Mera Ghar Essay in Hindi – मेरा घर पर निबंध

Mera Ghar Essay in Hindi आज हम सभी के चिर परिचित विषय मेरा घर पर निबंध आपके साथ साझा कर रहे हैं. 5 लाइन, 10 लाइन, 100, 200, 250, 300 और 500 शब्दों में Mera Ghar Essay in Hindi में कक्षा 1,2,3,4,5,6, 7, 8 और 9 व 10 वीं क्लास के स्टूडेंट्स के लिए छोटा बड़ा घर पर निबंध यहाँ बता रहे हैं.

Mera Ghar Essay in Hindi 100 WordsMera Ghar Essay in Hindi

Short Essay On Mera Ghar Essay in Hindi Language For Class 1,2,3,4,5हर इंसान को सच्चा सुख तथा सुकून अपने ही आशियाने में मिलता है. घर चाहे छोटा हो या बड़ा कच्चा हो या पक्का उसमें जो अपनेपन का लेबल लगा रहता है वह दिल के बेहद करीब होता हैं. मैं एक मध्यम वर्गीय परिवार से आता हूँ मेरा घर भी बेहद छोटा है जयपुर के शास्त्री नगर इलाके के एक छोटे से घर में रहता हूँ जहाँ पिछले कई दशकों से मेरे माता पिता तथा दादा दादी रहते हैं.

शहर के अन्य घरों से अलग एक मंजिला मेरा घर धरती माँ की गोदी में बसे स्वर्ग की तरह है जिसमे दो बैठक कक्ष 3 शयनकक्ष एक रसोई बनी हुई हैं.

हमारे घर में पढने के लिए एक अलग कमरा हाल ही बनाया गया है जिसे हम अध्ययनालय के नाम से पुकारते है यहाँ हम सब भाई बहिन बैठकर पढ़ते हैं. मेरे घर में एक अतिथिघर भी बना हुआ है जहाँ आम तौर पर हमारे रिश्तेदार आने पर रहते है अथवा घर के बड़े बुजुर्ग आराम करते हैं.

शहर की तंग गलियों से दूर खुले में निर्मित मेरा घर काफी हवादार हैं. जो संगमरमर के पत्थर से बना है जिसकी फर्श को टाइल्स के साथ बनाया गया हैं. हमारा घर सजावट के लिहाज से किसी दर्शनीय स्थल से कम नहीं हैं. एक बार कोई आ जाए तो उसका आधा घंटा दीवारों पर लगी खूबसुरत तस्वीरों को देखने में ही गुजर जाता हैं. हमारी माताजी घर को साफ़ सुथरा रखने का विशेष तौर पर ख्याल रखती हैं.

यही वजह है कि कही भी कूड़ा करकट आदि नजर नहीं आता हैं. घर से ही छटा एक छोटा बगीचा भी हैं जिनमें हरियाली देखने से ही मन भरा जाता हैं. खुशबूदार फूल मुझे हर सुबह और शाम यहाँ खीच ही लाते हैं. मैं स्वेच्छा से अपने पौधों की क्यारियों में पानी डालता हूँ. भले ही छोटा ही सही मेरा घर अपने इलाकों के सबसे सुंदर घरों में गिना जाता हैं. घर में प्रवेश करते ही मन में जो शांति का भाव जगता है मानों किसी तीर्थ यात्रा में गये हो.

Mera Ghar Essay in Hindi 250 words For Class 5,6,7,8

Ghar Essay in Hindi – मेरा घर निबंध my home essay in hindi paragraphवह घर ही होता है जिसमें सभी अपनों का प्यार बसा माता होता हैं. जिनमें माता पिता भी साथ रहते हो तो फिर वह स्वर्ग से कम नहीं लगता हैं. यह कतई मायने नहीं रखता कि घर बड़ा है अथवा छोटा बस घर तो घर ही होता हैं. वो शांति की मंजिल होती है जहाँ परिवार के सभी सदस्य दिन के ढलने तक पहुचने की कामना करते हैं.

व्यक्ति के मन की शांति तथा सुरक्षा के भाव तो घर में ही मिलते हैं. दुनियां में कोई किसी की कद्र नहीं करता किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता आप कहा है तथा कैसे है मगर एक घर और घरवाले ही जिन्हें हर दम एक दूसरे की चिंता रहती हैं. यही वजह है कि नियत समय तक घर नहीं पहुचने पर तुरंत फोन की घंटी बजने लगती है तथा वह फोन भी घर से ही होता हैं.

घर आकर हम अपनों के बीच समय व्यतीत करते हैं. अपने शरीर की साफ़ सफाई देखभाल नियमित तौर पर घर में ही हो सकती हैं. आपने भी घर का महत्व कभी अनुभव तो किया ही होगा, जब एक रात आप बाहर रहे होंगे उस दिन आपकों गहरी नीद नही आई होगी. अपने बेडरूम में तो बिस्तर पर लेट जाते ही नीद आ जाया करती थी.

घर में जब भी दिमाग पर वजन बढने लगता है हम बच्चों के साथ खेलने के लिए निकल जाते है अथवा पूजा घर में जाकर भगवान की पूजा अर्चना करते हैं. सर्दी के मौसम में शरीर को सेकने के लिए चारपाई या कुर्सी लेकर छत पर चले जाते हैं.

