राष्ट्रीय शिक्षा नीति – 2020 | National Education Policy In Hindi

1968 और 1986 की शिक्षा नीति

राष्ट्र की स्वतंत्रता के लगभग 21 वर्षों के बाद जब पहली राष्ट्रीय शिक्षा नीति कि घोषणा कि गई तो भारतीय संविधान के अनुच्छेद 45 का विशेष ख्याल रखा गया था, जिसके अनुसार 14 वर्ष की आयु तक अनिवार्य और मुफ्त शिक्षा का प्रावधान है। इस पहली राष्ट्रीय शिक्षा नीति के माध्यम से समूचे देश में समान संरचना 10 + 2 + 4 की बात हुई। देश के सभी जाति, धर्म या क्षेत्र के प्रत्येक बच्चे को शिक्षा प्राप्ति के सामान अवसर पर जोर दिया गया था। 1968 की पहली राष्ट्रीय शिक्षा नीति में सरकारों को समय – समय पर देश में शिक्षा की प्रगति की समीक्षा करने का प्रावधान था, यह देखते हुए 18 वर्षों के प्रश्चात 1986 में दूसरी राष्ट्रीय शिक्षा नीति बनाई गई जिसको 1992 की श्री पी वी नरसिंह राव की सरकार में संशोधित किया गया जिसमें शिक्षा के आधुनिकीकरण और आवश्यक सुविधाओं पर जोर दिया गया था। इस शिक्षा नीति में प्राथमिक स्तर पर बच्चों के स्कूल छोड़ने पर रोक लगाने, 14 वर्ष की आयु तक के बच्चों को अनिवार्य शिक्षा और पिछड़े, दिव्यांगों तथा अल्पसंख्यकों की शिक्षा पर अधिक ध्यान दिया गया था। महिलाओं की साक्षरता दर बढ़ाने तथा इनके व्यावसायिक तथा तकनीकी शिक्षा के लिए व्यापक प्रावधान किये गए थे। इस शिक्षा नीति के माध्यम से कंप्यूटर तथा पुस्तकालय को बढ़ावा देने का कार्य किया गया तथा गैर सरकारी संगठनों को देश में शिक्षा की सुविधा प्रदान करने के लिए प्रोत्साहित करने का प्रावधान था।

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नयी शिक्षा नीति

आइये अब हम बात करते हैं राष्ट्र की तृतीय शिक्षा नीति जिससे विगत 29 जुलाई को देश की समक्ष प्रस्तुत किया गया। यह शिक्षा नीति भारत में 34 सालों बाद आयी है। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने 2015 से ही इस शिक्षा नीति को लेकर के तैयारियां शुरू कर दी थी। नई शिक्षा नीति तैयार करने के लिए 31 अक्‍टूबर, 2015 को सरकार ने पूर्व कैबिनेट सचिव टी. एस. आर. सुब्रह्मण्यन की अध्यक्षता में पांच सदस्यों की कमिटी बनायी, कमिटी ने अपनी रिपोर्ट भी सरकार को सौंपी लेकिन सरकार को यह रिपोर्ट पसंद नहीं आयी। इसके बाद 24 जून, 2017 को इसरो के प्रमुख रहे वैज्ञानिक के कस्तूरीगन की अध्यक्षता में नौ सदस्यों की कमेटी को नई शिक्षा नीति का ड्राफ्ट तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई। 31 मई, 2019 को ये ड्राफ्ट मानव संसाधन मंत्री श्री रमेश पोखरियाल निशंक को सौंपा गया। ड्राफ्ट पर मानव संसाधन मंत्रालय ने लोगों के सुझाव आमंत्रित किये थे साथ ही शायद यह पहली बार हुआ की शिक्षा नीति को बनाने के लिए देश के 676 जिलों के 6600 ब्लाक की 2.5 लाख ग्राम पंचायतों के सभी वर्ग के लोगों की सलाह ली गई हो। इन सुझावों और सलाहों के आधार पर ही 66 पन्नों के ड्राफ्ट की तृतीय शिक्षा नीति को केद्रीय कैबिनेट ने मंजूरी दे दी।

