मेरे सपनों का भारत कैसा हो | Mere Sapno Ka Bharat

Mere Sapno Ka Bharat/ India of my dreams मानव विचारशील प्राणी है. वह एकांत में हो या सामाजिक जीवन में हो, कुछ न कुछ सोचता विचारता रहता है. उसके विचार कभी अपने तक ही सिमित रहते है तथा कभी समाज व राष्ट्र तक भी फ़ैल जाते है. मै कभी कभी घर गृहस्थी, रोजगार व्यवसाय तथा आत्मिक जनों के विषय में विचार न करके सोचा करता हू, इक्कीसवीं सदी में मेरे सपनों का भारत कैसा हो/ कैसा बनेगा, कितना समर्द्ध रहेगा, यदि मेरे सपनों का भारत बन जाए तो कितना अच्छा रहे.

मेरे सपनों का भारत कैसा हो | Mere Sapno Ka Bharat

  • भारत के प्रति मेरी भावना (My feeling towards India)

    नव विकासशील लोकतंत्रात्मक भारत को लेकर मेरे मन में अनेक विचार उठते है, अनेक कामनाएं एवं सपने सजते रहते है. मै भी कभी कभी अपनी कल्पनाओं के पंख फैलाने लगता हु तथा अपनी कल्पनाओं के भारत का निर्माण करने की ठान लेता हु.

    इस कारण मै सोचता हु कि यदि इक्कीसवीं सदी में मेरे सपनों का भारत हो जाए, तो कितना सुखद भविष्य हो जाए.

  • इक्कीसवीं सदी का भारत (Short Essay On India In 21st Century)

    मै ऐसें भारत की कोशिश करुगा जिसमे गरीब लोग भी महसूस करे, वह उनका देश है जिसके निर्माण में उनकी आवाज का महत्व है. मै ऐसें भारत के लिए कोशिश करुगा, जिसमे ऊँचे और नीचे वर्गों के लिए कोई भेद नही होगा. और जिसमे विभिन्न सम्प्रदायों का आपसी मेलजोल होगा. ऐसें भारत में अस्प्रश्यता तथा शराब और दूसरी नशीली चीजों के अभिशाप के लिए कोई स्थान नही हो सकता, उसमे स्त्रियों को वही अधिकार होंगे जो पुरुषों को होंगे. शेष सारी दुनियाँ के साथ हमारा सम्बन्ध शांति का होगा. यह है मेरे सपनों का भारत.
    – महात्मा गांधी के विचार

    इक्कीसवीं सदी का शुभारम्भ हो चूका है. इक्कीसवीं सदी में मेरे सपनों का भारत कैसा होगा, उसमें किन बातों की वृद्धि होगी, उन्हें यहाँ इस प्रकार रेखांकित किया जा सकता है. मेरे सपनों के भारत में चारों ओर समता, भ्रातत्व, स्नेह एवं सदाचार का बोलबाला होगा.

    मेरी आकाक्षा है कि ऐसा भारत हो, जिसमें न तो गरीबी रहे और न ही आर्थिक विषमता रहे. प्रत्येक व्यक्ति सम्पन्न हो तथा सबका जीवन सभी प्रकार से सुखी हो. धन का समान वितरण हो, बड़े बड़े पूंजीपति स्वयं धन की लिप्सा छोड़कर कमजोर वर्ग की सहायता करे और प्रत्येक व्यक्ति उतने ही धन का अर्जन करे, जितने से उसका काम आसानी से चल सके और दूसरों का भी शोषण न हो.

    प्रत्येक व्यक्ति अपना रोजगार चला सके और अपने पैरों पर खड़ा होकर स्वावलम्बी बन सके, इसके साथ ही जातिगत उंच नीच की स्थति न रहे धर्म की आड़ में साम्प्रदायिकता न हो. मै सोचता हु कि इक्कीसवी सदी के भारत में भ्रष्टाचारियों को समाप्त करने के लिए कठोर दंड का विधान होगा और भ्रष्ट व्यापारियों, कालाबाजारी करने वालों, रिश्वतखोरों, चोर डाकुओं और मुनाफाखोरों के लिए भी कठोर दंड की व्यवस्था होगी.

    मेरे सपनों के भारत में सभी तरह के रोगों से जनता को मुक्ति मिले, अकाल अतिवृष्टि या प्राकृतिक प्रकोप नही होवे, सभी शिक्षित हो तथा सभी का जीवन उन्नत खुशहाल हो, यही मेरी कामना है.

  • प्रगतिशील भारत की कामना (Progressive India wished)

    आज का युग विज्ञान का युग है दुनिया के अन्य राष्ट्रों में विज्ञान के नए आविष्कार हो रहे है. शुक्र और मंगल गृह की यात्रा पर जाने की तैयारियां हो रही है. मै कामना करता हु कि हमारे भारत में विज्ञान के क्षेत्र में अत्यधिक प्रगति हो. आने वाले समय में भारत में अनेक उद्योग स्थापित किये जाए उनकी उत्पादन की दर इतनी बढ़ाई जाए कि भारत निर्यात की स्थिति में आ जाए.

    ऐसा होने पर जहाँ विदेशी आय प्राप्त होगी, वही राष्ट्रिय जीवन में भी आय के स्त्रोत बढ़ेगे और इससे जनता के जीवन स्तर में उतरोतर वृद्धि होगी. अतः मै चाहता हू कि इक्कीसवीं सदी में ऐसें भारत का निर्माण हो, जिसमे शैक्षिक, आर्थिक, वैज्ञानिक, औद्योगिक, सांस्कृतिक आदि सभी क्षेत्रों में पर्याप्त प्रगति हो और भारत का गौरव बढ़े.

    मै अपने भारत को समुन्नत एवं वैभवशाली देखना चाहता हू, परन्तु केवल मेरे सोचने से तो यह नही हो सकता. इसलिए सारे भारतीय भी इसी प्रकार सोचने लगे और सभी एकजुट होकर राष्ट्रोंउन्नति के कार्य में परिश्रम करे तो यह सुदिन अवश्य आ सकता है.

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