मेरा घर सजावटी सामान से अटा पड़ा हैं हमारे बैठक हॉल में टीवी लगा हैं जब परिवार के सभी सदस्य काम से फ्री हो जाते हैं तो हम सभी साथ बैठकर इसी कमरे में टीवी देखते हैं. देर रात एक साथ साथ बैठे मस्ते करते हैं फिर सोने के लिए चले जाते हैं.

हमारा घर तीज त्यौहार तथा उत्सव के अवसर पर दुल्हन की तरह सज जाता हैं. हमारे पड़ौसी भी इस दिन मेहमान बनकर आते हैं. तथा गली मोहल्ले के सभी बच्चें उत्सव की रौनक को कई गुणा तक बढ़ा देते हैं. बड़ी बहिन नित्य घर के आंगन में रंगोली बनाती हैं. मेरा घर एक पवित्र मन्दिर की तरह है जहाँ हम सभी परिवार के सदस्य हर्ष उल्लास के साथ एक दूसरे का सहयोग करते हुए जीवन जीते हैं.

मेरा घर पर निबंध हिंदी भाषा में – Essay on my house in Hindi language

मैं एक ग्रामीण परिवेश में पला बड़ा हुआ हैं. मेरा घर आधुनिक घरों की तुलना में कई तरीकों से भिन्न हैं. राजस्थान के सुदूर इलाकों में गाँव से कुछ ही दूरी पर मरुभूमि में मेरा घर हैं, जिसे कब बनाया गया इसका मुझे कोई अंदाजा नहीं हैं. क्योंकि मेरा घर काफी पुराना है जिसका निर्माण दादाजी ने करवाया था.

भले ही घर में कुछ ईमारते तथा भवन पुराने तथा जर्जर हो मगर उनमें बसने वाले मेरे परिवार के लोगों के मध्य मुझे यह दुनियां का सबसे अच्छा घर लगता हैं. चूने तथा पत्थर से निर्मित घर पर लाल गुलाबी रंग की पुताई की गई हैं. इसी घर में मेरा एक कमरा भी है जिसे मैंने देवताओं के तस्वीरों के साथ सजाकर एक मन्दिर का स्वरूप दिया है मेरा अधिकांश समय इसी रूम में निकलता हैं.

मेरे घर में पिताजी तथा चाचाजी का परिवार बसता है कुल मिलाकर 12 सदस्य हम बड़े प्यार के साथ मिलजुलकर यहाँ रहते हैं. कई बार परिवार के सदस्यों के मध्य आपसी मन मुटाव भी हो जाते हैं. मगर वे दीर्घकालीन ना होकर एक दूसरे को मनाकर खुश कर देने पर समाप्त भी हो जाते हैं.

घर और परिवार से व्यक्ति को सबसे बड़ा लाभ यह होता है कि उनमें सामूहिक सुरक्षा का भाव रहता हैं. एक अच्छे घर तथा मोहल्ले में उसे असुरक्षा का भाव रहता हैं बीमार होने पर सभी उनके लिए चिंतित रहते हैं. साथी सदस्य उनका इलाज करवाते हैं उनकी हर तरह से मदद की जाती हैं.

वही दूसरी ओर किसी तरह के लड़ाई झगड़े में भी परिवार तथा पडौस के लोग ही उनकी सुरक्षा कवच होते हैं. सुख तथा दुःख दोनों में ही घर के लोग ही काम आते हैं. हमारे घर में सभी सदस्यों के लिए अलग अलग कमरा है तथा सभी के लिए एक ही पूजा घर रसोई, खेल का मैदान तथा बगीचा हैं.

हमारी माताजी तथा चाची परिवार के सभी सदस्यों के लिए मिलजुलकर खाना बनाने का काम करती हैं. दादीजी अपना अधिकतर समय पूजा पाठ तथा अपनी पोतियों के साथ मौज मस्ती में ही व्यतीत करती हैं. मैं स्कूल से आने के बाद खाना खाकर अपने दोस्तों तथा भाइयों के साथ खेलने के लिए मैदान में चले जाते हैं.

रात पड़ने तक हम क्रिकेट खेलते है जिसके बाद घर के बगीचे में हमारी ड्यूटी लगती है जहाँ पौधों को पानी पिलाने का कर्तव्य मेरा ही हैं. यह काम खत्म करके मैं अपने अध्ययन कक्ष की और लौटता हूँ कुछ घंटे की पढाई के बाद रात्रि का भोजन करने के बाद घर के सभी लोग टीवी देखने के लिए बड़े हॉल में चले जाते है तथा देर रात तक टीवी देखने के बाद सभी अपने अपने कमरे में सोने के लिए चले जाते हैं.

चूँकि हमारा घर एकमंजिला है इसलिए घर की छत काफी बड़ी है यहाँ तक पहुचने के लिए लोहे की सीढियों को तैयार किया गया हैं. मेरे दादाजी को किताबे पढ़ने का शौक हैं. वे अपने खाली समय में छत के ऊपर बने छोटे से पुस्तकालय में आकर पढ़ते है कई बार वे मुझे भी अपने साथ ले आते है तथा अपने पसंद की किताब मुझे पढकर सुनाने के लिए कहते हैं. मैं घंटों तक दादाजी को आख्यान देता हूँ फिर वो मुझे शाबास कहकर खेलने के लिए भेज देते हैं.

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