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नयी शिक्षा नीति की कुछ महत्वपूर्ण बातें

  1. इस शिक्षा नीति में पूर्वत जारी संरचना 10 + 2 को 5 + 3 + 3 + 4 में बदल दिया गया। जहाँ पहले ‘पांच’ को 3 वर्ष से 8 वर्ष की आयु के बच्चों लिए बनाया गया जिसमें बच्चा प्री स्कूल के साथ प्रथम और द्वितीय कक्षा में शिक्षा ग्रहण करेगा। वहीँ 3 वर्ष से 8 वर्ष की आयु के बच्चों के लिये शैक्षिक पाठ्यक्रम का दो समूहों में विभाजन किया गया, जहाँ 3 वर्ष से 6 वर्ष की आयु के बच्चों को प्री-स्कूल के माध्यम से मुफ्त, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने तथा 6 वर्ष से 8 वर्ष तक के बच्चों को प्राथमिक विद्यालयों में कक्षा 1 और 2 में शिक्षा प्रदान करने की योजना है। इसी प्रकार अगले चरण के ‘तीन’ को तृतीय से पांचवीं कक्षा के लिए बनाया गया। वहीँ अगले चरण के ‘तीन’ को छटवीं से आठवीं कक्षा के लिए बनाया गया है, जिसमें अब बच्चों को रोजगारपरक कौशल की शिक्षा दी जाएगी एवं इनकी स्थानीय स्तर पर इंटर्नशिप भी कराई जाएगी। अंतिम चरण के ‘चार’ को नवीं से बारहवीं कक्षा के लिए बनाया गया जिससे विद्यार्थियों को दो बोर्ड परीक्षाओं से छुटकारा मिल सकेगा।
  2. प्रारंभिक शिक्षा को बहु-स्तरीय खेल और गति-विधि आधारित बनाने को प्राथमिकता दी गयी है।
  3. मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नाम बदल कर शिक्षा मंत्रालय किया गया। देश की स्वतंत्रता से लेकर १९८५ तक शिक्षा मत्रालय ही हुआ करता था लेकिन श्री राजीव गाँधी सरकार ने इसका नाम बदल कर मानव संसाधन विकास मंत्रालय रखा था।
  4. नयी नीति में मातृभाषा और क्षेत्रीय भाषा पर ज्यादा जोर दिया गया।
  5. मल्टीपल एंट्री एंड एक्जिट पालिसी जोड़ी गयी है, जो की कॉलेजों में पढ़ रहे बच्चों के लिए है। जिसका उद्देश्य १ साल की पढ़ाई कर चुके छात्र को सर्टिफिकेट, दो साल पर डिप्लोमा और तीन साल पर डिग्री देने का प्रावधान है।
  6. अभी ग्रेजुएशन कोर्स तीन साल के होते हैं। अब नई सिख्स नीति में दो तरह के विकल्प होंगे, जो नौकरी के लिहाज से पढ़ रहे हैं, उनके लिए 3 साल का ग्रेजुएशन और जो रिसर्च में जाना चाहते हैं, उनके लिए 4 साल का ग्रेजुएशन। चार साल की ग्रेजुएशन के बाद एक साल का पोस्ट ग्रेजुएशन और 4 साल का पीएचडी। एमफिल कोर्स को समाप्त कर दिया गया है।
  7. अब कोई भी विद्यार्थी मनचाहे विषय चुन सकेगा यानि फिजिक्स में ग्रेजुएशन कर रहा है और उसकी म्यूजिक में रुचि है, तो म्यूजिक भी साथ में पढ़ सकता है। आर्ट्स और साइंस वाला मामला अलग अलग नहीं रखा जाएगा। इसका नाम दिया गया है मल्टी डिसिप्लिनरी एजुकेशन।
  8. नयी शिक्षा नीति में यूनिवर्सिटी की साथ साथ सबंध कॉलेज को भी परीक्षा कराने की स्वायत्ता दी जा सकेगी।
