लोगों द्वारा इस दिन अपने अस्त्र शस्त्रों की पूजा कर उनका प्रदर्शन किया जाता हैं. मासिक दुर्गा अष्टमी का व्रत रखने वालों को इस दिन जल्दी उठकर माँ की पूजा कर उन्हे गूलाब का फुल, केला, नारियल, पान के पत्ते, लोंग, इलायची, सूखे मेवे, मिठाई में से कोई एक चीज प्रसाद स्वरूप चढाई जाती हैं.

“सर्व मंगलाय मांगल्ये, शिवे सर्वथा साधिके
सरन्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणी नमोस्तुते”

इस मंत्र के उच्चारण के साथ ही तैयार पंचामृत को वेदिका पर चढ़ाकर ज्योति जलाई जाती हैं. गुलाब के फूल तथा चावल के दाने चढ़ाकर माँ दुर्गा की आरती व भजन किए जाते हैं. नवरात्रि की घट स्थापना के साथ ही कही कही स्थानों पर मिट्टी के बर्तन में बीज उगाने की प्रथा हैं. दुर्गा अष्टमी तक वो बीज काफी बड़े हो जाती हैं माँ को प्रसाद स्वरूप इन्हें चढ़ाकर सभी परिवार के सदस्यों के बिच इन्हें वितरित कर दिया जाता हैं. माना जाता हैं कि इन बीजों को अगले साल दुर्गाअष्टमी तक अपने पास रखने से सुख सम्रद्धि एवं समस्त क्लेशों का नाश होता हैं.

मासिक दुर्गा अष्टमी का व्रत स्त्री पुरुष दोनों के करने का विधान हैं. इस दिन के व्रत में माँ के भक्त बेहद सादगीपूर्ण जीवन बिताते हैं, दूध या फलाहार के अतिरिक्त कुछ न सेवन करना, मॉस से बने किसी व्यजंन को न खाना और न ही इस दिन घर में लाना चाहिए. ऐसा करने से देवी रुष्ट हो सकती हैं. वर्ष के १२ महीनों की अष्टमी तिथि को ही यह व्रत रखा जाता हैं इसलिए इसे मासिक दुर्गा अष्टमी कहा जाता हैं. 2018 में दुर्गा अष्टमी कब हैं सम्पूर्ण तिथि वार की जानकारी नीचे दी गई हैं.

मासिक दुर्गा अष्टमी व्रत कथा और इतिहास (Masik Durga Ashtami Vrat Katha & History In Hindi)

हिन्दुओं के प्राचीन शास्त्रों के अनुसार देवी नौ रूपों में प्रकट हुई हैं. उन सब रूपों की पृथक पृथक कथा इस प्रकार हैं.

मार्कण्डेय पुराण के मुताबिक़ बहुत समय पूर्व की बात हैं, जब देवताओं तथा दानवों के मध्य युद्ध चल रहा था. दुर्गम नामक दैत्य बड़ा ही क्रूर एवं शक्तिशाली था. जिसने अपनी चतुराई एवं पराक्रम के बल पर देवताओं को पृथ्वी और पाताल लोक दोनों स्थानों पर बुरी तरह पराजित कर दिया. देवताओं के पास भागने के सिवाय कोई विकल्प नही था. क्रूर दैत्य से भयभीत देवगण त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु महेश) से मिलने के लिए कैलाश पर्वत पर पहुचे. देवताओं ने आपबीती उन्हें सुनाई.

दुर्गम का वध करने के लिए देवों ने एक तरकीब सोची तथा सभी की संयुक्त शक्ति से आश्विन शुक्ल अष्टमी (दुर्गा अष्टमी के दिन) पृथ्वी लोक पर एक देवी का अवतरण किया, जिन्हें माँ दुर्गा के रूप में जाना जाता हैं. देवों की स्तुति पर महा दुर्गा ने दुर्गम राक्षस का वध कर देवों को अपना राज्य वापिस दिलाया तथा मनुष्यों के कष्टों के हरण किया. दुर्गम राक्षस के वध के कारण ही इन्हें दुर्गा कहा जाने लगा.

मासिक दुर्गा अष्टमी का महत्व (masik durga ashtami vrat ka mahatva & Importance in hindi)

दुर्गा, काली, भवानी, जगदम्बा, जगतजननी, नव दुर्गा इन सभी नामों से भक्त माँ दुर्गा को बुलाते हैं. मासिक दुर्गा अष्टमी तिथि के एक दिन पूर्व व्रत का संकल्प कर व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्वच्छ वस्त्र धारण कर माँ की पूजा की जाती हैं. विधि पूर्वक दुर्गा का व्रत करने से माँ सभी संकटों को हरती हैं तथा भक्तों के जीवन को मंगलमय बनाती हैं.

इस दिन माँ अपने भक्तों से विशेष रूप से प्रसन्न रहती हैं. पूजा पाठ, भजन संध्या, आरती तथा दिन में दो वक्त की पूजा से हमारे जीवन में दिव्य प्रकाश, सुख समृधि, कारोबार में लाभ, विकास, सफलता और शांति की प्राप्ति होती है. तथा काया के समस्त कष्ट व बीमारियों का नाश हो जाता हैं. माँ को खुश करने के लिए उनके स्वरूप 6 से 12 वर्ष की कन्याओं को इस दिन अच्छे वस्त्र पहनाकर पूजा कर अच्छे पकवान खिलाकर दान आदि देकर विदा करने से मासिक दुर्गा अष्टमी की पूजा सम्पूर्ण मानी जाती हैं.

दुर्गा अष्टमी के दिन का महत्व (Masik Durga Ashtami Importance)

मासिक दुर्गा अष्टमी व्रत करने के पीछे कई तथ्य छुपे हुए हैं. इसका धार्मिक महत्व यह हैं कि इस दिन व्रत कर दुर्गा की पूजा करने से देवी का आशीर्वाद सदा बना रहता हैं तथा किसी तरह की कमी नही होती हैं. इसी दिन देवी ने किसी से पराजित न होने वाले महिषासुर नामक दानव का नाश किया था.

रावण वध से पूर्व भगवान श्रीराम जी ने भी शक्ति की अधिष्ठात्री देवी दुर्गा के नवरात्र कर उनका पूजन किया था. अच्छे भाग्य की प्राप्ति तथा रोग मुक्त देह की प्राप्ति के लिए मासिक दुर्गा अष्टमी का व्रत किया जाता हैं.

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