राष्ट्रीय सुरक्षा और विज्ञान पर निबंध | National Safety And Science Essay In Hindi

National Safety And Science Essay In Hindi प्रिय विद्यार्थियों आपका स्वागत है आज हम राष्ट्रीय सुरक्षा और विज्ञान पर निबंध आपके साथ साझा कर रहे हैं. कक्षा 1,2,3,4,5,6,7,8,9,10 के बच्चों के लिए National Safety And Science Essay In Hindi पर छोटा बड़ा निबंध 5,10 लाइन, 100, 200, 250, 300, 400 और 500 शब्दों में राष्ट्रीय एकता का निबंध पेश कर रहे हैं.

राष्ट्रीय सुरक्षा और विज्ञान पर निबंध | National Safety And Science Essay In Hindiराष्ट्रीय सुरक्षा और विज्ञान पर निबंध | National Safety And Science Essay In Hindi

Here Is A long & Short Essay On National Safety And Science Essay In Hindi Language For School Students & Kids.

National Safety And Science Essay In Hindi in 500 Words

प्रस्तावना- युद्ध मानव की दूषित प्रवृत्तियों में से एक हैं. इसे निंदनीय कहा गया हैं. इसमें मनुष्य की बर्बरता ही प्रकट होती हैं. जीवित रहने का अधिकार प्रत्येक को हैं. शासक का कर्तव्य बताया गया है कि वह अपनी प्रजा की सम्पति तथा जीवन की रक्षा करे.

दूसरे राज्य की धन सम्पति लूटने तथा निरपराध लोगों का वध करने के अनेक उदाहरणों से इतिहास भरा पड़ा हैं. अतः आत्म रक्षार्थ किया गया युद्ध शासन का अनिवार्य और आवश्यक कर्तव्य हो जाता हैं.

युद्ध को तुम निदय कहते हो मगर
आ गया हो शत्रु जब
द्वार पर ललकारता
युद्ध जब तक विश्व में अनिवार्य हैं.

राष्ट्रीय सुरक्षा में विज्ञान राष्ट्रीय सुरक्षा में विज्ञान का भी योगदान हैं. जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में विज्ञान ने प्रभावित किया हैं. पत्थरों के हथियारों से लेकर आज तक के तकनीक प्रधान हथियारों के आविष्कार तथा निर्माण का श्रेय विज्ञान को ही जाता हैं. आवश्यकता के अनुरूप नयें नयें अस्त्र शस्त्रों का आविष्कार विज्ञान के द्वारा ही हुआ हैं.

आग्नेय अश्त्रों का प्रयोग- आग्नेय अश्त्र अश्त्रों की अगली सीढ़ी हैं. शत्रु पर दूर से प्रभावी प्रहार करने में इनका महत्वपूर्ण स्थान हैं. इनमें बंदूकें, पिस्तौल, रिवाल्वर, तोप इत्यादि हथियार आते हैं.

राष्ट्र रक्षा और सेना- राष्ट्र की रक्षा सेना करती है. सेना के तीन प्रमुख अंग- थल सेना, जल सेना और वायु सेना.

थल सेना- थल सेना सेना का प्रमुख अंग हैं. यह जमीन पर लड़कर शत्रु का प्रतिरोध करती हैं. राइफल, तोपों, जीपें, टैंक आदि थल सेना द्वारा प्रयोग किये जाते हैं. बख्तरबंद गाड़ियाँ भी प्रयोग में आती हैं.

जल सेना- जिन देशों की सीमा समुद्र से घिरी हुई हैं. उनकों उस ओर से जल दस्युओं तथा शत्रु के आक्रमण का खतरा रहता है. इनकी रक्षा के लिए जल सेना का गठन होता हैं. जल सेना के पास नौकाएं, पोत, जलयान, पनडुब्बी आदि होते हैं. विशाल युद्ध पोत विभिन्न अस्त्र शस्त्रों से सुसज्जित होते हैं. यह इतने विशाल होते हैं कि युद्धक विमान इनमें उड़ान भर सकते हैं. इन पर विशाल तोपों आदि लगी रहती हैं.

वायु सेना- आकाश मार्ग से शत्रु के आक्रमण का सामना वायु सेना करती हैं. वायु सेना के पास अनेक प्रकार के विमान होते हैं. ये विमान सेना को सामान तथा खाद्य पदार्थों आदि पहुचाने के काम आते हैं. बम वर्षक विमान शत्रु पर हमला करते हैं. तथा उन्हें क्षति पहुचते हैं. वायु सेना, थल सेना तथा जल सेना को संरक्षण तथा सुरक्षा भी देती हैं. वायु सेना अपने विमानों से परमाणु आयुध तथा मिसाइल आदि को चलाने का काम भी लेती हैं.

मेडिकल तथा इंजीनियरिंग विभाग- सेना के अपने मेडिकल विभाग होते हैं. इसके अंतर्गत अपने अस्पताल तथा डोक्टर और स्वास्थ्य सेवाएं चलती हैं. इनमें ओपरेशन आदि की भी व्यवस्था होती हैं. युद्ध तथा सामान्य दिनों में सेना के लोगों की स्वास्थ्य सम्बन्धी आवश्यकताओं की पूर्ति इनमें होती हैं. इंजिनयरिंग विंग सडकें, पुल आदि बनाने सैन्य उपकरणों की मरम्मत करने तथा अन्य तकनीकी कार्य करता हैं.

परमाणु, रासायनिक तथा जीवाणु हथियार- आज राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए परम्परागत अस्त्र शस्त्रों पर निर्भरता नहीं हैं. विज्ञान ने परमाणु तकनीक से निर्मित बम तथा अन्य आयुध बनाए हैं. जिनकी प्रहार क्षमता अपार है तथा लक्ष्यभेद अचूक हैं. तरह तरह के रासायनिक हथियार आज बन चुके हैं.

इससे शत्रु की प्रहार क्षमता प्रभावित होती हैं. इनसे शत्रु के सैनिक तथा नागरिक मारे जाते हैं. किन्तु सम्पति नष्ट नहीं होती हैं. जीवाणु हथियारों का प्रयोग वर्जित है किन्तु प्रयोग द्वारा शत्रु सेना में मारक रोगों को फैलाया जाता है, शत्रु को सोचने समझने तथा हमला करने का अवसर ही नहीं मिलता हैं.

उपसंहार- राष्ट्रीय सुरक्षा में विज्ञान का अत्यंत महत्व हैं. विज्ञान के सहयोग के सहयोग के बिना राष्ट्र की सुरक्षा की कल्पना भी नहीं की जा सकती हैं. राष्ट्रीय सुरक्षा करने वालों को कदम कदम पर विज्ञान द्वारा आविष्कृत तथा निर्मित उपकरणों की आवश्यकता होती हैं.

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