  9. उच्च शिक्षा के लिए एकल रेग्युलेटर – भारतीय उच्च शिक्षा आयोग (HECI) का गठन किया जाएगा। अब यूजीसी, एआईसीटीई जैसी कई संस्थाएं, मेडिकल और लॉ लॉ की पढ़ाई के अलावा सभी प्रकार की उच्च शिक्षा के लिए एक ही रेग्युलेटर बॉडी होगी।
  10. नई शिक्षा नीति का लक्ष्य व्यवसायिक शिक्षा सहित उच्चतर शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात को 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 2035 तक 50 प्रतिशत करना है।
  11. सेंट्रल यूनिवर्सिटी, स्टेट यूनिवर्सिटी या फिर डीम्ड यूनिवर्सिटी सहित देशभर की प्रत्येक यूनिवर्सिटी के लिए शिक्षा के मानक एक समान ही होंगे।
  12. नई शिक्षा नीति के अनुसार प्राइवेट संस्थान से लेकर सरकारी संस्थान सभी के लिए अधिकतम फ़ीस का माप दंड बनाया जायेगा।
  13. नई शिक्षा नीति में अमेरिका की तर्ज पर नेशनल रिसर्च फाउंडेशन भी बनाएं जाने का प्रावधान है, जो साइंस से लेकर आर्ट्स के विषयों पर हो रही रिसर्च प्रोजेक्ट्स को फण्ड करेगा।
  14. विश्व की टॉप यूनिवर्सिटीज को देश में अपने कैम्पस खोलने की अनुमति प्रदान की जाएगी।
  15. बच्चों के रिपोर्ट कार्ड में मूल्यांकन सिर्फ टीचर ही नहीं बल्कि छात्र स्वयं तथा उसका सहपाठी भी मूल्यांकन करेंगे।
  16. इस नीति में बच्चों को रोजगारपरक कौशल की शिक्षा के साथ-साथ इनकी स्थानीय स्तर पर इंटर्नशिप भी कराई जाएगी।
  17. नई शिक्षा नीति को 2040 तक पूर्ण रूप से लागू करने का लक्ष्य रखा गया है।
  18. नई नीति के अंतर्गत 2030 तक देश के प्रत्येक जिले में एक उच्च शिक्षण संस्थान बनाने के साथ स्कूलों तथा शिक्षण संस्थानों को डिजिटल संसाधनों, विर्चुअल लैब, डिजिटल लाइब्रेरी जैसी सुविधाओं से लैश करने एवं शिक्षकों को भी नई तकनीकी के ज्ञान से लैश करने की बात की गई है।
  19. छात्रों के सीखने की क्षमता का समय-समय पर प्रशिक्षण करने के लिए नेशनल असेसमेंट सेंटर बनाये जाने का प्रावधान भी इस नयी शिक्षा नीति में जोड़ा गया है।
  20. नई नीति में शिक्षा पर सरकारी खर्च 43 प्रतिशत से बढ़ाकर जीडीपी के 6 प्रतिशत का लक्ष्य रखा गया है।
  21. स्कूल के बाद कॉलेज में दाखिले के लिए एक कॉमन इंट्रेस एक्जाम कराने की बात की गयी है।
  22. रोजगार के लिए विभिन्न परीक्षाओं से निजात दिलाने के लिए नेशनल रिक्रूटमेंट एजेंसी का गठन किया जायेगा। जो ग्रुप बी और ग्रुप सी (गैर-तकनीकी) पदों के लिए उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट करने के लिए कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट (CET) आयोजित करेगी।

बृजेन्द्र राय

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