Mera Priya Kavi Tulsidas Essay In Hindi : मेरा प्रिय कवि हिंदी निबंध

Mera Priya Kavi Tulsidas Essay In Hindi: हिंदी में अनेक विद्वान कवि हुए है, जिनकी कल्पना शक्ति एवं लेखन विद्वता से आज सारा हिंदी प्रदेश लाभान्वित हो रहा है. अपनी अपनी रूचि के अनुसार किसी को कोई कवि प्रिय लगता है, और किसी को और कोई, Mera Priya Kavi Tulsidas जी रहे है, जिसके बारे में मै Essay बता रहा हु.

मेरा प्रिय कवि हिंदी निबंधTulsidas

Mera Priya Kavi Tulsidas Essay In Hindi

हर व्यक्ति की रुचियाँ अपनी अपनी होती है. किसी को कोई वस्तु या व्यक्ति प्रिय लगता है, तो दूसरा कोई अन्य अच्छा लगता है. हिंदी में अनेक महान कवी हुए है. सबकी अपनी अपनी विशेषताएं है, अतः जिसे जो विशेषता भाति है उसी आधार पर वह किसी विशेष कवि या लेखक से प्रभावित हो जाता है.

तुलसी बचपन में ही माता-पिता के स्नेह से वंचित हो गये, उनका बचपन बड़े कष्टों में बीता. संत नरहरिदास ने उन्हें अपना शिष्य बनाया, इनका विवाह रत्नावती से हुआ. पत्नी के ताना देने पर उनका मन संसार से उचट और उन्होंने सारा जीवन भगवान् राम की भक्ति में लगा दिया.

तुलसीदासजी की प्रमुख रचनाएँ रामचरितमानस, विनयपत्रिका, कवितावली, गीतावली, दोहावली, बरवै रामायण आदि है. इनमे रामचरितमानस ही वह महान ग्रंथ है जिसने तुलसी को अमर बना दिया. आज भी यह ग्रन्थ करोड़ो भारतीयों का पवित्र धर्म ग्रंथ है.

प्रिय लगने का कारण- तुलसीदासजी ने घोर संकटो हिन्दू धर्म को आशा और विश्वास का दृढ आधार प्रदान किया. भगवान राम के लोक रक्षक चरित्र का गान करके उन्होंने समाज को बिखरने से बचाया. तुलसीदासजी ने अपनी रचनाओं में सभी के लिए आदर्श प्रस्तुत किये है. पिता कैसा हो, राजा, प्रजा, भाई, मित्र सभी के आदर्श रूप सामने रख दिए है, कुछ उदहारण देखने योग्य है.

आदर्श राजा –जासु राज प्रिय प्रजा दुखारी ,सो नृप अवसि नरक अधिकारी .

मित्र –जे न मित्र दू;ख होई दुखारी ,तिन्ही विलोकत पावक भारी ..
काव्य –कला की द्ष्टि से भी उनकी रचनाएँ अत्यत उच्च कोटि की है यही कारण है कि मुझे तुलसी प्रिय लगते है उपसहार —तुलसी का कहना हैं. कि –
कीरति, भनिति, भूति, भल सोई
सुर सरी सम सब कह हित होई
अर्थात वही कीर्ति ,कविता ,वैभव श्रेष्ट है जिससे गंगा के सबका हित हो .इसी आदर्श को सामने रखकर तुलसी चले है.यही कारण कि वह केवल मेरे ही नहीं अपितु विश्व में कोटि -कोटि लोगों के प्रिय बने हुए है.

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